पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ? , परिस्थितिक तंत्र के घटक

पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ? , परिस्थितिक तंत्र के घटक :: नमस्कार दोस्तो आज हिंदीवानी जो आपके लिए टॉपिक लेकर आया है। उसका नाम हैं – पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ? , परिस्थितिक तंत्र के घटक। इसके अंतर्गत आपको सभी प्रकार की जानकारी दी जॉयेगी। तो आइए शुरू करते है।

पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ? , परिस्थितिक तंत्र के घटक

पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ? , परिस्थितिक तंत्र के घटक
पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ? , परिस्थितिक तंत्र के घटक

पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ?

जीवधारी एवं उनका समुदाय उस क्षेत्र के अन्य जैविक अथवा अजैविक अंशो से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से प्रभावित होते हैं।अथवा एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार किसी क्षेत्र में कार्य करने वाले जैविक एवं अजैविक अंशु का संपूर्ण योग ही पारिस्थितिक तंत्र कहलाता है।

संपूर्ण पृथ्वी एक बड़ा पारिस्थितिक तंत्र है।जिसके अंतर्गत पाए जाने वाले समस्त जीव समुदाय सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा पर निर्भर रहते हैं।

पारिस्थितिक तंत्र के घटक –

पारिस्थितिक तंत्र को संरचना के आधार पर निम्नलिखित दो घटकों में विभाजित किया गया है।

  1. जैविक घटक।
  2. अजैविक घटक।
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जैविक घटक –

इन्हें जीवीय घटक भी कहते हैं।जीव धारियों के किसी समुदाय के जीवो में परस्पर पोषण संबंध पाए जाते हैं। किसी भी पारिस्थितिक तंत्र पोषण के पारस्परिक संबंध के आधार पर निम्नलिखित भागों में विभाजित किया गया है।

  • उत्पाद।
  • उपभोक्ता ।
  • अपघटक।

उत्पाद

इसमें हरे पेड़ पौधे तथा वे सभी वनस्पति सम्मिलित होती हैं।जो सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इन्हें उत्पाद अथवा मूल उत्पादक कहते हैं।

उपभोक्ता

इनके अंतर्गत वे सभी प्रकार के जीव जंतु सम्मिलित है।जो अपनी भोजन प्राप्ति के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वनस्पतियों पर निर्भर रहते हैं।इस प्रकार के समस्त जीव-जंतुओं को निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया गया है।जो कि अग्र लिखित है।

प्राथमिक उपभोक्ता – इन्हें शाकाहारी भी कहते हैं इसके अंतर्गत भी समस्त जीव-जंतु सम्मिलित होते हैं।जो अपना भोजन मूल उत्पादक अथवा पेड़ पौधे से प्राप्त करते हैं। अर्थात पेड़ पौधे के विभिन्न भागों को ही खाते हैं ।

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द्वितीयक उपभोक्ता – इसमें भी मांसाहारी जीव सम्मिलित होते हैं।जो शाकाहारी जीव जंतुओं को खाते हैं। जैसे – चिड़िया, छिपकली, झींगुर ,मेंढक ,मछली आदि।

तृतीयक उपभोक्ता – इसके अंतर्गत हुए मांसाहारी प्राणी जो सम्मिलित है जो अन्य मांसाहारी प्राणियों को खाते हैं ।जैसे – सांप मेंढक को खाता है।और बाज और गिद्ध सांप को खा जाता है।

अपघटक

इसके अंतर्गत मृतोपजीवी जीवाणु, कवक आदि आते हैं।जो पेड़ पौधे एवं जीव जंतुओं तथा मृत कार्बनिक पदार्थों को सड़ा गला कर एवं विकसित करके सूक्ष्म एवम सरल कार्बनिक अकार्बनिक यौगिकों में बदल देते हैं।

अजैविक घटक –

इसके अंतर्गत तीन प्रकार के तत्व होते हैं।

  • भौतिक चक्रों में सम्मिलित होने वाले तत्व जैसे – नाइट्रोजन गंधक ,कार्बन, हाइड्रोजन आदि।
  • क्लोरोफिल जैसे अजैविक रसायन तथा पर्यावरण में उपस्थित प्रोटीन ,कार्बोहाइड्रेट आदि रासायनिक पदार्थ।
  • जलवायु की दशाएं

आशा हैं कि हमारे द्वारा दी गयी पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ? , परिस्थितिक तंत्र के घटक आपको पसन्द आयी होगी। यदि यह जानकारी आपको पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तो से जरूर शेयर करे।

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