अनुशासन पर निबन्ध हिंदी में , Discipline essay in hindi

अनुशासन पर निबन्ध हिंदी में, Discipline essay in hindi :: अनुशासन हम सभी के जीवन मे बहुत ही उपयोगी हैं। यह हमारे जीवन की दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। इसके बिना जीवन जा सुव्यवस्थित ढंग से चलना मुश्किल है। इसीलिए आज हिंदीवाणी आपके लिए अनुशासन और निबन्ध हिंदी में लेकर आया हैं।जो आपको परीक्षा साथ ही साथ व्यवहारिक ज्ञान हेतु भी काफी उपयोगी सिद्ध होगा। महात्मा गांधी जी ने एक बहुत ही अच्छी लाइन बोली हैं। कि अनुशासन के बिना न तो परिवार चल सकता हैं और न राष्ट्र और न ही संस्था।

अनुशासन पर निबन्ध हिंदी में , Discipline essay in hindi

अनुशासन पर निबन्ध हिंदी में , Discipline essay in hindi
अनुशासन पर निबन्ध हिंदी में , Discipline essay in hindi

प्रस्तावना

अनुशासन शब्द की उत्तपत्ति शासन शब्द में अनु उपसर्ग लग जाने पर हुई हैं। इस प्रकार से कहे तो अनुशासन शब्द का शाब्दिक अर्थ है – शासन के पीछे चलना। सरल शब्दों में कहा जाए यही हम अपने परिवार और शिक्षकगणों की बात मानते है। तो उसे अनुशासन कहते है। व्यापक रूप से यदि इसके अर्थ को जाना जाए तो आवश्यकतानुसार यदि हम स्वयं को नियंत्रित में रखते है। तो उसे अनुशासन कहा जायेगा। अनुशासन की व्यापक अर्थ में ,शासकीय कानून के पालन से लेकर सामाजिक मान्यताओं का सम्मान करना ही नहीं बल्कि स्वस्थ रहने के लिए शारीरिक नियमों का पालन करना भी शामिल है।इस प्रकार से कहा जाए तो यदि व्यक्ति कानून नियम और सामाजिक मान्यताओं के आधार पर अपने आप को व्यवस्थित करता हैं। तो उसे अनुशासन की संज्ञा दी जाती हैं।

अनुशासन की आवश्यकता –

सामान्यतः हम देखते हैं। कि यदि बालक का जन्म होता हैं। तो वह कुछ समय बाद हमारे ही व्यवहार का अनुकरण करता हैं। और उसके पश्चात जैसे ही वह विद्यालय में प्रवेश लेता हैं। तो कई प्रकार के छात्रों से प्रभवित होता हैं। जिसे हम संगत नाम देते है। यदि यहां पर उसे एक अच्छी संगति मिल गयी तो वह अच्छा बन जाता हैं। उसी प्रकार से यदि शिक्षक का आचरण गलत हैं। तो बालक भी वैसा ही अनुसरण करेगा। इसीलिए यह जरूरी हैं। कि यदि बालक को अनुशासित रखना है। तो उसके लिए हम सभी को अनुशासित रहना जरूरी हैं। अगर हम अनुशासित हैं। तो हमारे बच्चे भी पूरी तरह से अनुशासित रहेगा। यह सुनिश्चित करे। कि बच्चे को शुरूवात में ही अनुशासन की शिक्षा प्रदान की जाए। आगे आने वाले समय मे यदि हम किसी भी क्षेत्र में यदि पारंगत होना है। तो यह जरूरी हैं। कि अनुशासित ढंग से हम उसकी दिनचर्या का पालन करे। जिससे हम किसी भी चीज में आसानी से सफलता मिल जाएगा। यह हमें ज्ञात ही हैं। कि यदि हम किसी कार्य को अनुशासित ढंग से करेगे तो वह कार्य निश्चित रूप से सफ़ल होगा।

अनुशासन का महत्व –

यदि हम अपने जीवन मे एक सफल व्यक्ति बनना चाहते है। तो यह जरूरी हैं कि हम अपने जीवन मे अनुशासित रहे। हम यह देखते हैं कि जो व्यक्ति अपने कार्यो को और दैनिक दिनचर्या को अनुशासित ढंग से करता हैं। वह निश्चित ही अन्य व्यक्तियों से बेहतर होते है। उदाहरण के रूप में यदि हम देखे तो हमारे देश की जो महापुरुष थे। जैसे – स्वामी विवेकानंद , भीमराव अम्बेडकर, दयानन्द सरस्वती , अब्दुक कलाम आदि सभज अपने जीवन मे बहुत ही अनुशासित रहते थे। तभी ही आज वह अपने कार्यो की वजह से हम सभी के चहेते हैं। और हम सभी उनके नियमो और सिद्धान्तों का पालन करते है। उनके सभी विचार हम सभी के लिए उपयोगी और प्रेरणाश्रोत हैं।

अनुशासित रहने के तरीके –

अनुशासित रहने के तरीके निम्नलिखित हैं।

1.अपने जीवन मे अनुशासन लाने हेतु यह जरूरी हैं। कि हम अपने जीवन से सम्बंधित प्रत्येक दिन की दिनचर्या को निश्चित कर ले।

2.हमारे विद्यालय , कॉलेज आफिस में बनाये गए नियम और कानूनों का सही तरीके से पालन करे।यदि हम ऐसा करेंगे तो हमारे जीवन के कार्य सरल प्रतीत होंगे।

3.किसी भी ऐसे कार्य को मत करिए जिससे किसी व्यक्ति को हानि पहुचे। यह भी अनुशासन के दायरे में आता हैं।

4.कार्यो को समय पर पूरा करने का संकल्प ले। साथ ही साथ एक लक्ष्य को निर्धारित कर कार्यो को करे। जिससे आपको व्यर्थ के कार्यो को नही करना पड़ेगा।

अनुशासित न रहने के दुष्परिणाम –

अनुशासित न रहने के दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं।

  1. विभिन्न प्रकार के यदि हमारे जीवन मे लक्ष्य हैं। परंतु यदि हम अपने जीवन मे अनुशासन का पालन नही कर रहे है। तो हमअपने लक्ष्यों की प्राप्ति नही कर पाएंगे।
  2. अनुशासित न होने हमे छोटे कार्य भी कठिन प्रतीत होंगे। शायद हम उन कार्यो को खत्म भही न कर पाए।
  3. देश की प्रगति में हम नही सहायता कर पाएंगे। क्योंकि यदि हम खुद ही नही अनुशासित रहेंगे। तो कैसे हम दूसरे को प्रभावित करेगे।

उपसंहार

सामान्यतः हम यह देखते हैं। कि यदि हम जीवन मे प्रगति चाहते है। तो हमे अनुशासित रहना जरूरी हैं। और उसी प्रकार से यदि हम अपने देश की प्रगति चाहते है।तो हमारे देश के नागरिक को जागरूक और अनुशासित रहना पड़ेगा। क्योंकि यदि हम ही नही अनुशासित रहेगा तो हम किसी भी व्यक्ति को अनुशासित नही कर सकते हैं।अनुशासन ही हमारे देश को महान बनायेगे। इसीलिए यह आवश्यक हैं। हम अपने देश के भावी नागरिक होने के कारण अपने कर्तव्यों को अनुशासित होकर निर्वहन करे। इसीलिए हमके अपने देश को आगे बढ़ाने हेतु ईमानदारी से कर्त्तव्य पूर्ण ढंग से देश को आगे बढ़ाना होगा। साथ ही साथ देश की सेवा का भी संकल्प लेना चाहिए।

आशा हैं कि हमारे द्वारा दी गयी अनुशासन पर निबन्ध हिंदी में, Discipline essay in hindi की जानकारी आपको काफी पसंद आई होगी। यदि अनुशासन पर निबन्ध हिंदी में, Discipline essay in hindi आपको पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करो।

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