स्मृति का अर्थ और परिभाषा|Meaning and definition of memory

स्मृति का अर्थ और परिभाषाMeaning and definition of memory : स्मृति का अर्थ है , किसी चीज को याद रखना। आज hindivaani आपको स्मृति के संदर्भ में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा।

स्मृति का अर्थ और परिभाषा(Meaning and definition of memory)

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स्मृति का अर्थ

स्मृति एक मानसिक क्रिया है स्मृति का आधार अर्जित अनुभव है। इसका पुनरुत्पादन परिस्थिति के अनुसार होता है।

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स्मृति की परिभाषा

स्मृति के संबंध में कुछ वैज्ञानिकों के विचार निम्नलिखित हैं।

वुडवर्थ के अनुसार स्मृति परिभाषा

“जो बात पहले से ही की जा चुकी है उसे स्मरण करना है स्मृति है।”

रायबर्न के अनुसार

“अपने अनुभव को संचित रखने और उनको प्राप्त करने के कुछ समय बाद चेतना के क्षेत्र में पुनः लाने की जो शक्ति हममें होती है।उसे स्मृति कहते हैं।”

जेम्स के अनुसार स्मृति परिभाषा

“स्मृति उस घटना का तत्व का ज्ञान है,जिसके बारे में हमने कुछ समय तक नहीं सोचा है,पर जिसके बारे में हमको यह चेतना है, कि हम उसका पहले विचार या अनुभव कर चुके हैं।”

स्काउट के अनुसार स्मृति की परिभाषा

“स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति है।”

मैकडूगल के अनुसार स्मृति की परिभाषा

“स्मृति से आशय अतीत की घटनाओं की कल्पना करना और इस तथ्य को पहचान लेना कि यह अतीत के अनुभव हैं।”

स्मृति के प्रकार

स्मृति के निम्नलिखित प्रकार है।

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संवेगी स्तर स्मृति

इस स्मृति में हम इन्द्रियों का प्रयोग करके अतीत के अनुभवों को फिर से याद कर सकते है। हम बन्द आंखों से उन वस्तुओं , को छू कर चख कर , सूंघकर बता सकते है। जिनको हम जानते है।

अल्पकालिक स्मृति

इस प्रकार की स्मृति में हम याद की हुई बात को तुरंत सुना देते है। परंतु कुछ समय पश्चात हम उस बात को भूल जाते है। ऐसे स्मृति को हम अल्पकालिक स्मृति कहते है। यह स्मृति सब बालको में एक सी नही होती। बालको की अपेक्षा वयस्को में यह अधिक पायी जाती है।

दीर्घकालिक स्मृति

इस प्रकार की स्मृति की गई बातों को हम कभी नही भूलते है। यह स्मृति बालको की अपेक्षा वयस्को में अधिक पायी जाती है।

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स्मृति के अंग

स्मृति एक जटिल प्रक्रिया है। स्मृति और स्मरण की प्रक्रिया को पूरा होने में चार चरण या अंग होते है।

1.सीखना(learning) – स्मृति का पहला अंग है सीखना । हम जिस चीज को याद करना चाहते हैम पहले हम उस चीज को सीखते है।

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2.धारण (Retention) – स्मृति का दूसरा अंग है। धारण, अर्थात सीखी हुई बात को मस्तिष्क में संचित करना

3.पुनः स्मरण (Recaal) – स्मृति का तीसरा अंग है। पुन स्मरण । अर्थात सीखी हुई बात को अचेतक मन से चेतन मन मे लाना।

4.पहचान (Recoginition) – स्मृति का चौथा अंग है। पहचान। फिर याद आने वाली बात में गलती ना होना।

स्मृति के नियम

बी एन झा ने स्मृति के तीन नियम बताएं है।

आदत का नियम

इस नियम के अनुसार जब हम किसी विचार को बार-बार दोहराते हैं।तब हमारे मस्तिष्क में उसकी छाप इतनी गहरी हो जाती है।कि हम में बिना विचारे उसको व्यक्त करने की आदत पड़ जाती है।

उदाहरण – बहुत से लोगों को आधे दो , तीन , चार ,पांच आदि के पहाड़े रटे होते हैं।इनको बोलते समय उनको अपने विचार शक्ति का प्रयोग नहीं करना पड़ता है।

निरंतरता का नियम –

इस नियम के अनुसार सीखने की प्रक्रिया में जो अनुभव विशेष रूप से प्रकट होते हैं। वे हमारे मस्तिष्क में कुछ समय तक निरंतर आते रहते हैं। अतः हमें उन को स्मरण रखने के लिए किसी प्रकार का प्रयोग नहीं करना पड़ता हैं।

परस्पर संबंध का नियम

इस नियम को साहचर्य का नियम भी कहते हैं।इस नियम के अनुसार जब हम एक अनुभव को दूसरे अंगों से संबंधित कर देते हैं। तब उनमें से किसी एक का स्मरण होने पर हमें दूसरे का स्वयं ही स्मरण हो जाता है।

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स्मरण करने की विधियां

मनोवैज्ञानिकों ने स्मरण करने की ऐसी अनेक विधियों की खोज की है।जिनका प्रयोग करने से समय की बचत होती है। इनमें से अधिक महत्वपूर्ण निम्नांकित हैं

  1. पूर्ण विधि
  2. खंड विधि
  3. मिश्रित विधि
  4. प्रगतिशील विधि
  5. अंतर युक्त विधि
  6. अंतहीन विधि
  7. सक्रिय विधि
  8. निष्क्रिय विधि
  9. रटने की विधि
  10. निरीक्षण विधि
  11. क्रिया विधि
  12. विचार साहचर्य विधि
  13. साभिप्राय विधि

स्मृति प्रशिक्षण

स्मृति की उन्नति के लिए प्रशिक्षण या अभ्यास करना अति आवश्यक है।इसके लिए निम्नलिखित उपाय या नियम है। जिसकी वजह से इस स्मृति की उन्नति में सहायता प्राप्त होती है।जो निम्नलिखित हैं ।

  1. दृढ़ निश्चय
  2. स्पष्ट ज्ञान
  3. प्रोत्साहन
  4. पहले से समझना
  5. रुचि उत्पन्न करना
  6. पूर्व ज्ञान पर आधारित
  7. स्मरण के अधिक अवसर
  8. दोहराना
  9. संवेगात्मक स्थिरता
  10. एकाग्रता

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