जल ही जीवन हैं पर निबन्ध, essay on water is life in hindi

जल ही जीवन हैं पर निबन्ध, essay on water is life in hindi :: जल हम सभी के लिए एक महत्वपूर्ण तत्वों में से एक हैं। इसीलिए जल ही जीवन हैं। कहा जाता हैं। आज hindivaani आपको जल ही जीवन पर निबन्ध ,essay on water is life in hindi की जानकारी प्रदान करेगा। जिसके अंतर्गत आपको जल ही जीवन पर निबन्ध प्रस्तवना सहित, जल का महत्व, जल संकट के कारण ,जल संकट को दूर करने के उपाय आदि की जानकारी प्रदान की जाएगी।

जल ही जीवन हैं पर निबन्ध, essay on water is life in hindi

जल ही जीवन हैं पर निबन्ध, essay on water is life in hindi
जल ही जीवन हैं पर निबन्ध, essay on water is life in hindi
  1. रूपरेखा – प्रस्तावना
  2. हमारे जीवन मे जल का महत्व।
  3. जल संकट के कारण
  4. जल संरक्षण हेतु सरकार द्वारा किये गए कार्य
  5. जल संकट को दूर करने के उपाय
  6. उपसंहार।

प्रस्तावना

जल एक प्रकार से देखा जाए तो हर व्यक्ति की एक मूल आवश्यकता है। वैसे तो पृथ्वी का 70 % भाग जल से भरा हुआ हैं। परन्तु मृदु जल में सिर्फ पृथ्वी पर 0.6% जल की ही उपलब्धता हैं। और इस प्रतिशत में भी बहुत सा भाग वर्तमान समय मे काफी ज्यादा प्रदूषित हो गया हैं। हमारे जीवन मे जल उतना ही महत्वपूर्ण हैं। जितना कि हमारे लिए ऑक्सीजन हैं। इसीलिए यह भी कहा गया हैं कि जल ही जीवन हैं। साथ ही साथ पानी की महत्वा को बताते हुए रहीम जी ने भी अपबे दोहे में कहा हैं। कि –
रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून।।

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हमारे जीवन मे जल का महत्व

वायु के बाद हमारे जीवन मे जल का सबसे महत्वपूर्ण स्थान हैं।हम यह देखते हैं। कि विश्व की जो प्रमुखः सभ्यताये का विकास नदी के किनारे ही हुवा था। जल के बिना हम अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। वर्तमान समय की रिपोर्ट देखी जाए तो विश्व 30% जल संकट का सामना कर रहे हैं। मनुष्य के शरीर में 65 % जल की मात्रा पाई जाती है। मनुष्य के शरीर के रक्त संचालन के लिए ,शरीर के विभिन्न अंगों को स्वस्थ रखने हेतु ,शरीर के विभिन्न ऊतकों को मुलायम तथा लोचदार रखने के अतिरिक्त ,शरीर की कई अन्य प्रक्रियाओं के लिए भी जल की समुचित मात्रा की आवश्यकता होती है।यह हमारे जीवन के लिए इतना महत्वपूर्ण है।इसके अभाव होने पर मनुष्य की मृत्यु निश्चित है।

विज्ञान के अनुसार एक स्वस्थ मनुष्य को प्रतिदिन चार लीटर जल पीना आवश्यक हैं। जीवन मे जल का इतना अधिक महत्व हैं। कि इस उपयोग हमारे दैनिक जीवन के अत्यधिक कार्यो में होता हैं। जैसे – भोजन पकाने में, कपड़े साफ करने में, मुह और हाथ धोने में आदि।

जल संकट के कारण

पृथ्वी में जल संकट के कई कारण है।इनमें से प्रमुख कारण की बात की जाए तो मनुष्य द्वारा जल की की जाने वाली बर्बादी है। पिछले कई वर्षों से भूमिगत जल का स्तर गिरना और सिंचाई एवं अन्य कार्य में भूमिगत जल का अधिक प्रयोग के कारण जल बहुत ही कम हो गया हैं। साथ ही साथ विभिन्न प्रकार के उद्योगों के कारण नदियों का जल प्रदूषित होता है। क्योंकि उनके द्वारा उत्सर्जित प्रदूषण को नदियों में प्रवाहित किया जाता है।इन्हीं कारणों से मानव जगत में पीने लायक जल की उपलब्धता कम होगा।

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जल संरक्षण हेतु सरकार द्वारा किये गए कार्य –

संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट आई।जिसमे कहा गया कि भारत सर्वाधिक प्रदूषित पेयजल आपूर्ति वाला देश है।जल से संबंधित इस प्रकार की समस्या को देखते हुए साथ ही साथ प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन हेतु ,सन 1973 ई में उस समय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जल संस्थान परिषद का गठन किया गया। उसके पश्चात 1987 में भारत सरकार के द्वारा जल संसाधन मंत्रालय द्वारा प्रथम राष्ट्रीय जल नीति लागू की गई।जिसका वर्ष 2002 और 2012 में सशोधन किया गया।

जल संकट को दूर करने के उपाय

जल संकट को दूर करने को सबसे अच्छा उपाय है – वृक्षारोपण। पेड़ पौधे वर्षा लाने एवं पर्यावरण में जल के संरक्षण में काफी अधिक सहायक है। इसके अलावा जल संकट को रोकने हेतु नदियों को किनारे स्थापित किए गए उद्योगों के से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ नदियों में ना प्रवाहित किया जाए।और शहरों की नालियों के गंदे पानी को नदियों में बहने से पहले उसे शुद्ध करने नदियों में फेंका जाए। इसके अलावा प्रत्येक नागरिक का या दायित्व बनता है।कि जल संकट को दूर करने के लिए जल के अनावश्यक खर्च को कम करे।घरों में नलों को व्यर्थ में नहीं चलने देना चाहिए। जिससे जल की खपत कम हो सके।

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उपसंहार

मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का संतुलन बिगाड़ा है। और अपने लिए भी खतरे की स्थिति पैदा कर ली है।हम सभी का यह दायित्व बनता है।कि वह प्रकृति का श्रेष्ठ प्राणी होने के नाते जल संकट कि समस्या के समाधान हेतु जल संरक्षण पर अधिक जोर दें।जल मनुष्य ही नहीं पृथ्वी के संपूर्ण प्राणी के लिए अति आवश्यक है। इसीलिए जल को जीवन की संज्ञा प्रदान की गई है।यदि जल की समुचित मात्र पृथ्वी पर नहीं होगी। तो तापमान में वृद्धि के कारण प्राणियों का जीना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

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