वंशानुक्रम व वातावरण का प्रभाव |influence of Heridity and environment in hindi)

वंशानुक्रम व वातावरण का प्रभाव |influence of Heredity and environment in hindi): मानव विकास अनेक कारको द्वारा होता है। इन कारको में दो कारक प्रमुख है। जैविक एवं सामाजिक। जैविक विकास का दायित्व माता पिता पर होता है। और सामाजिक विकास का वातावरण का। आज hindivaani इस विषय पर विस्तृत चर्चा करेगा

अनुक्रम

वंशानुक्रम का अर्थ (Meaning of Heredity)

बालक में ना केवल अपने माता-पिता के बल्कि उनके संबंधित पूर्वजों से भी अनेक शारीरिक और मानसिक गुण प्राप्त होते हैं। इसे ही हम वंशानुक्रम ,वंश परंपरा ,पैतृकता ,अनुवांशिकता आदि नामों से जानते हैं।

वंशानुक्रम व वातावरण का प्रभाव |influence of Heredity and environment in hindi

वंशानुक्रम व वातावरण का प्रभाव |influence of Heredity and environment in hindi

वंशानुक्रम की परिभाषाए(Definition of heredity)

वंशानुक्रम की विभिन्न शिक्षण शास्त्रियों के अनुसार निम्नलिखित परिभाषाएं हैं।

बीएन झा के अनुसार

” वंशानुक्रम व्यक्ति की जन्मजात विशेषताओं का पूर्ण योग है”

वुडवर्थ के अनुसार

“वंशानुक्रम में वे सभी बातों आ जाती हैं।जो जीवन का आरंभ करते समय,जन्म के समय नहीं वरन गर्भाधान के समय,जन्म से लगभग 9 माह पूर्व व्यक्ति में उपस्थित थी।”

जेम्स ड्रेवर के अनुसार

“माता-पिता की शारीरिक एवं मानसिक विशेषताओं का संतानों में हस्तांतरण होना वनक्रम है।”

एच .ए . पीटरसन के अनुसार

“व्यक्ति को अपने माता-पिता से पूर्वजों की विशेषताएं प्राप्त होती है उसे कहते हैं।”

डगलस एवम हॉलैंड के अनुसार ,

“एक व्यक्ति के वंशानुक्रम में वे सब शारीरिक बनावट, शारिरिक विशेषयताये , क्रियाएं या क्षमताएं सम्मलित रहती हैं। जिनको वह अपने माता पिता , अन्य पूर्वजो या प्रजाति से प्राप्त करता हैं। “

जे . ए. थाम्पसन के अनुसार ,

“वंशानुक्रम , क्रमबद्ध पीढियों के बीच उतपत्ति सम्बन्धी , सम्बन्ध के लिए सुविधाजनक शब्द हैं।”

वंशानुक्रम के नियम (Laws or principal of Heredity)

वंशानुक्रम जिन नियमों तथा सिद्धांत पर आधारित है। यह विषय भी अध्ययन के नए आयाम प्रस्तुत करता है। वंशानुक्रम के मुख्य नियम निम्नलिखित हैं।

  1. बिजकोष की निरंतरता का नियम (Law of continuity of germ plasm)
  2. समानता का नियम(Law of resemblance)
  3. विभिन्नता का नियम(Law of variation)
  4. प्रत्यागमन का नियम (Law of regression)
  5. अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम(Law of transmission of acquired traits)
  6. मेंडल का नियम(Mendel’s law)

बीजकोष निरंतरता का नियम

इस नियम के अनुसार बालक को जन्म देने वाला बीजकोष कभी नष्ट नहीं होता है। इस नियम के प्रतिपादक बिजमैन का कथन है ” बीज़कोष का कार्य केवल उत्पादक कोषों का निर्माण करना है।जो बीजकोष को उस बालक को अपने माता पिता से मिलता है।उसे वह अगली पीढ़ी को हस्तांतरित कर देता है।इस प्रकार बीजकोष पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है।

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समानता का नियम

इस नियम के अनुसार जैसे माता-पिता होते है।वैसे ही उनकी सन्तान होती है। इस नियम के अर्थ को समझाते हुए सोरेंसन कहा है “कि बुद्धिमान माता पिता के बच्चे बुद्धिमान ,साधारण माता-पिता के बच्चे साधारण और मंदबुद्धि माता-पिता के बच्चे मंदबुद्धि होते हैं।इसी प्रकाश शारीरिक रचना की दृष्टि से भी माता पिता के समान होते हैं।

विभिन्नता का नियम

इस नियम के अनुसार बालक अपने माता-पिता के बिल्कुल समान न होकर उनसे कुछ भिन्न होते हैं।इसी प्रकार एक ही माता-पिता के बालक एक दूसरे के सामान होते हुए भी बुद्धि, रंग और स्वभाव में एक दूसरे से भिन्न होते हैं।कभी-कभी उनके पर्याप्त शारीरिक और मानसिक विभिन्नता पाए जाते हैं। इस कारण बताते हुए सोरेनसन ने लिखा है “इस विभिन्नता का कारण माता-पिता के उत्पादक कोषों विशेषताएं हैं।उत्पादकों से में अनेक पित्र्येक होते हैं। जो विभिन्न प्रकार से संयुक्त होकर एक दूसरे से भिन्न बच्चों का निर्माण करते हैं।

प्रत्यागमन का नियम

इस नियम के अनुसार बालक में अपने माता-पिता के विपरीत गुण पाए जाते हैं।इस नियम का अर्थ स्पष्ट करते हुए सोरेनसन ने लिखा है”कि बहुत प्रतिभाशाली माता-पिता के बच्चों में कम प्रतिभा होने की प्रवृत्ति और बहुत निम्न कोटि के माता-पिता के बच्चों में कम निम्न की प्रवृत्ति ही प्रत्यागमन है।”

अर्जित गुणों के संक्रमण का नियम

इस नियम के अनुसार माता-पिता द्वारा अपने जीवन काल में अर्जिय किए जाने वाले गुण उनकी संतान को प्राप्त नहीं होते हैं।इस नियम को अस्वीकार करते हुए विकासवादी लैमार्क ने लिखा है “कि व्यक्तियों द्वारा अपने जीवन में जो कुछ भी अर्जित किया जाता है वह उनके द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले व्यक्तियों को संक्रमित किया जाता है”

मेंडल का नियम

ग्रेगर जॉन मेंडल ने जो प्रयोग किए इन प्रयोग से प्राप्त निष्कर्षों से वंश क्रम तथा वातावरण के प्रभाव के अध्ययन में अत्यधिक योग दिया।चाहे छोटी-बड़ी मटर मिलाकर बोने का प्रयोग हो अथवा काले सफेद चूहों को एक साथ रखकर उनके संतति व्यापार का प्रयोग हो कुछ निष्कर्ष ऐसे निकालें जिससे वंश क्रम की शुद्धता का पता चलता है। इससे उसने प्रत्यागमन के सिद्धांत का निरूपण किया।

बालक पर वंशानुक्रम का प्रभाव(influence of heredity child)

बालक पर वंशानुक्रम का प्रभाव निम्नलिखित है।

मूल शक्तियों पर प्रभाव

थार्नडाइक मत है कि बालक की मूल शक्तियों का प्रधान कारण उसका वंशानुक्रम है।

शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव

पीयरसन का मत है कि यदि माता-पिता की लंबाई कम या अधिक होती है।तो उनके बच्चे की भी लंबाई कम या अधिक होती है।

प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव

क्लिंबर्ग का मत है कि बुद्धि की श्रेष्ठता का कारण प्रजाति है। यही कारण है कि अमरीका की श्वेत प्रजाति नीग्रो प्रजाति से श्रेष्ठ है।

सामाजिक स्थिति पर प्रभाव

विनशिप का मत है कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की संतान प्रतिष्ठा प्राप्त करती हैं।वह इस निष्कर्ष पर रिचर्ड्स एडवर्ड के परिवार का अध्ययन करने के बाद पहुंचे।रिचर्ड स्वयं गुणवान और प्रतिष्ठित व्यक्ति था।उसने एलिजाबेथ विवाह किया। वह भी उसी के सामान थे। इन दोनों के वंशजों को विधानसभा के सदस्य ,महाविद्यालय के अध्यक्ष आदि पद प्राप्त हुए। उनका एक वंशज अमेरिका का उपराष्ट्रपति बना।

चरित्र का प्रभाव –

डगडेन कहते हैं कि यदि किसी के माता पिता चरित्र हीन थे तो उनकी सन्तान भी चरित्र हीन होगी। उन्होंने इस बात को सिद्ध 1877 ईस्वी में ज्यूस के वंशजों का अध्ययन करके किया था। 1720 में न्यूयॉर्क में जन्म लेने वाले जीव का एक चरित्रहीन मनुष्य थे और उनकी पत्नी भी एक चरित्रहीन स्त्री थी जिसके कारण इनको जो वंशज हुए वह विभिन्न प्रकार की अपराधिक सनलिप्ताओ में पाए गए।

महानता का प्राभव –

गॉल्टन का कहना हैं कि व्यक्ति के महान बनने का कारण उसका वंशानुक्रम होता है महान बन्ना वंशानुक्रम का ही परिणाम माना जाता है जिसके कारण ही व्यक्तियों के शारीरिक और मानसिक लक्षणों में विविधता पाई जाती है व्यक्ति का कारण व कद , वर्ण , स्वास्थ्य ,बुद्धि, मानसिक शक्ति आदि सभी वंशानुक्रम पर आधारित रहते हैं।

वृद्धि का प्रभाव –

गोडार्ड का कहना हैं कि मंदबुद्धि माता-पिता की संतान मंदबुद्धि पाई जाती है। साथ ही साथ तीव्र बुद्धि के माता-पिता की संतान की तीव्र बुद्धि वाली होती है। उन्होंने इस बात को कालीकन नामक एक सैनिक के वंशजों के अध्ययन के आधार पर कहा था। कालिकान ने पहले एक मंदबुद्धि स्त्री से विवाह किया ।उसके बाद उसने एक तीव्र बुद्धि वाली महिला से शादी की। मंदबुद्धि स्त्री से विवाह किया तो पहले स्त्री के 480 वंशजो में से 143 मंदबुद्धि , 46 सामान्य 36 अवैध संतान , 32 वेश्याएं, 24 शराबी, 3 मृग रोगी , 8 वेश्यालय स्वामी , 3 अपराधी थे।

वातावरण का अर्थ व परिभाषा(Meaning and definition of environment)

वातावरण का अर्थ (Meaning of environment)

वातावरण के लिए पर्यावरण शब्द का भी प्रयोग किया जाता है। पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना परि + आवरण परि का अर्थ है चारों ओर से ,आवरण का अर्थ ढका हुआ।इस प्रकार हम पर्यावरण को यह कर सकते हैं कि जो वस्तु हमें चारों ओर से घेरे हुए है उसे हम वातावरण या पर्यावरण कहते हैं।

वातावरण की परिभाषाएं (Definition of environment)

वुडवर्ड के अनुसार वातावरण की परिभाषा

“वातावरण में वे सब बाह्य तत्व आ जाते हैं।जिन्होंने व्यक्ति को जीवन आरंभ करने के समय से प्रभावित किया है।”

रॉस के अनुसार वातावरण की परिभाषा

“वातावरण वह बाहरी शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है”

जिस्बर्ट के अनुसार वातावरण की परिभाषा

“वातावरण वह हर वस्तु है जो किसी अन्य वस्तु को घेरे हुए और उस पर सीधे अपना प्रभाव डालती है”

बालक पर वातावरण का प्रभाव (Influence of environment on child)

बालक पर वातावरण का प्रभाव निम्नलिखित है।

शारीरिक अंतर पर प्रभाव

बोंस ने यह माना है कि विभिन्न प्रकार की जो प्रजातियों में अंतर पाया जाता है।वह अंतर वंशानुक्रम के कारण ना होकर वातावरण के कारण होता है।उन्होंने उसके अनेक उदाहरण दिए हैं।कि जो विश्व में अनेक प्रकार के जापानी यहूदी और अमेरिकी में अनेक पीढ़ियों में अंतर पाए जाते हैं।वह भौगोलिक वातावरण के कारण होते हैं।

बुद्धि का प्रभाव

कैंडोल का मत है कि की उन्होजे विभिन्न प्रयोगों द्वारा यह देखा की ” अधिकांश सदस्य धनी और अवकाश प्राप्त वर्गो के थे। उनको शिक्षा की सुविधाएं थी । और उनको शिक्षित जनता और उदार सरकार से प्रोत्साहन दिया”

व्यक्तित्व का प्रभाव

कुले मत है।कि व्यक्तित्व के निर्माण में वंशानुक्रम की अपेक्षा वातावरण का अधिक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने उन्होंने यूरोप के 71 साहित्यकार एक उदाहरण देते हुए बताया है।कि बनयान और बनर्स जन्म निर्धन परिवार में हुआ था। फिर भी वह अपने व्यक्तित्व का निर्माण करके महान बन सके। इसका कारण केवल यह था कि उनके माता-पिता ने उनको उत्तम वातावरण में उन्हें रखा।

मानसिक विकास का प्रभाव

गोल्डन का मत है कि उचित सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण ना मिलने पर मानसिक विकास की गति धीमी हो जाती है। उसने यह बात नदियों के किनारे रहने वाले बच्चों काे अध्ययन करके सिद्ध की है कि इन बच्चों का वातावरण गंदा और समाज के अच्छे प्रभाव से दूर थे ।

वंशानुक्रम व वातावरण का संबंध(Relation of Heredity and environment)

वंशानुक्रम तथा वातावरण एक दूसरे से पृथक नहीं है। यह एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं।जिस प्रकार से बीज और खेत का संबंध है।उसी प्रकार से वातावरण और वंशानुक्रम का भी संबंध है। लैंडिस ने इसलिए कहा है कि “वंश क्रम हमें विकसित होने की क्षमता प्रदान करता है इन क्षमताओं के विकसित होने के अवसर हमें वातावरण से मिलते हैं।वंश क्रम हमें कार्यशील पूंजी देता है।और परिस्थिति हमें इसको निवेश करने के अवसर प्रदान करती है।

वुडवर्थ तथा मारेक्विस ने कहा है “कि व्यक्ति वंश क्रम तथा वातावरण का योग नहीं गुणनफल है।”

निवेदन

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