Essay on sparrow in hindi , गौरेया चिड़िया पर निबन्ध

Essay on sparrow in hindi , गौरेया चिड़िया पर निबन्ध :: छोटे कक्षाओं में गौरेया पर निबन्ध लिखने को हमेशा मिलता हैं। यह बहुत ही खूबसूरत चिड़िया होती हैं। आजकल यह देखने को बहुत ही कम मात्रा में मिलती हैं। इसी को महत्वा को समझाने हेतु हमे अक्सर इससे सम्बन्धित निबन्ध और पैराग्राफ लिखने को मिलता हैं। इसीलिए आज हिंदीवानी आपके लिए लेकर आया हैं – Paragraph on sparrow in hindi . तो आइए शुरू करते है।

Essay on sparrow in hindi , गौरेया चिड़िया पर निबन्ध

Essay on sparrow in hindi , गौरेया चिड़िया पर निबन्ध
Essay on sparrow in hindi , गौरेया चिड़िया पर निबन्ध

हम बचपन मे देखते थे हमारे आंगन में एक छोटी सी चिड़िया फुदक फुदक का चलती थी। उस चिड़िया का नाम गौरैया हैं। यह अब विलुप्त होने वाली प्रजाति की श्रेणी में आती हैं। इसकी संख्या बहुत ही ज्यादा कम हो गयी हैं। यह चिड़िया देखने मे बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और छोटी होती हैं। गौरेया की सामन्यतः लम्बाई 14 से 16 सेंटीमीटर होती हैं। गौरेया का रंग हल्के भूरे रंग का और उसमें सफेद रंग के धब्बे होते है।गौरेया की चोंच और आंख का रंग काला होता हैं। यह हमारे पर्यावरण हेतु बहुत ही सहायक जीव था। चीन में इसको मारने का अभियान चलाया गया था। क्योंकि उन्हें यह लगा कि यह फसल को बहुत ही खराब कर देती हैं। परन्तु परिणाम इसके बिल्कुल ही विपरीत हुए। क्योंकि इस मुख्य रूप से भोजन खेत मे उपस्थित किट पतंगे होते थे। गौरेया की कमी की वजह से ये किट पतंगे फसल को और अधिक मात्रा में बर्बाद करने लगे। और एक वक्त ऐसा आ गया कि चीज में अकाल की स्तिथि आ गयी थी।

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गौरेया का मुख्य रूप से भोजन अनाज , फूल , बीज और कीट पतंगे होते है। यह सर्वाहारी होती हैं। गौरेया के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु 20 मार्च को गौरेया दिवस के रूप में मानया जाता हैं। इसका मुख्य कारण यही है। कि बच्ची हुई गौरेया को हम अधिक से अधिक संरक्षित कर सके।गौरेया एक बार मे 2 से 4 अंडे को जन्म देती हैं। इनकी उम्र सामन्यतः 4 से 7 वर्ष तक होती हैं। गौरेया 24 मील प्रति घण्टे की रफ्तार से उड़ सकती हैं। यह एक प्रकार से आलसी प्रव्रत्ति की होती हैं। जिसकी वजह से यह अपने घोंसले से सिर्फ एक दो किलोमीटर का भृमण करती हैं। गौरेया के प्रति लोगो मे जागरूकता फैलाने हेतु 2012 में दिल्ली सरकार और 2013 में बिहार सरकार ने गौरेया को राजकीय पक्षी के रूप में घोषणा की। गौरेया की मुख्य रूप से 43 प्रजातियां पाई जाती हैं। हम देखते हैं कि गौरेया सीधे न चलकर फुदक फुदक कर चलती हैं।

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