Essay on himalaya in hindi,हिमालय पर निबन्ध हिंदी में

Essay on himalaya in hindi,हिमालय पर निबन्ध हिंदी में :: हिमालय भारत के लिए एक गौरव हैं। हिमालय हमे विशेष प्रकार की जड़ी बूटियां और औषधि प्रदान करता हैं। साथ ही साथ यह हमें ठंडी हवाओं से बचाता हैं। यह हमारे जीवन मे बहुत ही अधिक महत्व रखता हैं। आज hindivaani आपको पर्वतराज हिमालय के बारे में जानकारी प्रदान करेगा। इस आर्टिकल में हम आपको essay on himalaya in hindi की जानकारी प्रदान करेंगे। तो आइए शुरू करते है और पढ़ते है – हिमालय पर निबन्ध हिन्दी मे।

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हिमालय संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है। हिम और आलय का अर्थ होता है। हिम का अर्थ है – बर्फ और आलय का अर्थ होता है – घर।इस प्रकार से देखा जाए तो हिमालय का अर्थ हुआ बर्फ का घर।हिमालय एक प्रकार की पर्वत श्रंखला है।पर्वत श्रंखला उसे कहते हैं जो कई परिवर्तनों के सम्मिलित रूप से बनता है। हिमालय विश्व की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला है। अगर पर्वत के प्रकार की बात की जाए तो हिमालय वलित पर्वत है।

हिमालय प्राचीन काल से भारत की संस्कृति का रक्षक और पोषक रहा है।सिंधु घाटी की सभ्यता में भी हिमालय का योगदान प्रमुख है। हिमालय भारत की जलवायु को पूर्णतया प्रभावित करता है। भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में भी हिमालय से निकली नदियां एवं इन नदियों से निर्मित घाटियों एवं हिमालय क्षेत्र के वनों का प्रमुख योगदान है।

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संरचना के आधार पर भारत को 4 प्राकृतिक विभागों में विभाजित किया गया है इन 4 भाग में से एक है – हिमालय उसके संबंधित पर्वत श्रेणियां। हिमालय की श्रेणी 24 किलोमीटर की लंबाई वाले अर्धवृत्त के रूप में भारत के उत्तरी क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश से लेकर जम्मू कश्मीर तक फैली हैं।इसकी चौड़ाई कश्मीर में 400 किलोमीटर है। अरुणाचल प्रदेश में 150 किलोमीटर है।अपने पूरे देशांतरीय विस्तार के साथ हिमालय को तीन भागों में विभाजित किया गया है। इन संख्याओं के मध्य कई घाटियां हैं।

हिमालय की सबसे बाहरी श्रृंखला को शिवालिक कहा जाता हैं। इसकी चौड़ाई 10 से 50 किलो मीटर तथा ऊंचाई 900 से 1100 मीटर के बीच है। हिमालय की पर्वत श्रंखला में 100 से अधिक पर्वत हैं। यह सभी पर्वत 6 देश नेपाल, भारत ,भूटान ,तिब्बत, अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान की सीमाओं को छूते हैं। सिंधु गंगा एवं ब्रह्मपुत्र हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदियां हैं।हिमालय की पर्वत श्रृंखला में 15,000 से अधिक ग्लेशियर है। जो 12000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए हैं।पूरी हिमालय पर्वत श्रृंखला लगभग पांच लाख वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है।

हिमालय पर्वत श्रृंखला के प्राकृतिक भागों को चार भागों में विभाजित किया गया।जो कि निम्न हैं। – पंजाब हिमालय कुमायूं हिमालय ,नेपाल हिमालय एवम असोम हिमालय। सिंधु एवम सतलज नदी के बीच लगभग 6 किलोमीटर की दूरी में फैला क्षेत्र पंजाब हिमालय ,सतलज एवं काली नदियों के बीच लगभग 300 किलोमीटर की दूरी में फैला क्षेत्र कुमायू हिमालय, काली एवं तीस्ता नदियों के बीच लगभग 800 किलोमीटर की दूरी में फैला क्षेत्र नेपाल हिमालय तथा तीस्ता एवं दिहांग नदियों के बीच लगभग 700 किलोमीटर की दूरी में फैला क्षेत्र असोम हिमालय कहलाता है।

हिमालय में कई प्रकार के औषधीय वनस्पतियों तथा जीव जंतु पाए जाते हैं।हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में वनों से हमें ईंधन, चारा, कीमती लकड़ी एवं विभिन्न प्रकार के औषधीया प्राप्त होती हैं।

Final word –

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