बालक का मानसिक विकास|Mental development of child

बालक का मानसिक विकास|Mental development of child : uptet में एक महत्वपूर्ण टॉपिक हैं। जिसका नाम है बालक का मानसिक विकास। आज hindivaani आपको बालक के मानसिक विकास कद बारे में सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएगी।

बालक का मानसिक विकास(Mental development of child)

बालक के मानसिक विकास टॉपिक को जानने से पहले हमें यह जानना जरूरी है।कि मानसिक विकास क्या होता है? मानसिक विकास से अशाय व्यक्ति के ज्ञान के भंडार में वृद्धि एवं उसके उपयोग से है।मानसिक शक्तियों का विकास तथा वातावरण के प्रति सामंजस्य स्थापित करने की क्षमता का नाम मानसिक विकास है।

बालक का मानसिक विकास,mental development of child
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मानसिक विकास के पक्ष

मानसिक विकास के पक्ष इस प्रकार हैं।

  • संवेदना
  • निरीक्षण
  • स्मरण
  • कल्पना
  • चिंतन
  • निर्णय
  • बुद्धि
  • रुचि एवं अभिरुचि
  • प्रत्यक्षीकरण
  • ध्यान
  • तर्क
  • सीखना
  • भाषा

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शैशवावस्था में मानसिक विकास(Mental development in infancy)

शैशवावस्था में मानसिक विकास निम्न चरणों में होता है।

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जन्म के समय व पहला सप्ताह -जन्म के समय व पहला सप्ताह में बालक सिर्फ छिकना,हिचकी लेना, दूध पीना, हाथ पैर हिलाना आदि कर पाता है।

दूसरा सप्ताह– दूसरे सप्ताह में बालक प्रकाश व चमकीली और बड़े आकार की वस्तुओं को ध्यान से देखता है।

पहला माह -शिशु कष्ट या भूख का अनुभव होने पर रोता है।

दूसरा माह – शिशु आवाज सुनने के लिए सिर घूमाता है।

चौथा माह- शिशु दी जाने वाली किसी भी वस्तु को दोनों हाथों से पकड़ता है।और खोए हुए खिलौनों को खोजता है।

छठा माह – शिशु अपने नाम को समझने लगता हैं। एवं क्रोध और प्रेम में अंतर करना सीख जाता है।

आठवां माह –शिशु दूसरे बच्चों के साथ खेलने में अच्छा अनुभव करता है।

दसवा माह – 10 माह के अंदर किसी व्यक्ति गतिविधियों को देखकर उसमे अनुकरण करने की क्षमता जाती है।

पहला वर्ष- शिशु चार शब्द बोल लेता हैं।

दूसरा वर्ष- शिशु दो शब्दों के वाक्यो का प्रयोग करता है।

तीसरा वर्ष- शिशु पूछे जाने पे अपना नाम बताता हैं।

चौथा वर्ष- शिशु चार तक गिनती गिन लेता है।

पाचवा वर्ष– शिशु रंगों में अंतर करना सिख जाता हैं।और वह अपना नाम लिखने लगता हैं।

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बाल्यावस्था में मानसिक विकास (Mental development in childhood)

बाल्यावस्था में मानसिक विकास निम्न चरणों में होता है।

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छठवां वर्ष– बालक बिना हिचके हुए 13 से 14 तक की गिनती सुना देता है।तथा सरल प्रश्नों के उत्तर दे देता है।और शरीर के विभिन्न अंगों के नाम बता देता है।

सातवां वर्ष- बालक दो वस्तुओं के बीच अंतर करना सीख जाता है।

आठवां वर्ष -बालक में छोटी कहानियों और कविताओं को अच्छी तरह दोहराने की प्रवृत्ति आ जाती है।

नवा वर्ष – बालक को दिन ,समय ,तारीख ,वर्ष और सिक्कों का ज्ञान हो जाता है।छोटी-छोटी कहानियों को याद करके सुना सकता है।

11 वर्ष – उसके अंदर दोवस्तुओं के बीच समानता और असमानता जानने का गुन आ जाता है।

12 वर्ष- बालक के अंदर तक चिंतन समस्या का समाधान करने की प्रवृत्ति आदि का विकास हो जाता है।

किशोरावस्था में मानसिक विकास(Mental development in Adolescence)

किशोरावस्था में मानसिक विकास निम्न प्रकार होता है।

  • बुद्धि का अधिकतम विकास
  • मानसिक स्वतंत्रता
  • मानसिक योग्यताएं
  • ध्यान
  • चिंतन शक्ति
  • तर्कशक्ति
  • कल्पना शक्ति
  • रुचियों की विविधता

बालक के मानसिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक(Factors influence ing mental development)

बालक के मानसिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं।

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परिवार का वातावरण

बालक के मानसिक विकास में परिवार के वातावरण का महत्वपूर्ण योगदान रहता हैं।अगर बालक के घर का वातावरण दुखद और कलहपूर्ण है।तो यह संभव होना मुश्किल है।कि उसका मानसिक विकास अच्छे से हो पाएगा।जितना कि एक सुखद वातावरण में उसका मानसिक विकास होता है।

परिवार की आर्थिक

टरमन ने विभिन्न प्रकार के परीक्षण द्वारा बताया है।कि प्रतिभसाली बालक दरिद्र क्षेत्रों से आने की बाजय अच्छी आर्थिक स्थिति वाले परिवारों से अधिक आते हैं।

समाज

प्रत्येक बालक का जन्म किसी न किसी समाज में अवश्य हुआ होता है।वही समाज उसके मानसिक विकास की गति और सीमा को निर्धारित करता है।

वंशानुक्रम

बालक के मानसिक विकास में वंशानुक्रम का काफी योगदान है।वंशानुक्रम से बालक के कुछ मानसिक गुण और योग्यता प्राप्त करता है।जिनमे वातावरण किसी प्रकार का अंतर नहीं कर सकता।

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