सेटेलाइट क्या है ?, सेटेलाइट के प्रकार

सेटेलाइट क्या है ?, सेटेलाइट के प्रकार :: नमस्कार दोस्तों मैं हूं प्रवीण प्रधान आज हम बात करने जा रहे हैं सेटेलाइट के बारे में आज Hindivaani इस टॉपिक पर जानेंगे कि सेटेलाइट क्या है और सेटेलाइट कितने प्रकार की होती है। आपने कई बार जानने की कोशिश भी की होगी कि सेटेलाइट क्या होता है। और सेटेलाइट के क्या क्या यूज होते हैं

जब से इंडिया ने मंगल ग्रह पर अपना सेटेलाइट भेजा है तब से हर किसी के दिमाग में एक ही बात आती है कि सेटेलाइट है क्या। और इसके  बारे में जानने की जिज्ञासा लोगों के मन में आने लगी है। आपको जानकर बहुत खुशी होगी कि इंडिया अब अमेरिका  रूस और चीन के बाद चौथी अंतरिक्ष की महा शक्ति बन गया है।

अगर आप अभी तक सेटेलाइट के बारे में कुछ नहीं जानते और आप इसके बारे में आप पूरी जानकारी चाहते हैं तो आप सही जगह पर हैं आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से सेटेलाइट के बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।

सेटेलाइट क्या है ?, सेटेलाइट के प्रकार

सेटेलाइट क्या है ?, सेटेलाइट के प्रकार
सेटेलाइट क्या है? सेटेलाइट के प्रकार

सेटेलाइट क्या है?What is satellite

सेटेलाइट का नाम सुनते ही आपके दिमाग में Nasa  और ISRO का नाम जरूर आने लगता होगा। सेटेलाइट को हिंदी में उपग्रह भी कहते हैं।  हम लोग सोचते रहते हैं कि सेटेलाइट है क्या या फिर क्या सेटेलाइट  मशीन है जिसे नासा और इसरो अंतरिक्ष में भेजता है।  या फिर सेटेलाइट एक वह चीज है जिसकी मदद से हम घर बैठे टीवी रेडियो  देख या सुन सकते हैं या फिर जिनके मदद से हम और बहुत सारे काम कर सकते हैं। अगर आप यह सोचते हैं तो आप बिल्कुल गलत है। 

आइए जानते हैं कि सेटेलाइट को साइंटिस्ट भाषा में क्या कहते हैं।  सेटेलाइट केवल मनुष्य द्वारा भेजी गई मशीन ही नहीं बल्कि वह सारे वस्तु या पिंड होते हैं जो  अपनी निश्चित कक्षाओं में अपने से बड़े पिंड के चक्कर लगाते रहते हैं। उसे हम सेटेलाइट कहते हैं।

 चंद्रमा पृथ्वी मंगल ग्रह और भी जो ग्रह वह एक तरह से सेटेलाइट होते हैं।  उदाहरण के लिए चंद्रमा भी एक सेटेलाइट है पर यह एक प्राकृतिक सेटेलाइट है  जोकि मनुष्य के द्वारा नहीं संचालित होता है । हम सेटेलाइट के माध्यम से पृथ्वी के चारों ओर के वातावरण को मॉनिटरिंग करते रहते हैं।  सेटेलाइट का कोई भी एक आकार निश्चित नहीं होता है। सेटेलाइट का आकार छोटा भी हो सकता है और वह एक बस के जैसा बड़ा भी हो सकता है। सेटेलाइट का आकार  उसके काम पर निर्भर करता है की उस सेटेलाइट को किस काम के लिए अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है। पर यहां पर एक बात कंफर्म होती है कि सारी सेटेलाइट का डिजाइन एक ही होता है।

अब तो आप समझ गए होंगे सेटेलाइट होता क्या है अगर अभी भी एक कोई कंफ्यूजन है तो आपको एक उदाहरण के जरिए यह कंफ्यूजन आपका दूर करते हैं।  आपने देखा होगा कि इस सौरमंडल में पृथ्वी एक ऐसा पिंड है जोकि सूर्य के चारों तरफ एक कक्षा में घूमता रहता है। इसका मतलब यह है कि पृथ्वी भी एक सेटेलाइट है।

यह सेटेलाइट मनुष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है हम लोग सेटेलाइट के माध्यम से टीवी देख सकते हैं  वीडियो सुन सकते हैं और मोबाइल का जीपीएस नेवीगेशन भी इसी सेटेलाइट के माध्यम से चलता है। और हम जो लोग आपस में मोबाइल के द्वारा बात करते हैं वह भी एक सेटेलाइट के द्वारा ही संभव है। और बहुत सारे देश ऐसे हैं जो सेटेलाइट का प्रयोग अपने देश की सुरक्षा की निगरानी के लिए करते हैं।

सेटेलाइट कितने प्रकार के होते हैं?

 सेटेलाइट दो प्रकार के होते हैं

1 – मानव निर्मित  सेटेलाइट

 ऐसे सेटेलाइट जो केवल मनुष्यों के द्वारा बनाए जाते हैं और उन्हें अंतरिक्ष में भेजा जाता है व मानव निर्मित सेटेलाइट कल आते हैं।  मानव निर्मित सेटेलाइट का कोई आकार निश्चित नहीं होता है । उनका आकार एक छोटे से बॉक्स या फिर एक बड़े से बस के जैसा भी हो सकता है। या उनके काम पर निर्भर करता है कि वह किस काम के लिए भेजे जा रहे हैं।

 मानव निर्मित सेटेलाइट को तीन कैटेगरी में बांटा गया है

Low Earth Orbit (LEO)

 यह सेटेलाइट ज्यादकर  सुरक्षा के लिए भेजे जाते हैं।  इन सेटेलाइट की पृथ्वी से दूरी 1800 किलोमीटर से 2000 किलोमीटर तक की होती है।  यह सेटेलाइट पृथ्वी से कम दूरी होने के कारण इनकी रफ्तार बहुत ज्यादा होती है याएक दिन में बहुत अधिक चक्कर लगाते हैं।  इन सेटेलाइट का प्रयोग ज्यादा करके आर्मी या फिर सिक्योरिटी रीजन के लोग करते हैं।

Medium Earth Orbit

 इन सेटेलाइट की पृथ्वी से दूरी 2000 किलोमीटर से लेकर 36000 किलोमीटर तक की होती है। यह सेटेलाइट पृथ्वी केएक दिन में केवल दो चक्कर लगाते हैं।  इन सेटेलाइट का अधिकतर प्रयोग जीपीएस ट्रैकिंग के लिए किया जाता है।

Geosynchronous Orbits

 इन सेटेलाइट की पृथ्वी से दूरी 36000 किलोमीटर से ज्यादा होती है। यह सेटेलाइट पृथ्वी के चक्कर उतने टाइम  मैं ही लगाती हैं जितने की पृथ्वी अपनी कक्षा में चक्कर लगाने के टाइम लगाती है। सेटेलाइट का प्रयोग टेलीविजन के लिए किया जाता है।

2 – प्राकृतिक  सेटेलाइट

वह सेटेलाइट जो पहले से ही अंतरिक्ष में मौजूद हैं और अपने से बड़े सेटेलाइट का चक्कर लगाते रहते हैं उन्हें हम प्राकृतिक सेटेलाइट कहते हैं। 

 सेटेलाइट के प्रयोग

  • इन सेटेलाइट के माध्यम से हम मौसम का पहले से अनुमान लगा सकते हैं।  सेटेलाइट हमें पहले से मौसम के बारे में जानकारी देते हैं उदाहरण के लिए चक्रवात बाढ़ जैसी आपदाओं से हमें पहले से मालूम हो जाता है।
  •  इन सेटेलाइट की मदद से हम दूरसंचार इंटरनेट  का प्रयोग कर सकते हैं।
  •  इन सेटेलाइट का प्रयोग वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भी किया जाता है।
  •  कुछ सेटेलाइट पर्यावरण को समझने के लिए तैयार किए गए हैं इन सेटेलाइट के माध्यम से हम समुद्री जीवन को समझने में आसानी होती है।

भारत की पहली सेटेलाइट कौन सी थी ? , first satellite of india

भारत की पहली सेटेलाइट का नाम आर्यभट्ट था। यह महान गणितज्ञ आर्यभट्ट के सम्मान एवं उनके योगदान को याद रखने हेतु उनके नाम पर इस सेटेलाइट का नाम रखा गया था। इस सेटेलाइट को अंतरिक्ष मे 19 अप्रैल 1975 को भेजा गया था। इस सेटेलाइट को अंतरिक्ष मे भेजने का मुख्य उद्देश्य खगोल विज्ञान के सम्बंध में जानकारी प्राप्त करना था। आर्यभट्ट सेटेलाइट का वजन 360 किलोग्राम था।

दोस्तों आज आपने इस पोस्ट में पढ़ा की सेटेलाइट क्या है ?और सेटेलाइट कितने प्रकार की होती है। और हमने देखा कि सेटेलाइट का हमारे जिंदगी में कितने यूज़फुल हैं। अगर आज के टाइम में हम लोग टेलीविजन देखते हैं मोबाइल पर बात करते हैं इंटरनेट चलाते हैं तो वह केवल संभव है  तो केवल सेटेलाइट की वजह से ही है। अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताना और अगर आपको और किसी टॉपिक के बारे में जानकारी चाहिए हो तो हमें कमेंट करके आप बता सकते हैं हम उस टॉपिक पर जल्द से जल्द आर्टिकल अपनी इस वेबसाइट में पब्लिश कर देंगे।

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