एड्स पर निबन्ध हिंदी में,Hiv Aids essay in hindi

एड्स पर निबन्ध हिंदी में, Hiv Aids essay in hindi :: विश्व की खतरनाक बीमारियों में से एक मानी जाती हैं। इसके प्रति समाज मे जागरूकता होना जरूरी हैं। और इसलिए समय समय हमे एड्स पर हिंदी निबन्ध लिखने को दिया जाता हैं। इसीलिए हिंदीवानी भी आज आपके लिए लेकर आया है – एड्स पर निबन्ध हिंदी में,Hiv Aids essay in hindi. इस निबन्ध का प्रयोग आप Short paragraph of Aids in hindi ,Hiv aids essay in hindi के लिये भी कर सकते है। तो आइए शुरू करते है।

एड्स पर निबन्ध हिंदी में, Hiv Aids essay in hindi ::

एड्स पर निबन्ध हिंदी में, Aids essay in hindi
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प्रस्तावना

एड्स बहुत ही खतरनाक बीमारी हैं। एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्युनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम हैं। एड्स ह्यूमन इम्युनो डिफिशिएंसी नामक विषाणु के माध्यम से फैलता हैं।यह विषाणु बहुत ही ज्यादा सूक्ष्म होता हैं। जिसे हम सामान्य आंखों के द्वारा नही देख सकते है। इसको हम सूक्ष्मदर्शी के माध्यम से ही देख पाते है। एड्स के विषाणु दो प्रकार का होता हैं। एचआईवी -1 और एचआईवी -2.एड्स सामान्यतः व्यजती की प्रतिरोधक क्षमता को धीरे धीरे कम देता हैं। जिससे व्यक्ति का शरीर बहुत ही ज्यादा कमजोर हो जाता हैं। इस वजह से यह घातक बीमारियों की श्रेणी में आती हैं। भारत मे एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की संख्या बहुत ही अधिक है।भारत मे एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 20 लाख के ऊपर हैं। जिस वजहसे भारत एचआईवी संक्रमण वाले देशों में तीसरे नम्बर में आता हैं। यह बहुत ही ज्यादा खतरनाक और डरावने वाले आंकड़े हैं।

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एड्स फैलने के कारण

एड्स फैलने के कारण निम्नलिखित हैं।

  1. एड्स फैलने म सबसे प्रमुख कारणों में असुरक्षित यौन सम्बन्ध हैं।
  2. संक्रमित सुइयों के प्रयोग और सिरिंजों एवम संक्रमित रक्त के माध्यम से भी एड्स फैलता हैं।
  3. यदि कोई गर्भवती महिला को एड्स हैं। तो उसके नवजात बच्चे को भी एड्स होने का खतरा बना रहता हैं।
  4. मादक पदार्थ का उपयोग करने वाले व्यक्ति अक्सर सुइयों को साझा कर लेते है। जिस वजह से संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता हैं।
  5. संक्रमित रक्त और रक्त अवयवों के प्रयोग से एड्स होने की प्रभल सम्भवना बनी रहती हैं।

एचआईवी संक्रमित होने के लक्षण –

एचआईवी संक्रमित होने के लक्षण निम्नलिखित हैं।

  1. किसी भी व्यक्ति का वजन यदि बिना वजह हर महीने 10 किलोग्राम से अधिक घट गया हो।
  2. एक दो महीने में अक्सर बुखार रहना, शरीर का जल्दी थक जाना।
  3. गर्दन , बगल और जांघो की ग्रन्थियों में सूझन आना।
  4. मुह में बहुत ही ज्यादा सफेद रंग के छाले पड़ जाना।
  5. लम्बे समय तक किसी को बीमारी की दवा लेने पर भी वह ठीक ना होना।
  6. शरीर मे खुलजी और दाने बहुत ही ज्यादा होना।

एड्स का इलाज

एड्स के इलाज के बारे में बात की जाए तो इस संदर्भ में जागरूकता ही इसका इलाज मानी जाती हैं।एड्स से बचाव हेतु कुछ दवाइयों को निर्मित किया गया हैं जो की कारगर साबित हुई हैं। यह व्यक्ति की शरीर मे होने वाली प्रतिरोधक क्षमता में हो रही कमी को दूर करती हैं। साथ ही साथ एचआईवी विषाणुओं की संख्या में कमी लाती हैं। जिस वजह से व्यक्ति के जीवित रहने की सम्भवना बढ़ जाती हैं। और सुरक्षित यौन सम्बन्ध के बारे में व्यक्तियों को अधिक जागरूकता पैदा करके एड्स जैसी खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता हैं। और यदि हम कभी रक्त की जरूरत हो तो हो सके तो हमेशा लाइसेंस शुदा रक्तकोष से ही रक्त को लिया जाए। और जिन गर्भवती महिलाओं को एचआईवी संक्रमण है। उन महिलाओं को एआरवी दवाओं को देकर नवजात बच्चे में होने वाले संक्रमण को कम किया जाए।

विश्व एड्स दिवस – 1 दिसम्बर

विश्व भर में इस रोग के प्रति जगरूकता फैलाने हेतु कई प्रकार के कार्य किये गए है। जिनमे से एक है  की 1 दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। इस दिन लोग लाल रिबन को पहन कर समाज मे इसके प्रति जगरूकता को फैला कर इसे जड़ से दूर करने हेतु वचन लेते है। भारत मे एचआईवी के रोक थाम हेतु राज्य और केंद्र सरकार भी कई प्रकार के कार्यक्रम के आयोजन करती हैं। इसमे मुख्य रूप से राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

उपसंहार

आजकल हम देखते हैं कि अंधविश्वास एवं विभिन्न प्रकार की भ्रांतियों के कारण कुछ लोग एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं।साथ ही साथ जो व्यक्ति किसी प्रकार का रोजगार कर रहे होते हैं।उनके एचआईवी संक्रमण के कारण रोजगार को समाप्त कर दिया जाता है।हमें इन सब मामलों में अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।साथ ही साथ सभी व्यक्तियों से सामान्य रूप से व्यवहार करने की आवश्यकता है।साथ ही साथ देश का प्रत्येक व्यक्ति केंद्र सरकार और राज्य सरकार के द्वारा किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रयासों में सहयोग करें। और सामाजिक स्तर पर एचआईवी संक्रमण एड्स जैसी जानलेवा बीमारियों को जड़ से उखाड़ने हेतु संकल्प लें।और इनके विरुद्ध एक अच्छी लड़ाई लड़े।तो निश्चय ही कुछ ही वर्षों में भारत में इस खतरनाक बीमारी से मुक्ति मिलेगी। भारत के साथ-साथ इसे पूरे विश्व से समाप्त करने के लिए हमें पूर्ण रूप से सहयोग करने की आवश्यकता है।

आशा हैं कि हमारे द्वारा दी गयी एड्स पर निबन्ध हिंदी में, Aids essay in hindi की जानकारी आपको काफी पसंद आई होगी। यदि एड्स पर निबन्ध हिंदी में, Aids essay in hindi ,Hiv aids essay in hindi आपको पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करे।

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