विशिष्ट बालक का अर्थ और प्रकार,meaning and definition of exceptional children in hindi

विशिष्ट बालक का अर्थ और प्रकार,meaning and definition of exceptional children in hindi : प्रत्येक विद्यालय में कई प्रकार के बालक पढ़ते हैं म जिनके लिए अनेक प्रकार की शिक्षाओं का प्रावधान किया गया हैं। इन बालको की अपनी अलग विशेषता होती हैं। इन्ही विशेषता को देखकर उनके पढ़ाने के तरीके को निर्धारित किया जाता हैं। आज हिंदीवाणी आपको विशिष्ट बालक का अर्थ और प्रकार की जानकारी प्रदान करेगा। जिसके अन्तर्गत आपको प्रतिभाशाली बालक का अर्थ परिभाषा , पिछड़े बालक की अर्थ और परिभाषा , मानसिक रुओ से मण्ड बालक की अर्थ और परिभाषा , समस्यात्मक बालक की अर्थ और परिभाषा आदि की जानकारी प्रदान की जॉयेगी। तो आइए शुरू करते है। और पढ़ते हैं विशिष्ट बालक का अर्थ और प्रकार

विशिष्ट बालक का अर्थ और प्रकार ,meaning and definition of exceptional children in hindi

meaning and definition of exceptional children in hindi

विशिष्ट बालक का अर्थ (Meaning of exceptional children)

प्रत्येक विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने के लिए कुछ सामान्य बालक प्रवेश कहते हैं।तो कुछ ऐसे बालक प्रवेश लेते हैं। जिनमें विशेष प्रकार की शारीरिक और मानसिक विशेषताएं पाई जाती हैं। इनमें से कुछ बालक प्रतिभाशाली तो कुछ मंदबुद्धि और कुछ पिछड़े होते है। और कुछ शारीरिक दोष वाले होते हैं।इनको हम विशिष्ट बालक की संज्ञा देते हैं।अर्थात इन्हें ही हम विशिष्ट बालक कहते हैं।

विशिष्ट बालक की परिभाषा ( Definition of exceptional children in hindi )

क्रो एंड क्रो के अनुसार विशिष्ट बालक की परिभाषा

“वह बालक जो मानसिक ,शारीरिक, सामाजिक और संवेगात्मक आज विशेषताओं में औसत से विशिष्ट हो और यह विशिष्टता इस स्तर की हो कि उसे अपने विकास क्षमता की उच्चतम सीमा तक पहुंचने के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता हो इन्हें हम विशिष्ट बालक कहते हैं ।”

विशिष्ट बालक के प्रकार (kinds of exceptional children)

विशिष्ट बालक को मुख्यतः चार भागों में बांटा गया है।

  1. प्रतिभाशाली बालक (Gifted children)
  2. पिछड़े बालक (Backward children)
  3. मंदबुद्धि बालक (Mentally Retarded children)
  4. समस्यात्मक बालक(Problem children)

प्रतिभाशाली बालक का अर्थ(Meaning of gifted child)

स्किनर के अनुसार प्रतिभाशाली बालक

“प्रतिभाशाली शब्द का प्रयोग उन 1% बालकों के लिए किया जाता है जो सबसे अधिक बुद्धिमान होते हैं”

टर्मन एंड ओडन के अनुसार प्रतिभाशाली बालक

“प्रतिभाशाली बालक शारीरिक गठन ,सामाजिक समायोजन, व्यक्तित्व के लक्षणों, विद्यालय उपलब्धि, खेल की सूचना और रुचियों की बहू रूपता में सामान्य बालकों से बहुत श्रेष्ठ होते हैं”

प्रतिभाशाली बालक की विशेषताएं (characteristics of gifted children)

प्रतिभाशाली बालक की विशेषताएं निम्नलिखित हैं।

  1. विशाल शब्दकोश
  2. मानसिक प्रक्रिया की तीव्रता
  3. दैनिक कार्य में विभिन्नता
  4. सामान्य ज्ञान की श्रेष्ठता
  5. सामान्य अध्ययन में रुचि।
  6. अध्ययन में अद्वितीय सफलता।
  7. अमूर्त विषयों में रूचि
  8. आश्चर्यजनक अंतर्दृष्टि का प्रमाण।
  9. मंदबुद्धि और सामान्य बालकों से अरुचि ।
  10. पाठ्य विषयों में अत्यधिक रुचि या अरुचि।
  11. विद्यालय को कार्यों के प्रति बहुदा उदासीनता
READ MORE ::  गार्डनर का बहुबुद्धि सिद्धान्त(Gardner theory of multiple intteligence in hindi)

प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा(education of gifted children)

प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा निम्नलिखित प्रकार से होती हैं।

सामान्य रूप से कक्षोन्नति – कुछ मनोवैज्ञानिकों का यह मानना है कि प्रतिभाशाली बालक को 1 वर्ष में दो बार कक्षा में उन्नति प्रदान करना चाहिए। परंतु वही कुछ में वैज्ञानिकों का यह भी मानना है।कि से बालक का क्रमिक विकास के लाभ से वंचित रह जाएगा।उनका यह विचार है कि आवश्यक नहीं प्रतिभाशाली बालक के प्रत्येक विषय अच्छे हो। ऐसी दशा में ऊपरी कक्षाओं में कुछ विषयों में समायोजन करने में दिक्कत होगी

विशेष और विस्तृत पाठ्यक्रम – कुछ मनोवैज्ञानिक को को यह कहना है कि 1 वर्ष में दो बार कक्षा में उन्नति करने के बचाए बालक को विशेष और विस्तृत पाठ्यक्रम निर्माण करके देना चाहिए।इन पाठ्यक्रम में अधिक और कठिन विषय सम्मिलित हों।ताकि वह अपने विशेष योग्यता के आधार पर अधिक ज्ञान का अर्जन कर सकें।

शिक्षक का व्यक्तिगत ध्यान – शिक्षक को प्रतिभाशाली बालकों को पर विशेष रूप से ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है।उससे उन को नियमित रूप से परामर्श और निर्देशन देना जरूरी समझा जाता है ।इन विधियों का अनुसरण करके ही बाबू को उनकी विशेष योग्यता के अनुसार प्रगति करने के लिए अनुप्राणित कर सकता हैं।

विशेष अध्ययन की व्यवस्थाये – प्रतिभाशाली बालकों को सामान्य विषयों के अध्ययन करने में विशेष रूचि होती है उनके इस रुचि को और अधिक विकसित करने के लिए प्रत्येक विद्यालय में विभिन्न विषयों की पुस्तकों से सुसज्जित प्रकार की पुस्तकालय होना अनिवार्य हो। वह इस प्रकार की शैक्षिक सुविधाएं उनको अधिक जानकार जन करने में अपूर्व सहायता प्रदान कर सकती हैं।

READ MORE ::  बालक का शारीरिक विकास|Physical development of child

पिछड़े बालक का अर्थ (meaning of backward child)

जो बालक कक्षा का औसत कार्य नहीं कर पाता और अच्छा की आवश्यकता पीछे रहता उसे पिछड़ा बालक कहते हैं।

पिछड़े बालक की परिभाषाएं (definition of backward child)

शोनल व शोनल के अनुसार

“पिछड़े बालक की जीवन आयु के अन्य छात्रों की तुलना में विशेष शैक्षिक निम्नता व्यक्त करते हैं”

पिछड़े बालक की विशेषताएं (characteristics of backward child)

पिछड़े बालक की विशेषताएं निम्नलिखित हैं।

  1. सीखने की धीमी गति ।
  2. जीवन में निराशा का अनुभव ।
  3. समाज विरोधी कार्यों की प्रवृत्ति ।
  4. व्यवहार संबंधी समस्याओं की अभिव्यक्ति।

पिछड़ेपन या शैक्षिक मंदता के कारण(causes of backward retardation)

पिछड़ेपन व शैक्षिक मन्दता के कारण निम्नलिखित हैं।

  1. सामान्य से कम शारीरिक विकास
  2. शारीरिक दोष
  3. शारीरिक रोग
  4. निम्न सामान्य बुद्धि
  5. परिवार की निर्धनता

पिछड़ेपन बालक की शिक्षा (education of backward child)

पिछड़े बालक की शिक्षा निम्नलिखित प्रकार से होती हैं।

विशिष्ट विद्यालय की स्थापना – पिछले बालकों विशिष्ट बालकों की लिए विशेष प्रकार के विद्यालयों की स्थापना करना जरूरी है।क्योंकि विशिष्ट बालक के विशिष्ट विद्यालय में पढेंगे।तो उनको और अधिक लाभ मिलेगा ऐसे विद्यालय में उनके पिछड़ेपन के कारणों का सरलता से अध्ययन करके उपचार किया जा सकता है।

विशिष्ट कक्षाओं की स्थापना – यह किसी कारणवश विजय ने बालकों के लिए विशिष्ट विद्यालयों की स्थापना ना हो पाए तो उनके लिए यह जरूरी है।कि प्रत्येक विद्यालय में विशिष्ट कक्षाएं स्थापित की जाए।

छोटे समूहों में शिक्षा – पिछड़े हुए बालक वास्तविक प्रगति तभी कर सकते हैं।जब शिक्षकों द्वारा उनके प्रति व्यक्तिगत रुप से ध्यान दिया जाए यह तभी संभव है। जब उनके छोटे समूह में शिक्षा दी जाए।

READ MORE ::  सतत मूल्यांकन और व्यापक मूल्यांकन। सतत और व्यापक मूल्यांकन में अंतर

विशेष पाठ्यक्रम का निर्माण – पिछड़े बालकों के लिए विशेष प्रकार के पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाना चाहिए पाठ्यक्रम अधिक से अधिक लचीला और सामान्य बालकों के पाठ्यक्रम से कम बोझिल व कम विस्तृत होना चाहिए। इसके अतिरिक्त वह बालकों के लिए उपयोगी हो साथ ही साथ उनके जीवन से संबंधित और उनकी आवश्यकताओं को पूर्ण करने वाला होना चाहिए।

मानसिक रूप से मंद बालक या मन्द बालक का अर्थ (meaning of retarded children)

मानसिक मंदता वाले बालकों की बुद्धि लब्धि साधारण बालकों की बुद्धि लब्धि से कम होती है।

मंदबुद्धि बालक की विशेषताए( characteristics of retarded child)

मंदबुद्धि बालक की विशेषताएं निम्नलिखित हैं।

  1. विद्यालय में असफलताओं के कारण निराशा ।
  2. संवेगात्मक और सामाजिक असमायोजन ।
  3. सीखी हुई बात को नई परिस्थिति में प्रयोग करने में कठिनाई
  4. मान्यताओं के संबंध में अटल विश्वास।

मंदबुद्धि बालक की शिक्षा

मन्द बुद्धि बालक की शिक्षा निम्नलिखित प्रकार की होनी चाहिए।

1.विशेष प्रकार की देखरेख में इनका प्रशिक्षण तथा कपड़े पहने उतारने का अभ्यास ,भोजन करते समय शिष्टाचार आदि प्रकार की शिक्षा होनी चाहिए।

2.मंदबुद्धि बालकों को सामाजिक प्रशिक्षण सामूहिक कार्यों परिजनों हर दिन की योजनाओं और विशिष्ट शिष्टाचार की शिक्षा द्वारा दिया जाना चाहिए।

3.शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की शिक्षा।

4.निष्क्रिय और सक्रिय मनोरंजन की शिक्षा।

समस्यात्मक बालक का अर्थ(meaning of problem child)

जिसके व्यवहार में कोई ऐसी असामान्य बात होती है।जिसके कारण वह समस्या बन जाती है।उन्हें समस्यात्मक बालक कहते हैं।

जैसे -चोरी करना झूठ बोलना आदी।

समस्यात्मक बालकों के प्रकार

  1. चोरी करने वाले बालक
  2. झूठ बोलने वाले बालक
  3. क्रोध करने वाले बालक
  4. मादक द्रव्यों का सेवन करने वाले बालक

Final word –

आशा हैं कि हमारे द्वारा दी गयी विशिष्ट बालक का अर्थ और प्रकार की जानकारी आपको काफी पसन्द आयी होगी। यदि meaning and definition of exceptional children in hindi की जानकारी आपको पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करे। साथ ही साथ कॉमेंट बोसमे लिख कर इसके बारे में हमे जनाकारी अवश्य दे। धन्यवाद

Leave a Comment