पावलव का क्लासिकल अनुबंधन सिद्धांत(Povlov’s theory of classical conditioning)

0
120

पावलव का क्लासिकल अनुबंधन सिद्धांत(Povlov’s theory of classical conditioning) – अधिगम के विभिन महत्वपूर्ण सिद्धान्त में से एक पावलव का क्लासिकल अनुबन्धन सिद्धान्त भी प्रमुख है। आज hindivaani आपको पावलव के अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धान्त की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएगा।

पावलव का सिद्धांत pdf,हिंदी में क्लासिकल कंडीशनिंग सिद्धांत,पावलव का पूरा नाम,सम्बन्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत,अधिगम के सिद्धान्त, पावलव का सम्बन्ध प्रतिकिया सिद्धांत,पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत, पावलब का क्लासिकल अनुबन्धन सिद्धांत

पावलव का क्लासिकल अनुबंधन सिद्धांत(Povlov’s theory of classical conditioning)

पावलव का सिद्धांत pdf,हिंदी में क्लासिकल कंडीशनिंग सिद्धांत,पावलव का पूरा नाम,सम्बन्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत,अधिगम के सिद्धान्त, पावलव का सम्बन्ध प्रतिकिया सिद्धांत,पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत, पावलब का क्लासिकल अनुबन्धन सिद्धांत
पावलव का सिद्धांत pdf,हिंदी में क्लासिकल कंडीशनिंग सिद्धांत,पावलव का पूरा नाम,सम्बन्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत,अधिगम के सिद्धान्त, पावलव का सम्बन्ध प्रतिकिया सिद्धांत,पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत, पावलब का क्लासिकल अनुबन्धन सिद्धांत

अधिगम के क्लासिकल अनुबंधन सिद्धांत का प्रतिपादन पी पावलव नामक शिक्षण शास्त्री ने किया था।इस सिद्धांत के अन्य नाम या उपनाम अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत या अनुबंधित अनुक्रिया सिद्धांत भी कहा जाता है।

क्लासिकल अनुबंधन सिद्धांत का अर्थ

क्लासिकल अनुबंधन सिद्धांत का अर्थ

UCS – Unconditioned stimulus
CS – Conditined stimulus
UCR – Unconditioned Response
CR – Conditioned response

क्लासिकल अनुबंधन सिद्धांत के अंग

विलोपन (Extinction) -अनुबंधन के बाद जब अनुबंधित उद्दीपक के साथ साथ हम कई बार अगर स्वाभाविक उद्दीपक को नहीं प्रस्तुत कर पाते हैं। तो अनुबंधित अनुक्रिया का धीरे-धीरे दिल विलोपन हो जाता है।

स्वतः प्रकटिकरण ( Spontanecus recovery ) –

विलोपन के बाद अगर हम कुछ समय बाद अनुबंधित उद्दीपक को पुनः प्रस्तुत करते हैं तो कभी-कभी कुत्ता अनुबंधित अनुक्रिया करना पुनः प्रारंभ कर देता हैं।

उद्दीपक सामान्यीकरण ( stimulus generalisation ) –

एक बार अनुबंध स्थापित हो जाने पर प्राणी अनुबंधित उद्दीपक से मिलते जुलते अन्य उद्दीपकों के प्रति प्रायः उसी ढंग से अनुपक्रिया करता है।

उद्दीपक विभेदन ( Stimulus discrimination ) –
अनुबंधन के प्रयासों की संख्या बढ़ाने पर प्राणी मूल अनुबंधित तथा सामान्य उद्दीपकों में धीरे-धीरे विभेद करने लगता है।

कालिक क्रम (Temporal sequence )

अनुबंधन के लिए अनुबंधित उद्दीपक तथा स्वाभाविक उद्दीपक के बीच समय अंतराल के बढ़ाने पर अनुबंधन कमजोर हो जाता है।

पुनर्बलन– अनुबंधन को पुनर्बलन करने के लिए यह महत्वपूर्ण है। कि उद्दीपक के साथ-साथ स्वाभाविक उद्दीपक भी बीच-बीच में दिया जाता रहे।

पावलव का सिद्धांत pdf,हिंदी में क्लासिकल कंडीशनिंग सिद्धांत,पावलव का पूरा नाम,सम्बन्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत,अधिगम के सिद्धान्त, पावलव का सम्बन्ध प्रतिकिया सिद्धांत,पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत, पावलब का क्लासिकल अनुबन्धन सिद्धांत

क्लासिकल अनुबन्धन सिद्धान्त का शिक्षण में उपयोग

  • भाषा का विकास करने में
  • स्वभाव व आदतों के निर्माण में
  • अभिवृति का विकास करने में
  • गणित शिक्षण में सहायक के रूप में
  • समाजीकरण में सहायक

पावलव के संबंध प्रतिक्रिया सिद्धांत की आलोचना

पावलव के सम्बन्ध प्रक्रिया सिद्धान्त की आलोचना कुछ मनोवैज्ञानिकों ने की है। उन्होंने यह बताया कि यह सिद्धांत जटिल विचार श्रंखला की उचित व्याख्या करने असफल रहा है।यह सिद्धांत मानव को यन्त्र की तरह मानता है। तथा मानव की विवेक और तर्क की अवहेलना करता है।जबकि सत्य है कि मानव मशीन की भांति नही है।वह क्रियाओं का संचालन चिंतन के आधार पर करता है।

इस सिद्धांत द्वारा अधिगम स्थाई रहता है।जब तक उत्तेजक बार-बार दोहराए जाते हैं। और उस समय तक संबद्धता बनी रहती है। यदि उत्तजको के संबंधों को समाप्त कर दिया जाए। तो प्रतिक्रिया प्रभावहीन हो जाती है। उद्देश्यों को कुछ काल तक प्रस्तुत नहीं किया जाए। तो प्राणी उससे संबंध प्रतिक्रिया को भूल जाएगा।

पावलव का सिद्धांत pdf,हिंदी में क्लासिकल कंडीशनिंग सिद्धांत,पावलव का पूरा नाम,सम्बन्ध प्रतिक्रिया का सिद्धांत,अधिगम के सिद्धान्त, पावलव का सम्बन्ध प्रतिकिया सिद्धांत,पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत, पावलब का क्लासिकल अनुबन्धन सिद्धांत

आशा है कि हमारे द्वारा दी गयी जानकारी आपको पसंद आई होगी इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here