चार आने का हिसाब , हिंदी प्रेणादायक कहानी

चार आने का हिसाब , हिंदी प्रेणादायक कहानी :: बहुत समय पहले की बात है। दक्षिण का राजा बड़ा प्रतापी और दयालु था। वह हमेशा अपने जनता के भलाई के बारे मे ही सोचता था। वहाँ की जनता भी इस दयालु राजा से बहुत खुश थी। दूर-दूर तक इस दयालु राजा के समृद्धि की चर्चाएं होती थी। कुल मिलाकर राज्य मे किसी प्रकार की कोई कमी नही थी।

हिंदी प्रेणादायक कहानी

राज के महल में हर एक सुख-सुविधा की वस्तु उपलब्ध थी। लेकिन फिर भी अंदर से उसका मन हमेशा अशांत रहता था। राजा अपने आप मे संतुष्ट नही था।

राजा ने इस समस्या का कारण जानने के लिए कई ज्योतिषियों और पंडितों से मिला। बहुत से विद्वानो से मिला। किसी ने राजा को कोई अंगूठी पहनाई तो किसी ने यज्ञ कराए। इतना होने के बावजूद भी राजा का दुःख दूर नहीं हुआ, अभी भी उस की समस्या ज्यों का त्यों बना हुआ था।

एक दिन की बाद है। राजा को अचानक घूमने का मन हुआ। वह भेष बदल कर बिल्कुल एक आम इंसान की तरह अपने राज्य की सैर पर निकला।

काफी देर तक घूमने के बाद वह एक खेत के निकट से गुजरा। खेतों की हरियाली बड़ी अच्छी लग रही थी। राजा बहुत अच्छा महसूस कर रहा था। तभी उसकी नज़र बगल के खेत मे काम कर रहे एक किसान पर पड़ी। किसान ने फटे-पुराने कपड़े पहन रखे थे और अपने खेतों मे बड़ी लगन से काम कर रहा था।

चूंकि राजा बहुत दयालु था, इसलिए किसान के वस्त्र देख कर राजा के मन में आया कि जरूर यह किसान बहुत गरीब है। उसने सोचा की अगर वह किसान को कुछ सोने के सिक्के दे दे, ताकि उसके जीवन मे कुछ खुशियां आ पाये।

राजा किसान के सामने गया और बोला – “मैं एक मुसाफिर हूँ, मुझे तुम्हारे खेत पर ये चार सोने के सिक्के गिरी मिलीं। चूँकि यह खेत तुम्हारा है इसलिए ये सिक्के भी तुम्हारे ही है। तुम इन सिक्को को रख लो।”

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किसान ने उत्तर दिया – “ना सेठ जी, ये सिक्के मेरे नहीं हैं। चूंकि यह सिक्के आप को मिले हैं इसलिए इसे आप ही रखें या किसी और को दान कर दें। मुझे इन सोने के सिक्कों की कोई जरूरत नहीं है।”

किसान की यह बात सुनकर राजा को बड़ी अजीब लगी। वह बोला, “धन की जरूरत किस इंसान को नहीं होती है। भला आप लक्ष्मी को ना कैसे कर सकते हैं ?”

किसान बोला – “सेठ जी, मैं इन खेतो मे काम करके रोज चार आने कमा लेता हूँ, और उतने में ही खुश रहता हूँ।

किसान की यह बात सुनकर राजा ने अचरज से पूछा – “क्या आप सिर्फ चार आने की कमाई करते हैं, और उतने में ही खुश रहते हैं, यह कैसे संभव हो सकता है !”

किसान बोला – “सेठ जी, प्रसन्नता इस बात पर निर्भर नहीं करती की आप की कमाई कितनी है या आपके पास कितना धन है। बल्कि प्रसन्नता तो उस धन के प्रयोग पर निर्भर करती है।”

एक गरीब किसान के मुँह से इस तरह की बातें सुनकर राजा ने उपहास के लहजे मे पूछा – “तो तुम इन चार आने का उपयोग किस किस काम मे कर लेते हो?”

किसान भी राजा के बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहता था। वह अपने खेत मे काम करने आया था, कोई बहस करने नही। इसलिए उसने आगे बढ़ते हुए उत्तर दिया – “इन चार आनो में से मै एक आने को एक कुएं में डाल देता हूँ, दुसरे आने से कर्ज चुका देता हूँ, तीसरा आना उधार में दे देता हूँ और चौथा जमीन में गाड़ देता हूँ। ”

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इतना कह कर किसान अपना काम करने लगा।

किसान की बात सुनकर राजा सोचने लगा, उसे यह उत्तर समझ नहीं आ रहा था। वह किसान से इसका मतलब पूछना चाहता था, पर किसान अपने काम मे लग चुका था और अब दोबारा उलझना नही चाहता था।

राजा वापस अपने महल मे पहुँचे और अगले दिन ही सभा बुलाई। दरबार मे सारे मंत्री उपस्थित थे। राजा ने पूरे दरबार में कल की घटना कह सुनाई और दरबार मे मौजूद सभी लोगों से किसान के उस कथन का अर्थ समझाने को कहा।

दरबारियों ने किसान के कहे गए कथन का अर्थ समझाने की पूरी कोशिश की और अपने-अपने तर्क पेश किये। लेकिन कोई भी उत्तर राजा को संतुष्ट नहीं कर पाया। अंत में सभी ने मिलकर यह निर्णय लिया की किसान को ही दरबार मे बुलाई जाए।

काफी खोज-बीन के बाद किसान मिला और उसे राजा के दरबार में अगले दिन प्रस्तुत होने का निर्देश दिया गया।

अगले दिन किसान राजा के दरबार मे हाजिर हुआ। राजा ने किसान को उस दिन अपने भेष बदल कर भ्रमण करने के बारे में बताई और सम्मान पूर्वक दरबार में बैठाया।

राजा ने किसान से कहा – “मैं तुम्हारे उत्तर से प्रभावित हूँ, और तुम्हारे चार आने का हिसाब जानना चाहता हूँ। बताओ, तुम अपने 4 आने की कमाई को किस तरह खर्च करते हो जो तुम इतना खुश और संतुष्ट रह पाते हो?”

किसान बोला, “हुजूर, जैसा की मैंने आपको बताया था, की मैं एक आना कुएं में डाल देता हूँ, अर्थात अपने परिवार के भरण-पोषण में लगा देता हूँ। दुसरे आने से मैं कर्ज चुकता हूँ, यानि इसे मैं अपने बूढ़े माँ-बाप की सेवा में लगा देता हूँ। तीसरा आना मैं उधार दे देता हूँ, यानि अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा में लगा देता हूँ और चौथा मैं जमीन में गाड़ देता हूँ, मतलब मैं एक पैसे की बचत कर लेता हूँ, ताकि समय आने पर मुझे किसी से कुछ माँगना ना पड़े और मैं इसे धार्मिक ,सामजिक या दूसरी जरूरी कार्यों में लगा सकूँ।”

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राजा को अब उस गरीब और फटे पुराने कपड़े पहनने वाले किसान की बात समझ आ चुकी थी। राजा की की परेशानी का समाधान हो चुका था। अब वह जान चुका था की यदि उसे जीवन मे प्रसन्न और संतुष्ट रहना है तो उसे भी अपने कमाए हुए धन का सही-सही उपयोग करना होगा।

हिंदी प्रेणादायक कहानी का सार :

दोस्तों राजा की तरह हमे भी उस किसान से सबक लेने की जरूरत है, की कैसे एक किसान सिर्फ चार आने कमा कर इतना खुश है। आज हम सब बहुत पैसे कमाते हैं लेकिन फिर भी उस राजा की तरह असंतुष्ट रहते हैं। क्योंकि हमे ये पता नही होता है की इन अर्जित किये गए धन को उपयोग कैसे करना है। अगर हम सब अपने पैसों का उपयोग सही तरीके से करने लगे तो निश्चित ही हमारे जीवन से सारी परेशानियाँ गायब हो जायेगी।

दोस्तों Comment में बताइए कि ये चार आने का हिसाब – हिंदी प्रेरणादायक कहानी आप को कैसी लगी।। अगर यह कहानी आपको पसंद आया तो कृप्या इसे share करना ना भूले और हमारे blog “FixxGroup.in” पर जरूर visit करे। जहाँ मैं हिन्दी मे motivational content जैसे motivational speech, motivational stories, self-improvement tips इत्यादी share करता हूँ, जो आपके जीवन मे positive impact डालती है। अगर आप हमेशा negativity से दूर रहना चाहते है तो हमारा blog आपका स्वागत करती है।

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