ग्लोबल वार्मिंग क्या है ? , कारण व प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग क्या है ? , कारण व प्रभाव :: पृथ्वी के वातावरण में कृतिम गैस के रिसाव के कारण प्रतिवर्ष तापमान में हो रहे वृद्धि को हम ग्लोबल वार्मिंग के नाम से जानते हैं। आज hindivaani इसी विषय पर चर्चा करेगा। जिसके अंतर्गत आपको ग्लोबल वार्मिंग क्या है, ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव , ग्लोबल वार्मिंग कर कारण आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की जॉयेगी। तो आइए शुरू करते है।

ग्लोबल वार्मिंग क्या है ?

ग्लोबल वार्मिंग क्या है ? , कारण व प्रभाव
ग्लोबल वार्मिंग क्या है ? , कारण व प्रभाव

पृथ्वी में आधुनिक प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रयोग से जीवाश्म ईंधनों के उपयोग में अधिकता आई है।जिसे विभिन्न प्रकार की जैसे – कार्बन डाइऑक्साइड ,मिथेन नाइट्रस ऑक्साइड की मात्रा का वायुमंडल में अधिक प्रभाव होता है। यह जैसे पृथ्वी से बाहर जाने वाले भी ऊष्मा विकिरण जो दीर्घ तरंगीय किरणों के रूप में होता है।को अवशोषित कर लेती हैं।अतः इन गैसों को ऊष्मा रोधी कैसे कहा जाता है।फलस्वरूप इनमें पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो जाती है। जिसे हम ग्लोबल वार्मिंग या वैश्विक उष्णता के नाम से जानते हैं।

उपयोगी लिंक – ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है ?

ग्लोबल वार्मिंग के कारण –

ग्लोबल वार्मिंग के कारण निम्नलिखित हैं।

1.कृत्रिम गैसों में वृद्धि – विश्वव्यापी ताप वृद्धि का प्रमुख कारण कार्बन डाइऑक्साइड गैस है।जिसे ग्रीनहाउस गैस कहा जाता है।मीथेन एवं नाइट्रस ऑक्साइड भी इसी प्रकार की कैसे हैं।यह सभी कैसे पर्यावरण की उष्मा सोख लेती हैं।जिनकी वजह से ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न होता है। और इस कारण से पृथ्वी और वायुमंडल के तापमान में वृद्धि होती है।

2.वाहनों के संचालन से प्राप्त अवशिष्ट पदार्थ – वाहनों के संचालन से निकलने वाली गैस एवं अपशिष्ट पदार्थ तथा अन्य स्थानों पर चलने वाला ईंधन कार्बन डाइऑक्साइड एवं नाइट्रस ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करते हैं।जबकि कार्बन अपशिष्ट का उत्क्रमण मीथेन का मुख्य स्रोत है। इन स्रोतों से ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि होती है।

3.क्लोरो फ्लोरो कार्बन की वृद्धि – ग्लोबल वार्मिंग के लिए क्लोरोफ्लोरोकार्बन भी सहायक है।इसका निर्माण अमेरिका में सन 1931 में प्रारंभ हुआ था। क्लोरोफ्लोरोकार्बन का प्रयोग रेफ्रिजरेटर इलेक्ट्रॉनिक प्लास्टिक आदि में होता है।

4.औधोगिक क्रांति का प्रभाव – औद्योगिकीकरण में तीव्रता लाने के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा संसाधनों कोयला ,खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस का उपयोग किया गया।जिससे कार्बन डाई ऑक्साइड ,क्लोरोफ्लोरोकार्बन, मीथेन और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे ग्रीन हाउस गैसों के जमाव पर्यावरण में होते रहे। निवर्णिकर्ण के लिए वृक्षों को जलाने से भी इन गैसों में वृद्धि हुई।जिससे वातावरण के तापमान में वृद्धि होती गई।

ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव –

ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव निम्नलिखित हैं।

1.जैव विविधता की हानि – तापमान की वृद्धि के कारण बहुत से जीव जंतु भारत से विलुप्त हो गए हैं। तापमान बढ़ने से यदि समुद्री स्थल के स्तर में वृद्धि हुई। तो कच्छ के रन में निवास करने वाले दो हजार जंगली गधे विलुप्त हो सकते हैं। हिमालय की वनस्पतियां अधिक ऊंचाई पर स्थानांतरित हो जाएंगी।और जो वर्तमान में अधिकतम ऊंचाई पर है वह भी लुप्त हो जायेंगे । डेल्टा वन जल में डूब जाएंगे तथा प्रवाल नष्ट हो जाएंगे।

2.स्वास्थ का दुष्प्रभाव – उष्ण जलवायु में बीमारियां महामारी या मरने की अधिक संभावना होती है।इंटरनेशनल पैनल ऑन क्लाइमेट की रिपोर्ट के अनुसार गर्म लहर के कारण अधिक व्यक्तियों के मरने की आशंका है।तथा शुष्क व अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों में वायु वाहक श्वसन रोगों के बढ़ने की आशंका है।गर्म जलवायु के कारण मच्छरों का प्रजनन बढ़ाने से मलेरिया डेंगू फैलने की संभावना अधिक रहती है।

3.जल का अभाव व आधिक्य – तापमान की वैश्विक वृद्धि मानसून को प्रभावित करेगी। शीत ऋतु में वर्षा की मात्रा 5 से 25% कम हो जाएगी तथा ग्रीष्म ऋतु में सूखे की स्थिति हो जाएगी।हिमानियों के पिघलने से नदियों में जल की मात्रा बढ़ जाएगी बांधों से अधिक प्रवाह एवं अपरदन से अवसादी करण की समस्या उत्पन्न हो जाएगी।

4.कृषि उत्पादकता में कमी – एक अध्ययन के अनुसार चावल व गेहूं का उत्पादन कम हो जाएगा।तटीय गुजरात महाराष्ट्र ,कर्नाटक की कृषि प्रभावित होगी। पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अन्य उत्पादन कम हो जाएगा।कृषि को प्रभावित करने वाले विषयों की संख्या बढ़ जाएगी।

आशा हैं कि हमारे द्वारा दी गयी ग्लोबल वार्मिंग क्या है ? , कारण व प्रभाव की जानकारी आपको पसन्द आयी होगी। यदि ग्लोबल वार्मिंग क्या है ? , कारण व प्रभाव आदि की जानकारी आपको पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करे।

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