Motivational story हिंदी में, लालच से हमेशा हानि ही होती है

दोस्तो आज हम एक कहानी पढ़ने जा रहे है। जिसका शीर्षक हैं – लालच से हमेशा हानि होती हैं। यह यह एक बहुत ही प्रेणादायक कहानी हैं। जो हमे अच्छी शिक्षा प्रदान करेगी। यह Motivational story हिंदी में के क्रम में एक नई कहानी हैं। जिसका उपयोग आप सभी विद्यालय में प्रेरक प्रसंग के रूप में भी कर सकते है। तो आइए शुरू करते है पढ़ना- Motivational story हिंदी में

Motivational story हिंदी में, लालच से हमेशा हानि ही होती है

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एक बार एक शहर में एक मदन नाम का व्यापारी रहता रहता था। वो दूर दूर देशों में जाकर अपना व्यापर करता था। एक बार उसने एक अजनबी देश में व्यापर करने का सोचा लेकिन उसकी समझ में ये नहीं आ रहा था कि वहां वो क्या लेकर जाए जिससे अच्छा मुनाफा मिले।

उसने और व्यापारियों से इस बारे में बात की और उन्होंने बताया कि ऐसा तो कुछ पता नहीं है लेकिन हमने सुना है कि पूरब के देशों में प्याज नहीं होती है। मदन ने फिर तय कर लिया कि वो वहां जाकर प्याज का व्यापर करके आएगा। 

अब उसने अपने शहर से और आस पास गांव से प्याज खरीदना शुरू कर दिया। जब उसके पास बहुत सारी प्याज जमा हो गयी तो उसने सारी प्याज अपने जहाज पर लदवायी और समुद्र के रस्ते पूरब की और चल दिया।

कई दिनों तक चलने के बाद उसे जमीन दिखाई दी, उसने अपना जहाज उसी ओर मोड़ दिया। मदन ने वहां उतर कर देखा ओर उसे एहसास हुआ कि यहाँ के लोग तो बहुत समृद्ध हैं। बड़ी बड़ी इमारतें, स्वर्ण अभूषणों से लदे लोग।

मदन अपनी सारी प्याज वहां उतरवाई ओर एक गोदाम किराये पर लेकर उसमे रख दी। अगले दिन जब वो अपनी प्याज को लेकर बाजार में गया तो वहां के लोग प्याज देखकर आश्चर्यचकित हो गए, क्योंकि उन्होंने प्याज कभी नहीं देखी थी। लोग ऊंचे ऊंचे दाम में उससे खरीदने लगे।

देखते ही देखते ये बात पूरे शहर में फ़ैल गयी कि पश्चिम से एक व्यापारी आया है ओर ऐसी चीज बेच रहा है जो किसी ने कभी देखी ही नहीं, ओर सबसे ख़ास बात इस चीज का लोग सब्जी में भी इस्तेमाल कर सकते हैं और मसाले में भी।

फैलते फैलते ये बात वहां के राजा के कान में में भी पहुंची। राजा ने अपने नौकर भेज कर मदन को अपने पास बुलाया। राजा ने मदन से पूछा कि ये चीज तुम कहाँ से लाये हो, तो मदन ने जवाब दिया, हुज़ूर हमारे शहर में इसकी खेती होती है।

राजा ने पूछा कि अब तुम्हारे पास कितनी प्याज बची है। मदन ने जवाब दिया यही कोई १००० किलो। राजा ने सारी प्याज खरीदने का आदेश दिया ओर सारी प्याज अपने महल में भरवा ली।

अब राजा सोच रहा था कि इस प्याज का भाव क्या दूँ। राजा को प्याज बहुत पसंद आयी थी और उसके गुण से तो राजा ओर ज्यादा प्रसन्न था। तो राजा ने आदेश दिया कि जितने किलो मदन कि प्याज है उतने ही किलो मदन को स्वर्ण मुद्राएं दी जाएँ।

क्योंकि देश बहुत संपन्न था तो राजा को प्याज के बदले स्वर्ण मुद्राएं देने में कोई हानि नहीं लगी। मदन मन ही मन बहुत खुश था। जितनी मदन की प्याज थी उतनी स्वर्ण मुद्राएं मदन को दे दी गयीं और उसे बड़े प्यार से वहां से विदा किया गया।

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अपने घर आकर मदन बहुत अमीर हो गया और बड़ी रईसी की ज़िन्दगी जीने लगा। ऐसा देख कर सारे व्यापारियों को बड़ा आश्चर्य हुआ कि ये बेचने तो प्याज गया था फिर इतना अमीर कैसे हो गया।

ऐसा क्या दाम मिल गया इसे प्याज का जो ये राजा के जैसा अमीर हो गया। उन्ही व्यापारियों में एक मुकेश नाम व्यापारी मदन का दोस्त था। एक दिन मुकेश मदन के घर गया तो उसकी आँखे फ़टी कि फ़टी रह गयीं।

मदन तो ऐसे ठाठ बाट से रह रहा था जैसे कोई राजा हो। मदन ने मुकेश का बहुत अच्छे से स्वागत किया। बातों बातों में मुकेश ने मदन से उस देश की कहानी पूछ ली। मदन ने जो भी हुआ सब बता दिया। अब तो मुकेश के मन में भी लालच आ गया।

अब मुकेश अपने घर आ गया और उसी देश में जाकर व्यापर करने की सोचने लगा। उसने लहसुन जमा करना शुरू किया और उसे लेकर उसी देश के ओर चल दिया। वहां पहुंचने के बाद उसने देखा की वहां लोग वाकई में बहुत समृद्ध हैं।

अब मुकेश ने भी वहीँ गोदाम में अपना सारा लहसुन इकठ्ठा किया और थोड़ा बहुत लहसुन लेकर बाजार पहुंच गया। वहां के लोगों ने जब लहसुन देखा तो वो फिर से आश्चर्यचकित हो गए, क्योंकि लहसुन भी उन्होंने पहली बार देखा था।

सभी लोग उसे खरीदने लगे, लेकिन मुकेश सारा लहसुन गोदाम में ही छोड़कर आया था ओर बहुत कम में बाजार में लाया था, क्योंकि उसके मन में लालच था कि सारा लहसुन मैं राजा को बेचूंगा जिससे मुझे भी जितना लहसुन हैं उतनी ही स्वर्ण मुद्राएं मिलेंगी।

लहसुन के व्यापारी की बात भी राजा तक पहुंची तो उसने मुकेश को बुलवाया और लहसुन के बारे में पूछने लगा। मुकेश ने बताया कि ये बहुत अनोखी चीज है और बहुत कम जगह ही मिलती है और इसमें औषधीय गुण हैं। राजा उससे बहुत प्रभावित हुआ और उसने मुकेश का सारा लहसुन खरीदने का आदेश दिया।

अब मुकेश मन ही मन बहुत प्रसन्न था, क्योंकि उसने सोचा कि उसे भी अब स्वर्ण मुद्राएं मिलने वाली हैं। लेकिन राजा अलग ही सोच विचार में था कि मुकेश को क्या दिया जाये? क्योंकि मुकेश ने उसे बहुमूल्य चीज दी है।

राजा ने बहुत सोचा और तय किया कि बहुमूल्य चीज के बदले बहुमूल्य चीज दी जानी चाहिए और राजा के मुताबिक अभी उसके पास सबसे बहुमूल्य चीज प्याज ही थी। इसलिए राजा ने आदेश दिया कि जितनी लहसुन मुकेश से ली है उतनी ही प्याज मुकेश को दी जाये।

राजा का आदेश पाकर मंत्रियों ने ऐसा ही किया, जितनी लहसुन मुकेश के गोदाम में थी उतनी ही प्याज मुकेश के जहाज में लदवादी।

अब मुकेश राजा के सामने तो कुछ कह नहीं सकता था तो चुपचाप प्याज लेकर चल दिया और रास्तेभर सोचता रहा कि इतनी महंगी लहसुन के बदले उसे इतनी सस्ती प्याज मिली। गया तो मुकेश फायदे के लिए था लेकिन लौटा घाटे के साथ।

कहानी से सीख

इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है कि लालच कभी नहीं करना चाहिए, लालच में हमेशा हानि ही होती है। और दूसरी बात हमे दूसरों से सीखना चाहिए ना कि उसकी नक़ल।

क्योंकि अगर हम किसी कि नक़ल करेंगे तो हमे वो ही मिलेगा जो उससे छूट गया होगा। इस कहानी में मुकेश के मन में लालच भी था और उसने मदन की नक़ल भी की और परिणामस्वरूम उसे क्या मिला, सिर्फ घाटा।

रचना: सुशांत यादव

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