जीन पियाजे का नैतिक विकास का सिद्धांत ,piaget-theory-of-moral-development in hindi

पियाजे का नैतिक विकास का सिद्धान्त ,piaget-theory-of-moral-development in hindi :: पियाजे ने कई प्रकार के सिद्धांत प्रस्तुत किये उन्होंने कई प्रकार के प्रयोग भी किये। पिछले आर्टिकल में हमने आपको पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत की जानकारी विस्तृत रूप में प्रदान की थी। आज हम आपको पियाजे से ही सम्बंधित पियाजे का नैतिक विकास का सिद्धान्त piaget-theory-of-moral-development in hindi की जानकारी आपको प्रदान करेंगे। तो आइए शुरू करते है –

जीन पियाजे का नैतिक विकास का सिद्धांत ,piaget-theory-of-moral-development in hindi

piaget-theory-of-moral-development in hindi

पियाजे ने नैतिक विकास का सिद्धांत प्रतिपादित किया था पियाजे के अनुसार नैतिक निर्णय के विकास में एक निश्चित क्रम में उतार की परम पाया जाता है। पियाजे के अनुसार नैतिक अवस्थाएं दो प्रकार की होती हैं। जो आपको नीचे विस्तारपूर्वक से बताई जा रही हैं।

  1. परायत्त नैतिकता ।
  2. स्वायत्त नैतिकता ।

परायत्त नैतिकता –

यह अवस्था 2 वर्ष से 8 वर्ष तक की उम्र में पाई जाती है। पियाजे के अनुरूप इस अवस्था का उदय बालकों में असमान अंतः क्रिया के माध्यम से होता है। इस काल में बच्चों में नैतिक नियम निरपेक्ष परिवर्तनशील तथा दृढ़ प्रवृत्ति के होते हैं।

READ MORE ::  Ctet study material free pdf notes , ctet subject wise free pdf notes

स्वायत्त नैतिकता –

यह अवस्था 9 वर्ष से 11 वर्ष की उम्र तक पाई जाती है। इस अवस्था में नैतिकता बच्चों के समकक्ष अर्थात मित्रों के बीच संबंधों से विकसित होती है। अपने मित्रों के संबंधों के दौरान न्याय का ऐसा दर्शन उभरता है।जिससे दूसरों के अधिकारों के संदर्भ में चिंता एवं पारस्परिकता का भाव दिखता है। बच्चों में सोचने की प्रवृत्ति होती है नियम एवं कानून लोगों द्वारा निर्मित किए गए हैं।

फाइनल वर्ड

आशा हैं कि हमारे द्वारा जो पियाजे का नैतिकता का सिद्धान्त की जानकारी आपको प्रदान की गई होगी। वह आपको बहुत अधिक पसन्द आयी होगी। यदि आपको piaget-theory-of-moral-development in hindi की जानकारी पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करे। साथ ही साथ हमे कॉमेंट बॉक्स में लिख कर इसके बारे में जानकारी प्रदान करे। धन्यवाद

Leave a Comment