चतुर खरगोश की प्रेणादायक कहानी, Moral story in hindi

चतुर खरगोश की प्रेणादायक कहानी, Moral story in hindi :: नमस्कार प्रिय पाठको हिंदीवाणी की एक और प्रेरणादायक कहानी में आपका स्वागत है दोस्तों आज की Hindi Story में एक खरगोश कैसे अपने प्राणो को दांव पर लगाकर अपने सेकड़ो साथियो की जान बचाता है यह हम इस Hindi Story में पढ़ेंगे। 

चतुर खरगोश की प्रेणादायक कहानी, Moral story in hindi

चतुर खरगोश की प्रेणादायक कहानी, Moral story in hindi
चतुर खरगोश की प्रेणादायक कहानी, Moral story in hindi

एक बहुत बड़ा जंगल था और उसमे बहुत ही ताकतवर शेर रहता था। वह जिस भी पशु को देखता था उसको मारकर खा जाता था। जब कई दिनों तक शेर ऐसा ही करता रहा तो जंगल के दूसरे जानवर बहुत  घबरा गए। एक दिन सभी जानवरो ने मिलकर आपस में सलाह कि ओर वे सब मिलकर जंगल के राजा शेर के पास पहुंचे। 

सभी जानवर मिलकर बोले ”आप तो हमारे राजा है” आप क्यों रोज-रोज परेशान होते है ? हम एक पशु रोज आपके पास भेज दिया करेंगे। जिसे आप खाकर अपनी भूख मिटा सकते है और हम भी जंगल में स्वत्रंत्र होकर जी सकते है। 
शेर जानवरो की यह बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुआ। उसने कहा अगर तुम सब अपने वचन का पालन करोगे तो में किसी और को नहीं खाऊंगा और ना ही किसी जानवर को परेशान करूंगा पर रोज एक  पशु मेरे पास पहुँच जाना चाहिए। 

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उसके बाद हर रोज शेर के पास ठीक समय पर एक पशु पहुँच जाता जिसे वह मारकर अपनी भूख शांत कर लेता था।  
एक दिन एक खरगोश की बारी आयी। वह बड़ा चालाक था और चतुर भी था। खरगोश सोचने लगा कि क्या शेर से बचने का कोई रास्ता नहीं है ? खरगोश सोचने लगा जो बुद्धिमान होते है वे आपत्ति और विपत्ति में भी नहीं घबराते। मुझे भी नहीं घबराना चाहिए और ऐसा काम करना चाहिए जिससे हम सब की रक्षा हो सके। 

यही सोचते सोचते उसे शेर के पास पहुँचने में देरी हो गयी। शेर गुस्से में गरज उठा और जब खरगोश वहां पहुंचा तो उसने गरज कर पूछा “क्यों रे छोटा सा है” फिर भी तूने मेरे पास आने में देर क्यों की ?

खरगोश ने बिना किसी डर के जवाब दिया “हे स्वामी” मेने जानबूझकर देर नहीं की ! हुआ यह कि जब में आ रहा था तो रास्ते में अचानक दूसरा शेर मिल गया। वह बहुत बलवान था। उसने मुझे रोक लिया। मेने किसी तरह से उसे झूठ बोलकर उससे कहा कि में एक जरुरी काम से जा रहा हूँ जल्दी ही लोट आऊंगा तब कही जाकर उसने मुझे छोड़ा। 

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यह सुनकर शेर की आँखे क्रोध से लाल हो गयी। उसने जोर से अपनी पूंछ को पटका और दहाड़ कर बोला ”मेरे राज्य में यह दूसरा शेर कहाँ से आया” जल्दी बताओ वो कहाँ रहता है। 
खरगोश ने उसी शांत स्वभाव में कहा हे स्वामी आइये में आपको उसके रहने की जगह दिखाता हूँ। 

उसके बाद आगे आगे खरगोश और पीछे पीछे शेर। दोनों चलते चलते एक कुएँ के पास पहुंचे। खरगोश ने कहा हे स्वामी वो दूसरा शेर इसी कुएँ में रहता है आप खुद झांककर देख लीजिये। 
शेर ने कुएँ में झाँका तो कुएँ में उसे अपनी परछाई दिखाई दी उस परछाई को शेर ने दूसरा शेर समझकर जोर से दहाड़ लगाई। 
जैसे ही वो दहाड़ा कुएं में से उससे भी जोरदार दहाड़ने की आवाज आती। शेर बड़ा ही मुर्ख था तथा उसे अपनी ताकत पर घमंड़ भी था उसने समझा कि कोई दूसरा शेर मुझसे भी तेज दहाड़ रहा है में उसे अभी मार डालता हूँ। 

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इस प्रकार सोचते हुए शेर ने कुएँ में छलांग लगा दी और अपने प्राण त्याग दिए।
खरगोश खुशी से उछलता हुआ अपने साथियो के पास पहुंचा और उन्हें सारी कहानी सुनाई वे सब बहुत प्रसन्न हुए और सुखपूर्ववक जंगल में रहने लगे। 

यह Hindi Story हमे प्रेरणा देती है कि हमे भी खरगोश की तरह चतुराई से कार्य करने चाहिए। चाहे आपके जीवन कितनी ही बड़ी आपत्ति या विपत्ति क्यों ना आए जाये उसे आपको सोच समझकर खरगोश की तरह शांति और चतुराई से दूर करना चाहिए। 

दोस्तों में लोकेश रेशवाल जो आपको यह हिंदी स्टोरी सुना रहा हूँ वो मेरी हिंदी वाणी पर पहली पोस्ट थी आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये तथा साथ ही इसे अपने मित्रो के साथ शेयर भी कर दे ताकि आपकी तरह वो भी इस कहानी को पढ़ सके। 

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