आगमन विधि और निगमन विधि(Inductive technique and deductive technique)

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आगमन विधि और निगमन विधि(Inductive technique and deductive technique): आज का hindivaani का टॉपिक हैं। आगमन विधि और निगमन विधि। आज हम इस विषय पर आपको विस्तृत जानकारी देंगे।

आगमन विधि और निगमन विधि(Inductive technique and deductive technique)

आगमन विधि और निगमन विधि
आगमन विधि और निगमन विधि

आगमन विधि(Inductive technique)

आगमन विधि के अंतर्गत विशिष्ट से सामान्य शिक्षण सूत्र का प्रयोग किया जाता है।आगमन विधि में सर्वप्रथम छात्र के सामने अनेकों उदाहरण रखे जाते हैं।और फिर उन उदाहरणों के आधार पर कोई निष्कर्ष निकाला जाता है।इस विधि का अधिकांश प्रयोग व्याकरण शिक्षण के अंतर्गत किया जाता है।

आगमन विधि के जनक कौन हैं?

आगमन विधि के जनक अरस्तू हैं।

आगमन विधि के सोपान

आगमन विधि के सोपान निम्नलिखित है।

  • उदाहरणों का प्रस्तुतीकरण
  • विश्लेषण
  • सामान्यीकरण
  • परीक्षण

आगमन विधि के गुण (Merits of indictive technique)

आगमन विधि के गुण निम्नलिखित हैं।

  • यह विधि मनोवैज्ञानिक है।इसमें मूर्त से अमूर्त की ओर चलते हैं।
  • इस विधि के अंतर्गत उदाहरणों के द्वारा कक्षा के वातावरण को सजीव व रुचिकर बनाया जा सकता है।
  • इस विधि में छात्र अध्ययन करने में रुचि लेते हैं।
  • इस विधी में छात्र तर्क के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं।
  • आगमन विधि के द्वारा छात्र के ज्ञान को स्थाई रूप प्रदान किया जाता है।

आगमन विधि के दोष (demerits of inductive technique)

आगमन विधि के दोष निम्नलिखित हैं।

  1. आगमन विधि में अध्यापक को उदाहरण देने की कला में प्रवीण होना आवश्यक है।
  2. इसके अंतर्गत अनेक प्रकार के उदाहरण दिए जाते हैं।जिससे कि समय नष्ट होता है।
  3. उच्च स्तर पर इस विधि का प्रयोग करना कठिन है।

निगमन विधि (deductive technique)

यह विधि आगमन विधि के विपरीत होती है।क्योंकि इसमें छात्र के सामने पहले सिद्धांत रखा जाता है।फिर विभिन्न प्रकार के उदाहरण के द्वारा उसकी पुष्टि की जाती है।इस बीच में शिक्षण सूत्र सामान्य से विशिष्ट की ओर चलता है।

निगमन विधि के जनक कौन हैं ?

निगमन विधि के जनकअरस्तू हैं।

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निगमन विधि के सोपान

निगमन विधि के सोपान निम्नलिखित हैं।

  1. सामान्य नियमों का प्रस्तुतीकरण
  2. संबंधों की स्थापना
  3. उदाहरणों द्वारा परीक्षण

निगमन विधि के गुण (Merits of deductive technique)

निगमन विधि के गुण निम्नलिखित हैं ।

  • इस विधि के अंतर्गत किसी भी पाठ्यक्रम को हम एक निश्चित समय में खत्म कर सकते हैं। और दो तीन उदाहरणों के द्वारा हम किसी सिद्धांत या नियम की पुष्टि कर सकते हैं।
  • यह विधि उच्च स्तर पर भी उपयोगी सिद्ध होती है
  • इस विधि के अंतर्गत छात्र को कम परिश्रम करना पड़ता है। अध्यापक सरलता से इसका अनुसरण कर सकता है।

निगमन विधि के दोष(Demerits of deductive technique)

निगमन विधि के दोष निम्नलिखित हैं।

  • इसमें छात्र सक्रिय नहीं रहता है।
  • इसको बाल केंद्रित नहीं कहा जा सकता है।
  • छात्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिलता है।
  • छात्र को सोचने का अवसर नहीं मिलता
  • प्राथमिक स्तर पर इसका प्रयोग किया जाना कठिन है।

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