बेरोजगारी पर निबन्ध , Unemployment essay in hindi

बेरोजगारी पर निबन्ध , Unemployment essay in hindi :: बेरोजगारी भारत देश का एक मुख्य मुद्दा हैं। और इस मुद्दे में प्रकाश डालने हेतु हमे हमेशा बेरोजगारी पर निबन्ध लिखने की मिलता हैं। इसीलिए आज hindivaani आपके लिए लेकर आया हैं। बेरोजगारी पर निबन्ध , Unemployment essay in hindi . जिसके अंतर्गत आपको बेरोजगारी का अर्थ , बेरोजगारी के कारण , बेरोजगारी के प्रकार ,बेरोजगारी मापन के पैमाने, बेरोजगारी के दुष्परिणाम , बेरोजगारी दूर करने के उपाय आदि की जानकारी वरदान की जाएगी।

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प्रस्तावना

एक व्यक्ति जो किसी क्षेत्र में कुशल हो परन्तु उसे रोजगार की उपलब्धता ना हो । उसे बेरोजगारी की संज्ञा देंगे। बेरोजगारी एक प्रकार से देखा जाए तो यह हमारे ही देश नही वरन सम्पूर्ण विश्व की एक विकट समस्या हैं। भारत के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सर्वे के मुताबिक भारत मे बेरोजगारी डर 3.8 % हैं। और अगर देश मे सबसे कम बेरोजगारी डर वाकई राज्य की बात की जाए तो वह गुजरात हैं। जहां पर बेरोजगारी डर 1 % हैं।और सबसे अधिक बेरोजगारी डर वाले राज्य पश्चिम बंगाल और केरल हैं।

बेरोजगारी के प्रकार

बेरोजगारी के प्रकार निम्नलिखित हैं।

  1. खुली बेरोजगारी ।
  2. शिक्षित बेरोजगारी ।
  3. घर्षणात्मक बेरोजगारी ।
  4. मौसमी बेरोजगारी ।
  5. शहरी बेरोजगारी ।
  6. ग्रामीण बेरोजगारी ।
  7. संरचनात्मक बेरोजगारी ।
  8. अल्प रोजगार वाली बेरोजगारी ।
  9. छिपी हुई और अदृश्य बेरोजगारी।
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बेरोजगारी मापन के पैमाने

राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन ने बेरोजगारी मापन के तीन पैमाने विकसित किये है।

सामान्य बेरोजगारी – इसके अंतर्गत ऐसे आंकड़ो का विश्लेषण किया जाता हैं। जिसमे की यह देखा जाता हैं। कि व्यक्ति रोजगार होकर भी बेरोजगार हैं। या पूरी तरह से ही बेरोजगार हैं। यह एक दीर्घकालिक बेरोजगारी मापने के पैमाना है।

साप्ताहिक स्थिति बेरोजगारी – इसके अंतर्गत सप्तश भर के आंकड़ो का विश्लेषण करके बेरोजगारी का अनुमान लगाया जाता हैं।

दैनिक स्थिति बेरोजगारी – इसके अंतर्गत व्यक्ति की प्रतिदिन की गतिविधियों को ध्यान में रखकर बेरोजगारी के आंकड़े तैयार किये जाते है।

बेरोजगारी के कारण

बेरोजगारी बढ़ने का मुख्य कारण जनसंख्या में हो रही वृद्धि से है। क्योंकि आजकल जनसख्या बहुत ही तेजी से बढ़ती हैं। और उतनी तेजी से रोजगार विकसित नही हो पाते है। जिस कारण से देश मे बेरोजगारी हो पाती हैं। और बेरोजगारी का दूसरा मुख्य कारण हैं। देश की दोषपूर्ण शिक्षा व्यवस्था।और इसके अलावा आजकल ज्यादा तंर कुटीर उधोगो का पतन हो चुका हैं। क्योंकि ब्रिटिश सरकार की कुटीर उधोग विरोधी नीतियों के कारण यह हुवा। और स्वतंत्रता के बाद इनके उत्थान के लिए विशेष प्रकार के कोई कदम नही उठाये गए। और धीरे धीरे ये कम होते चले गए। जिससे लोगो को रोजगार में और अधिक समस्या आ गयी।

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बेरोजगारी के दुष्परिणाम

बेरोजगारी के कई प्रकार के दुष्परिणाम होते है। इसके अंतर्गत निर्धन लोगो की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि होती हैं। जिस कारण से लोगो के बीच भुखमरी की नौबत आ जाती हैं। इसके अलावा आजकल बढ़ रही अपराध और हिंसा का भी कारण बेरोजगारी हैं। बहुत से लोग हमारे बीच ऐसे होते है। जो बेरोजगारी के कारण मानसिक रूप से अवसाद ग्रस्त हो जाते है। और कुछ समय बाद वह आत्महत्या कर लेते है।

बेरोजगारी को दूर करने के उपाय –

बेरोजगारी को दूर करने के उपाय निम्नलिखित हैं।

  1. जनसंख्या वृद्धि में अधिक से अधिक नियंत्रण किया जाए।
  2. शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
  3. लोगो को व्यवसायिक और व्यवहारिक शिक्षा प्रदान की जाए।
  4. कुटीर उधोगो को बढ़वा देने हेतु सरकार के द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं को संचालित किया जाए।

उपसंहार

आजकल बेरोजगारी को दूर करने के लिए कुछ बेहतरीन कदमो की आवश्यकता है। उनमें से एक है। कि व्यवहारिक और व्यवसायिक रोजगार हेतु सिक्षास प्रदान की जा सके। ताकि व्यक्ति स्वरोजगार हेतु सक्षम हो सके।और वह अपना खुद का व्यापार स्थापित कर खुद के साथ साथ दुसरो को भी रोजगार प्रदान कर सके।

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