चिंतन का अर्थ और परिभाषा, चिंतन के सोपान

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चिंतन का अर्थ (meaning of thinking)

मनुष्य के सामने कभी ना कभी किसी प्रकार की समस्या जरूर आती है। समस्या के समाधान के लिए वह किसी ने किसी प्रकार का उपाय जरूर सोचता है।उसकी इस प्रकार सोचते और विचार करने की क्रिया को चिंतन कहते हैं।

चिंतन की परिभाषाएं (definition of thinking)

चिंतन की परिभाषा विभिन्न मनोवैज्ञानिकों के अनुसार निम्नलिखित हैं।

रॉस के अनुसार

” चिंतन मानसिक क्रिया का ज्ञानात्मक पहलू है।या मन की बातों से संबंधित मानसिक क्रिया है।”

वैलेंटाइन के अनुसार

“चिंतन शब्द का प्रयोग उस क्रिया के लिए किया जाता है। जिसमें श्रृंखलाबद्ध विचार किसी लक्ष्य या उद्देश्य की ओर अविराम गति से प्रवाहित होते हैं”

रायबर्न के अनुसार चिंतन की परिभाषा

“चिंतन इच्छा संबंधी क्रिया है।जो किसी असंतोष के कारण आरंभ होती है।और प्रयास के आधार पर चलती हुई स्थिति पर पहुंच जाती है जो इच्छा को सन्तुष्ट करती है।”

चिंतन की विशेषताएं (characteristics of thinking)

चिंतन की विशेषताएं निम्नलिखित है।

  1. चिंतन मानव का एक विशिष्ट गुण है ।
  2. चिंतन एक मानसिक प्रक्रिया है ।
  3. चिंतन किसी वर्तमान या भावी आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए एक प्रकार का व्यवहार है।
  4. चिंतन के दौरान किसी भी समस्या का समाधान खोजने का प्रयत्न करते हैं।
  5. चिंतन किसी भी व्यक्ति की सहायता करने के लिए हमें समाधान प्रस्तुत करती है।

चिंतन के प्रकार(kinds of thinking)

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चिंतन के चार प्रकार निम्नलिखित हैं।

  1. प्रत्यक्षात्मक चिंतन(perceptual thinking)
  2. प्रत्ययात्मक चिंतन (conceptual thinking)
  3. कल्पनात्मक चिंतन(imagininative thinking)
  4. तार्किक चिंतन(logical thinking)

चिंतन के सोपान(steps of thinking)

चिंतन के सोपान निम्लिखित हैं।

  1. समस्या का आकलन(Appreciation of problem)
  2. सम्बन्धित तथ्यों का संकलन(collection of data)
  3. निष्कर्ष पर पहुचना(driving at conclusion)
  4. निष्कर्ष का परीक्षण(testing conclusion)

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