Shikshaprad kahani , चालक विद्यार्थी और उसकी सूझबूझ

Shikshaprad kahani , चालक विद्यार्थी और उसकी सूझबूझ :: कहानियां अक्सर हम कुछ न कुछ अवश्य सिखाती हैं। और यदि हम बच्चों को किसी भी विषय पर सीख प्रदान करनी हो। तो इसका मुख्य उदाहरण हम कहानी के माध्यम से सरल तरीके से दे सकते है। हिंदीवानी आपके लिए लेकर आये है – शिक्षाप्रद कहानी। यह कहानी हमे सीख प्रदान करने वाली होगी। तो आइए शुरू करते है।

Shikshaprad kahani , चालक विद्यार्थी और उसकी सूझबूझ

Shikshaprad kahani

एक बार की बात है कि एक नगर में चार विद्यार्थी रहते थे। उन चार विद्यार्थियों में तीन विद्यार्थी पढ़ने में बहुत अधिक अच्छे थे।और एक विद्यार्थी पढ़ने में अच्छा ना होकर दुनियादारी की अधिक समझ रखता था। उन विद्यार्थियों ने एक दिन योजना बनाई कि यदि हम अपने राजा के समक्ष अपनी इस कुशलता का प्रदर्शन करेंगे। तो राजा हमें अनेक प्रकार के उपहारों से सुशोभित करेंगे ।चारों विद्यार्थी योजना अनुरूप राजा के दरबार की तरफ चल देते हैं। रास्ते में चलते वक्त वह देखते हैं कि बीच रास्ते में उन्हें एक शेर की खाल और हड्डियां पड़ी हैं।उनमें से एक विद्यार्थी बोलता है कि मैं अपनी कुशलता का प्रदर्शन यहीं पर करना चाहता हूं।और मैं इस शेर की खाल और कंकाल को सुव्यवस्थित कर सकता हूं।तो दूसरा विद्यार्थी उत्सुक होकर कहता है।कि मैं इस शेर की कंकाल पर मांस पढ़ा सकता हूं। तीसरा विद्यार्थी और अधिक उत्सुक होकर यह कहता है। कि मैं इस शेर को पुनः जीवित कर सकता हूं।

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अब चौथे विद्यार्थी की बारी थी परंतु वह कुछ नहीं बोला उसने सिर्फ यह कहा कि आपको जो करना है वह करें ।पर मुझे इन सब कार्य से पहले एक पेड़ पर चढ़ जाने दीजिए। उसने यह कहा कि मुझे आपकी बुद्धिमत्ता और ज्ञान पर पूरा भरोसा है।जिस वजह से आप शेर को अवश्य जीवित कर देंगे।और वह जीवित होकर आप सब लोगों को मार देगा। क्योंकि आप सब लोग शेर को जीवित तो कर देंगे परंतु उसके स्वभाव को नहीं बदल पाएंगे।

उनमें से एक विद्यार्थी यह बोलता है कि यदि हम किसी जानवर को जीवित करेंगे तो उस पर हमारा पूरा अधिकार होगा और वह हमारे अनुसार ही कार्य करेगा क्योंकि हम यह किसी को जीवनदान देंगे तो भला हमें क्यों मारेगा। सभी विद्यार्थियों ने इस बात पर सहमति जताई परंतु चौथे विद्यार्थी ने फिर भी पेड़ पर चढ़ने को ही कहा। और वह पेड़ पर चढ़ जाता हैं।कुछ समय पश्चात अन्य सभी विद्यार्थी शेर को जीवित करने हेतु कार्य करना चालू कर देते है। और वह इस योजना में सफल भी हो जाते है। परन्तु जैसे ही शेर जीवित होता हैं। वह दहाड़ता हैं, और वह तीनो विद्यार्थियों को मार कर खा जाता हैं।

शिक्षा –

  1. ईश्वर द्वारा बनाई कई किसी भी वस्तु या प्राणी के कार्य पर हमें बिल्कुल भी दखल नही देनी चाहिए।
  2. प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बुद्धिमत्ता का सही जगह पर प्रदर्शन करना चाहिए क्योंकि कभी कभी वही गयं हमारे विनाश का कारण भी बन जाता हैं।

फाइनल वर्ड –

आशा हैं कि हमने जो आपको शिक्षाप्रद कहानी(Shikshaprad kahani )उपलब्ध कराई हैं। उससे आपको सिख अवश्य मिली होगी। साथ ही साथ यह आपके दैनिक जीवन मे उपयोगी भी रहेगी। यदि आपको यह कहानी पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें और हमे यदि आप ऐसी ही कहानियां और भी पढ़ना चाहते है। तो हमे कॉमेंट बॉक्स में लिख कर इसके बारे में जानकारी प्रदान करे। ताकि हम आगे भी आपको ऐसी कहानियां उपलब्ध करा सके धन्यवाद।

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