पुनर्बलन कौशल किसे कहते है? पुनर्बलन किसे कहते है?,पुनर्बलन का अर्थ

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पुनर्बलन कौशल किसे कहते है? पुनर्बलन किसे कहते है?

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पुनर्बलन से आशय हैं। कि शिक्षक का ऐसा व्यवहार जिससे छात्रों का शिक्षण कार्य और प्रश्नों का सही उत्तर देने में प्रोत्साहन हो। पुनर्बलन शब्द अधिगम के मनोविज्ञान से लिया गया हैं। पुनर्बलन एक ऐसी प्रक्रिया होती हैं। जिसमे छात्र यदि कोई शिक्षण कार्य कर रहा हैं। तो शिक्षक उसे शब्दिक और अशाब्दिक रूप से पुनर्बलित करता हैं। इससे बालक की प्रतिक्रिया शक्ति को बढ़ावा मिलता हैं।

पुनर्बलन की परिभाषा (Definition of reinforcement)

पुनर्बलन की परिभाषा निम्नलिखित हैं।

स्किनर के अनुसार पुनर्बलन की परिभाषा

” पुनर्बलन वह स्तिथि हैं। जो छात्र की प्रतिक्रिया में वृद्धि करती हैं।”

ओलिवर के अनुसार

” वीडियो पुनर्बलन पर्यवेक्षक द्वारा दिये गए मौखिक पुनर्बलन से अधिक प्रभावशाली होता हैं।”

पलवर्ग एवम मॉरिस के अनुसार

” वीडियो पुनर्बलन ऑडियो पुनर्बलन से अधिक प्रभावशाली है।”

पुनर्बलन का उदाहरण – हम यह देखते हैं। कि बहुत से ऐसे बालक होते है। जो संकोची प्रव्रत्ति के होते है। ऐसे में हम उनसे से किसी बच्चे को उत्तर देने के लिए खड़ा करते है। यदि बालक गलत उत्तर भी दे रहा हैं। उसे स्वीकार कर ले। किंतु गलत को गलत न कहकर यही कहे कि यदि आप इस उत्तर को इस प्रकार से कहते तो और अच्छा होता।

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पुनर्बलन के प्रकार

पुनर्बलन के दो प्रकार होते है।

  1. धनात्मक पुनर्बलन।
  2. ऋणात्मक पुनर्बलन।

धनात्मक पुनर्बलन – ऐसा पुनर्बलन जो शब्दिक या अशाब्दिक किसी भी रूप में हो। जिसके माध्यम से बालक के उपलब्धि पर बढ़ावा हो। उसे धनात्मक पुनर्बलन कहते है।

ऋणात्मक पुनर्बलन – ऐसा पुनर्बलन जिसमे बालक की उपलब्धियों में बाधक सिद्ध हो। उसे ऋणात्मक पुनर्बलन कहते है।

पुनर्बलन कौशल में ध्यान रखने योग्य बाते –

पुनर्बलन कौशल में ध्यान रखने योग्य बाते निम्नलिखित हैं।

1.पुनर्बलन का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब बालक किसी प्रश्न का उत्तर ठीक प्रकार से न दे पा रहा हो।

2.बालक के द्वारा दिए गए सामान्य उत्तरों के लिए पुनर्बलन का प्रयोग कभी नहीं किया जाना चाहिए।

3.पुनर्बलन , चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक हो निष्पक्षता पूर्वक होना चाहिए।

4.बालक के द्वारा कोई भी गलत कार्य किये जाने पर उसे सबके सामने ना डाँट कर यदि आप अकेले समझाएंगे। तो वह अधिक प्रभावी होगा।

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5.अधिक पुनर्बलन भी नाकारात्मक का रूप ले लेता हैं।

उपयोगी प्रश्न – पुनर्बलन सिद्धान्त के प्रतिपादक कौन हैं ?
उत्तर– सी .एच .हल।

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