भूकम्प किसे कहते है , सावधानियां, हानि

भूकम्प किसे कहते है , सावधानियां, हानि ::पृथ्वी की आंतरिक चटटानो में होने वाली हलचल को हम भूकम्प नाम से जानते है। आज hindivaani भूकम्प के बारे में जानकारी देंगे । इस आर्टिकल में निम्न चीजो को जानेगे की भुकम्प के कारण क्या है ? भूकम्प को किससे मापते हैं ? भूकम्पीय तरंगों के प्रकार , भूकम्प से होने वाली हानि आदि। तो आइए शुरू करते हैं।

भूकम्प किसे कहते है , सावधानियां, हानि

भूकम्प किसे कहते है , सावधानियां, हानि
भूकम्प किसे कहते है , सावधानियां, हानि

भूकम्प किसे कहते है ?

भूकम्प अत्यधिक विनाशकारी आपदाओं में से एक मानी जाती हैं। पृथ्वी की सतह से कुछ किलोमीटर तक गहराई में स्थित चट्टानों में उपस्थित दरारों भ्रंशों ,कमजोर स्तनों पर परस्पर टकराव ,गति , हलचल, घर्षण आदि से उत्पन्न एवं प्रसारित कंपन जो उत्पत्ति केंद्र से चारों तरफ प्रसारित हो कर सतह पर स्थित वस्तुओं आदि को हिला डुला कर असंतुलित कर देता है।उसे हम भूकंप के नाम से जानते हैं। कुछ ऐसी भी सूक्ष्म तरंगे होती हैं।जिसे मनुष्य अनुभव नहीं कर पाता है।किंतु संवेदनशील प्राणी जैसे – कुत्ते ,बिल्ली, चमगादड़, पक्षी आदि द्वारा महसूस कर लिया जाता है। आधुनिक भूकंपीय यंत्र द्वारा ऐसी तरंगे भी रिकॉर्ड की जा सकती हैं।

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भूकम्प के कारण –

भूकम्प आने के कारण को समझने के लिए हमे तीन चीजो को समझना होगा।

  1. भूकम्प केंद्र।
  2. अभिकेंद्र।
  3. परिमाण।

भूकम्प केंद्र – पृथ्वी की सतह के नीचे जिस स्थान पर भूखंड यह प्लेटेड टकराती हैं या जहां से आंतरिक संघनित ऊर्जा दरारों ,भ्रंशों आदि के अनुसार त्वरित कंपन को जन्म देती है उस स्थान को भूकंप का केंद्र कहा जाता है।

अभिकेंद्र – भूगर्भ में स्थित केंद्र के सापेक्ष पृथ्वी की सतह पर स्थित उस बिंदु को जहां तरंगे सतह से टकराती हैं अब केंद्र कहा जाता है।यहां भूकंप की तरंगे सबसे पहले पहुंचती हैं।

परिमाण – भूकंप के माध्यम से अवमुक्त हुई ऊर्जा का आकलन ही परिमाण कहलाता है।परिमाण को अंकों के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है।

भूकम्प को किससे मापा जाता हैं?

भूकंप का आकलन किसके द्वारा किया जाता है रिक्टर द्वारा 1958 में गुणात्मक आकलन के आधार पर जो इसके लिए बनाया गया उसे रिक्टर स्केल कहा जाता है आजकल यही प्रचलित है इसमें तीव्रताओं के अनुसार स्केल वर्णित हैं।

भूकम्पीय तरंगों के प्रकार –

भूकम्पीय तरंगे चार प्रकार की होती हैं।

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प्राथमिक तरंगे – अनुदैर्ध्य तरंगें जिनकी की गति तीव्र होती है। यह भूकंप केंद्र से कई 100 किलोमीटर तक प्रसारित होती हैं इन्हें सर्वप्रथम अनुभव किया जा सकता है।

द्वितीयक तरंगे – अनुप्रस्थ तरंग प्रकृति के अवसर आयाम के कंपन होते हैं।यह अधिक हानि नहीं कर पाती है। यह ठोस चट्टानों से गुजर सकती हैं।

धरातलीय तरंगे – यह पृथ्वी की सतह से समांतर प्रवाहित होने के कारण सर्वाधिक विनाशकारी होते हैं। यह पृथ्वी की सतह को अगल-बगल हिलाते हैं।

रेले तरंगे – सबसे अधिक कंपनी ने तरंगों कारण होता है।यह तरंगे पृथ्वी की सतह पर लुढ़कती हैं।

भूकम्प आने के पहले के लक्षण –

भूकम्प आने के कुछ समय पहले लक्षण दिखाई देते है। जो कि निम्नलिखित हैं।

  1. भूकंप से पूर्व पृथ्वी की रेडियोधर्मिता में हुई वृद्धि एवं असामान्य गैसों के निकलने से वातावरण में कुछ परिवर्तन हो सकता है।इसे विपदा की आशंका की जा सकती है।
  2. जलीय श्रोतो और कुएं का जल गन्दा होने लगता हैं।
  3. भूकंप आने के पूर्व प्रारंभिक अवस्था में भवन के दरवाजे तथा खिड़कियां धीरे-धीरे खटखटाने लगते हैं बर्तन, चारपाई, में फूलदान आदमी कंपन होने लगता है।
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भूकम्प आने पर सावधानियां –

भूकम्प आने पर हमें निम्नलिखित सावधानियां बरतनी होगी। जो अग्रलिखित हैं।

  1. हमे बिल्कुल भी डरना नहीं चाहिए।शांति से काम को लेना चाहिए।
  2. जहां हैं वही खड़े रहना चाहिए।किंतु दीवारों, पेड़ खंभों का सहारा नहीं लेना चाहिए।
  3. चलती कार में हो तो सड़क के किनारे बैठ जाना चाहिए। पुल या सुरंग को पार नहीं करना चाहिए।
  4. बिजली बंद कर दे गैस पाइपलाइन बंद कर सिलेंडर को सील कर दें।

भूकम्प से होने वाली हानियां –

भूकम्प से होने वाली हानियां निम्नलिखित हैं।

  1. भूकम्प आने पर अपार जान माल की हानि होती हैं।
  2. लोगो के पास खाने, रहने , आदि की समस्याएं अधिक हो जाती हैं।
  3. समुद्र तट पर भूकम्प आने पर वहां पर उपस्थित जलयनी और तटीय लोगो को काफी ज्यादा नुकसान होता हैं।
  4. सड़क , पुल , बड़ी बड़ी इमारतों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुचता हैं।

आशा हैं कि हमारे द्वारा दी गयी भूकम्प किसे कहते है , सावधानियां, हानि आपको पसन्द आयी होगी। यदि भूकम्प किसे कहते है , सावधानियां, हानि यह जानकारी आपको पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करे।

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