वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धान्त, वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धान्त, Vygotski theory in hindi

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वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धान्त, वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धान्त, Vygotski theory in hindi: सीखने के विभिन्न प्रकार के सिद्धात के क्रम में hindivaani आज आपके लिये लेकर आया है। वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धांत। वाइगोत्सकी के सिद्धान्त को हम सामाजिक सास्कृतिक सिद्धान्त के नाम से जानते है। अगर कोई आपसे पूछे कि वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धान्त किसने दिया? तो इसका उत्तर हैं। वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धान्त लेव वाइगोत्सकी ने दिया था। तो आइए आज हम लेव वाइगोत्सकी के सामाजिक विकास के सिद्धान्त(Learning theory of vygotsky) विस्तृत जानकारी प्राप्त करते है।

वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धान्त, वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धान्त, Vygotski theory in hindi

वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धान्त, वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धान्त, Vygotski theory in hindi

वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धान्त, वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धान्त, Vygotski theory in hindi

वाइगोत्सकी ने सीखने के जो विभिन्न प्रकार के सिद्धान्त अन्य मनोवैज्ञनिको द्वारा दिये गए है। उनसे उनसे भिन्न विचार इन्होंने दिए है। इनका यह मानना है कि सीखने की प्रक्रिया जो है।वो विकास पे आधारित हैं। ना की विकास सीखने की प्रक्रिया पर।अन्य शब्दो मे कहा जाए तो ज्ञान के क्षेत्र में विकास के साथ -साथ विलास की प्रक्रिया उन क्षेत्रों में भी होती हैं। जिन्हें हमने सीखा नही है।

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वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धान्त, Learning theory of vygotsky

वाइगोत्सकी का अधिगम सिद्धान्त या कहे वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धान्त निम्नलखित बिंदुओं पर आधारित हैं। जो अग्रलिखित हैं।

1.संज्ञानात्मक विकास (Coginitive development)

वाइगोत्सकी ने संज्ञानात्मक विकास में भाषा को प्रमुख साधन माना हैं। इसका वर्णन करते हुए वो कहते है। कि भाषा संज्ञानात्मक विकास के उपागम के रूप में प्रयुक्त नही होती हैं। परंतु उन्होंने कहा हैं की यह एक ऐसा उपाय हैंम जो सास्कृतिक विवरण को आकार प्रदान करता हैं। जिनके अतरिक्त संस्थाएं , साधन मानव निर्मित वह संस्थाएं हैं। जो ऐतिहासिक एवं सास्कृतिक व्यवस्थाओ की ओर संकेत करती हैं।

2.अन्तः क्रिया ( interaction)

वाइगोत्सकी ने अन्तः क्रिया को सीखने में महत्वपूर्ण माना है। अंतः क्रिया के माध्यम से छात्र में स्वतः प्रेरणा उत्पन्न होती है। जो कि उसको सीखने में सहायता करती है।

3.Z.P.D की अवधारणा(concept of zone of proximal development)

वाइगोत्सकी का कहना है कि जो कुछ हम जानते हैं और जो कुछ हम नहीं जानते हैं उसके पीछे के रिक्त स्थान होता है। जेड.पी.डी .छात्र को सीखने के प्रति आकर्षित करती हैं। तथा छात्र नवीन तथ्यों में सीखने का प्रयास करता हैं।

4.संस्कृत का अधिगम पक्ष(Learning aspect of culture)

भाई को अच्छी का मत है कि संस्कृति विशिष्ट व्यवहार परिवर्तन एवं मानसिक कार्य में परिवर्तन को प्रदर्शित करती है तथा उसके अतिरिक्त मानव व्यवहार के विकास का नवीन स्थान निर्धारित करती है।

5.अधिगम स्तर में भिन्नता

जेड.पी.डी के कारण ही छात्रों के अधिगम स्तर में भिन्नता होती हैं। क्योंकि जो छात्र जानने वाले ज्ञान तथा नहीं जाने वाले ज्ञान के मध्य संबंध स्थापित करने में सक्षम होते हैं उनका अधिगम स्तर सामान्य से कम होता है।

वाइगोत्सकी के सिद्धांत की विशेषताएं

वाइगोत्सकी के सिद्धांत की निम्नलिखित विशेषताएं हैं।

  • सीखना एक सार्वभौमिक क्रिया है।जो निरंतर चलती रहती है।
  • अन्तः दृष्टि के द्वारा विद्यालय छात्रों को अधिगम प्रक्रिया का एक निर्देशित स्वरूप प्रदान करता है।
  • अधिगम प्रक्रिया में जेड.पी.डी का प्रमुख स्थान होता है।
  • सीखने की प्रक्रिया में सांस्कृतिक संगठनों के उपाय एवं मनोवैज्ञानिक तथ्य उत्तरदायी होते हैं।

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