Essay on my favourite festival in hindi , मेरे प्रिय पर्व दीपावली पर निबन्ध

Essay on my favourite festival in hindi , मेरे प्रिय पर्व दीपावली पर निबन्ध :: हम सभी का कोई न कोई ऐसा त्योहार जरूर होता हैं जो हमारा प्रिय हित हैं। नर प्रिय त्योहार दीपावली हैं। क्योंकि यह प्रकाश पर्व मुझे बहुत अच्छा लगता हैं। आज hindivaani आपको मेरे प्रिय पर्व दीपावली पर निबन्ध उपलब्ध करा रहा हैं।यह Short essay on my favourite festival in hindi  के लिए भी उपयोग हो सकता हैं। तो आइए शुरू करते है और पढ़ते है मेरे प्रिय त्योहार पर निबन्ध हिंदी में ।

Essay on my favourite festival in hindi , मेरे प्रिय पर्व दीपावली पर निबन्ध

Essay on my favourite festival in hindi , मेरे प्रिय पर्व दीपावली पर निबन्ध
Essay on my favourite festival in hindi , मेरे प्रिय पर्व दीपावली पर निबन्ध

दीपावली दीपों का त्योहार है ।दीपावली का शाब्दिक अर्थ है –  दीपों की पंक्ति।दीपावली त्यौहार में लोग दीपक घरों की पंक्तिबध्य तरीके से अपने घर के अंदर और बाहर साथ ही साथ मंदिरों में सजाते हैं। दीपावली को हम प्रकाश के त्यौहार के नाम से जानते हैं। दीपावली पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है।दीपावली के दिन लोग गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं।इस दिन लोग गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा इसलिए करते हैं। क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार धन समृद्धि , विघ्नहरण एवम ऐश्वर्य का भगवान गणेश और लक्ष्मी जी को माना जाता है।

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दीपावली के 1 दिन पहले का दिन धनतेरस अति शुभ माना जाता है इस दिन लोग सोने चांदी एवं बर्तन आदि खरीदते हैं। धनतेरस मनाने के पीछे का भी एक पौराणिक कारण यह है कि समुद्र मंथन के पश्चात लक्ष्मी जी की उत्पत्ति इसी दिन हुई थी।इसलिए इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।समुद्र मंथन से ही  धनवंतरी जी जिन्हें औषधि विज्ञान का प्रेणता कहा जाता है।उनकी उत्पत्ति कार्तिक मास की त्रयोदशी को हुई थी।इसलिए इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।

दीपावली मनाने के पीछे कथा प्रचलित है।कि इस दिन भगवान श्री रामचंद्र जी रावण का वध कर एवं 14 वर्ष का वनवास पूरा करके आधा वापस लौटे थे तो संपूर्ण अयोध्या वासियों ने इस खुशी में घी के दिए जलाते और तभी से दिवाली मनाई जाती है।

पश्चिम बंगाल में दीपावली को काली पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। वहां बड़े-बड़े एवं भव्य पंडालों के भीतर मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है।काली माता की पूजा के पश्चात लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।दीपावली का अपना धार्मिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व है।किंतु आज इस त्यौहार में कई प्रकार की बुराइयां भी समाहित हो गई है। इस त्यौहार के नाम पर लोग अपनी हैसियत का प्रदर्शन करते हैं। तथा हजारों रुपए यूं ही पटाखों में उड़ा देते हैं। अत्यधिक पटाखे जलाना स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।

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जिस वातावरण में हम हवा लेते हैं उसी को हम पटाखे से अशुद्ध कर देते हैं।यह हमारी कितनी अज्ञानता है जो अकेला इस त्यौहार की सबसे बड़ी बुराई मानी जाती है।यदि जुआ नहीं खेला जाए। तथा पटाखे ना जलाएं जाए।तो यह त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय के अपने संदेश को सार्थक करता नजर आएगा। आज इन बुराइयों को दूर कर इस त्यौहार के उद्देश्य को सार्थक करने की आवश्यकता।

Final word

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