रूपक अलंकार किसे कहते है ? परिभाषा , उदाहरण

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रूपक अलंकार किसे कहते है ? परिभाषा , उदाहरण

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रूपक अलंकार किसे कहते है ?

ऐसा अंलकार जिसमे गुण के अत्यधिक समान होने पर उपमेय में उपमान का अभेद आरोप लगाया जाता हैं। वहां पर रूपक अलंकार होता हैं।

रूपक अलंकार के उदाहरण –

रूपक अलंकार के उदाहरण निम्नलिखित हैं।

उदित उदयगिरि मंच पर , रघुवर बाल पतंग।
विकसे सन्त – सरोज सब , हरषे लोचन – भृंग ।।

ऊपर दिए गए उदाहरण में हम देख रहे है कि उदयगिरि में मंच का , और रघुवर में बाल पतंग मतलब सूर्य का , सन्त में सरोज का और लोचन में भृंग का अभेद आरोप लग रहा हैं। इस वजह से इन पंक्तियों में रूपक अलंकार हैं।

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मन सागर मनसा लहरी , बूड़े – बहे अनेक ।

ऊपर दी गयी पक्तियों में हम देख रहे है कि मन पर सागर का मनसा पर लहरी का अभेद आरोप लग रहा हैं। जिस वजह से इन पंक्तियों में रूपक अलंकार हैं।

शशि – मुख पर घूँघट डाले।
अंचल में दीप छिपाए।।

ऊपर दिए गए पक्तियों में हम देख रहे है कि मुख उपमेय में शशि उपमान का आरोप होने से रूपक अलंकार की यहां पर हो रहा हैं।

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रूपक अलंकार के अन्य उदाहरण –

रूपक अलंकार के अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं।

●विषय – वारि मन – मीन भिन्न नहिं ,
होत कबहु पल एक।।

●सिर झुका तूने नियति की मान ली यह बात।
स्वयं ही मुर्झा गया तेरा हृदय – जलजात।।

● अपलक नभ नील नयन विशाल।

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● मैया मै तो चन्द्र – खिलौना लैहों।।

● चरण कमल बंदौ हरीराई।

● सब प्राणियों के मत्त मनोमयूर
अहा नचा रहा।

● पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।

रूपक अलंकार के परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर –

रूपक अलंकार के परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर निम्नलिखित हैं।

◆ बीती विभावरी जाग री अम्बर – पनघट में डुबो रही
तारा घट उषा – नागरी।।

◆ मैया मै तो चन्द्र खिलौना लैहों।

◆ये तेरा शिशु जग हैं उदास ।

◆अम्बर – पनघट में डुबो रही तारा – घट उषा – नागरी

◆ मुख रूपी चाँद पर राहु भी धोखा खा गया ।।

◆ मुख कमल समीप सजे थे,
दो किसलय दल पुरइन के।।

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