भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में, essay on corruption in hindi

भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में, essay on corruption in hindi :: भ्रष्टाचार पूरे विश्व की बहुत बड़ी समस्यायों में से एक है। यह किसी भी देश को दीमक की तरह अंदर की अंदर खाती रहती हैं। समय समय पर इसके प्रति जागरूक बनाते हुए हमें भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में, essay on corruption in hindi लिखने को मिलता हैं। आज इसीलिए hindivaani आपके लिए भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में लेकर आया है। जिसमे आपको भ्रष्टाचार पर स्लोगन , भ्रष्टाचार के कारण ,भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय आदि की जानकारी प्रदान की जॉयेगी। तो आइए शुरू करते है।

भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में, essay on corruption in hindi

भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में, essay on corruption in hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में, essay on corruption in hindi

प्रस्तावना

भ्रष्टाचार दो शब्दों से मिलकर बना हैं -भ्रष्ट और आचार। भ्रष्ट शब्द का अर्थ होता है- मार्ग से विचलित होना या बुरे आचरण वाला।तथा आचरण का अर्थ होता हैं – चरित्र व्यवहार या चाल चलन। किस प्रकार से भ्रष्टाचार का अर्थ है अनुचित व्यवहार या चाल चलन । भ्रष्टाचार कई रूप में पाया जाता है जैसे – रिश्वत लेना देना ,खाद्य पदार्थों में मिलावट ,अनैतिक ढंग से धन इकट्ठा करना, कानूनों की अवहेलना ,मुनाफाखोरी आदि।भ्रष्टाचार में व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्तिगत लाभ के लिए निर्धारित कर्तव्य की जानबूझकर अवहेलना करता है। भ्रष्टाचार प्राचीन काल से ही व्याप्त है हर्षवर्धन कॉल एवं राजपूत काल में सामंती प्रथा ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।साथ ही साथ सल्तनत काल में भी फिरोज तुगलक के शासन काल में सेना में भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी के प्रमाण मिलते हैं।

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भ्रष्टाचार के आंकड़े –

2010 में 178 देशों की भ्रष्टाचार की सूची जारी की गई थी। जिनमें से सबसे भ्रष्ट देशों की सूची में ऊपरी स्थान पर डेनमार्क था।और सबसे निचले पायदान पर सोमालिया देश था। वहीं पर 2010 में 178 देशों की सूची में भारत 87 स्थान पर था। वर्ष 2012 तथा 2013 में भारत की सूची में नीचे खिसककर 94 वें स्थान पर आ गया। वहीं पर कुछ रिपोर्ट है ऐसा मानती हैं कि पड़ोसी देश जैसे चीन श्रीलंका अफगानिस्तान ईरान नेपाल पाकिस्तान एवं बांग्लादेश की तुलना में भारत में भ्रष्टाचार की स्थिति कम है। परंतु एक प्रकार से अभी देखा जाए तो विश्व स्तर पर भ्रष्टाचार के मामले में भारत की छवि बहुत अच्छी भी नहीं है।

भ्रष्टाचार के कारण –

भ्रष्टाचार के निम्नलिखित कारण है।

  1. धन की अधिक चाह के कारण आर्थिक क्षेत्र में कालाबाजारी रिश्वतखोरी मुनाफाखोरी आदि के कारण भ्रष्टाचार अधिक बढ़ता है।
  2. लोगों की मानसिकता है कि नौकरी पैसा वाला व्यक्ति अपने सेवाकाल मित्र धारा जित करना चाहता है।कि वह रिटायरमेंट के पश्चात बहुत ही आसानी से अपना जीवन व्यतीत कर सकें इस वजह से वह भ्रष्ट हो जाता है।
  3. व्यापार के क्षेत्र में यह देखा जाता है।कि व्यापारी हमेशा या मानता है।कि कब उसे घाटा उठाना पड़ जाए। इसलिए वह उचित और अनुचित ढंग से अधिक से अधिक धन कमाना चाहता है।
  4. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जो बड़े अधिकारी होते हैं वह भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं जिसके कारण छोटे अधिकारि भी अपनी भलाई के लिए इनका विरोध नहीं करना चाहते हैं।और वह अनुचित रूप से उन कार्यों में लिप्त हो जाते हैं।
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भ्रष्टाचार के स्लोगन –

भ्रष्टाचार के स्लोगन निम्नलिखित हैं।

रघुवीर सहाय व्यंग करते है कि –

“निर्धन जनता का शोषण है
कह कर आप हसे।
लोकतंत्र का अंतिम क्षण है।
कहकर आप हंसे।
सब के सब है भ्रष्टाचारी।
कहकर आप हंसे
चारों और बड़े लाचारी
कहकर आप हंसे।”

जानकी वल्लभ शास्त्री जी कहते है कि –

“ताड खड़खड़ाते हैं केवल चील गिद्ध ही गाते हैं
ऊपर ऊपर पी जाते हैं जो पीने वाले हैं।
कहते हैं ऐसे जीते हैं जो जीने वाले हैं”

भ्रष्टाचार को दूर करने के उपाय-

भ्रष्टाचार को दूर करने के उपाय निम्नलिखित है।

1.भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए सबसे पहले आपको गरीबी बेरोजगारी पिछड़ापन आदि को दूर करना चाहिए।

2.भ्रष्ट अधिकारियों को सजा दिलाने के लिए दंड प्रक्रिया को और अधिक कठोर करने की आवश्यकता है।

3.व्यक्तियों के अंदर जीवन मूल्यों की पहचान करा कर लोगों को नैतिक गुणों चरित्र एवं व्यवहारिक आदर्शों की शिक्षा प्रदान करनी चाहिए।

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4.उच्च पदों पर बैठे हुए व्यक्तियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि दागदार एवं राष्ट्र लोगों को उच्च पदों पर बैठने से रोका जा सके।

5.योजनाबद्ध तरीके से यदि कार्य किया जाए तो भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है।इसके लिए सामाजिक आर्थिक कानूनी एवं प्रशासनिक उपाय अपनाए जाने चाहिए।

उपसंहार

देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए अन्ना हजारे द्वारा किए गए प्रयासों का काफी अच्छा परिणाम सामने है। उन्होंने राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाकर भारतीय युवाओं में देश की छवि को स्वस्थ बनाने का नया जोर भर दिया।लोकपाल विधेयक उन्हीं के प्रयासों का प्रतिफल है।यदि देश का युवा वर्ग अपना कर्तव्य समझकर भ्रष्टाचार का विरोध करने लगे तो वह दिन दूर नहीं जब भ्रष्टाचार को भारत से दूर भगाया जा सकता है।

आशा हैं कि हमारे द्वारा दी गयी भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में, essay on corruption in hindi की जानकारी आपको पसन्द आयी होगी। यदि भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में, essay on corruption in hindi की जानकारी आपको पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करे। और हमे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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