अभिवृद्धि और विकास में अंतर |Difference between growth and development

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अभिवृद्धि और विकास में अंतर |Difference between growth and development: अभिवृद्धि और विकास वैसे तो सामान्य रूप से एक ही तइहा के लगते है। परंतु दोनो का अर्थ अलग अलग है। आज हिंदीवानी आपको अभिवृद्धि और विकास में अंतर के बारे में जानकारी प्रदान करेगा।

अभिवृद्धि का अर्थ

कोशिकाओं की गुणात्मक वृद्धि को अभिवृद्धि कहते हैं।
जैसे – ऊंचाई , चौड़ाई, हाथ पैर का बढ़ना, बालों का बढ़ना आदि अभिवृद्धि कहलाते है। सामान्यता व्यक्ति के स्वाभाविक विकास को अभिवृद्धि कहते हैं।

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अभिवृद्धि की परिभाषाये

फ्रैंक के अनुसार अभिवृद्धि की परिभाषा

“कोशिय गुणात्मक वृद्धि ही अभिवृद्धि है।”

मेरिडिथ के शब्दों में अभिवृद्धि की परिभाषा

कुछ लेखक अभिवृद्धि का प्रयोग केवल आकार की वृद्धि के अर्थ में करते हैं। और विकास का प्रयोग विभेद और विशिष्टिकरण के रूप में करते हैं।

फैंक के अनुसार

शरीर एवं व्यवहार के किसी पहलू में होने वाले परिवर्तन अभिवृत्ति कहलाते हैं

विकास का अर्थ

संपूर्ण आकृतियां रूप में परिवर्तन ही विकास है।वास्तव में विकास संपूर्ण अभिवृद्धियों का संगठन है।
उदाहरण – पैरों की वृद्धि, धड़ की वृद्धि ,अभिवृद्धि है।किंतु इनका सम्मिलित रूप शारीरिक विकास कहलाता है। इस विकास से ही शारीरिक क्षमता में परिवर्तन होता है।

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वृद्धि और विकास में अंतर

वृद्धि एवं विकास के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत

  1. मनोलैंगिक विकास सिद्धांत- फ्रायड
  2. संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत- पियाजे
  3. मनोसामाजिक विकास सिद्धांत -इरिक्सन
  4. भाषा विकास सिद्धांत – चोम्स्की
  5. नैतिक विकास सिद्धांत – कोहल बर्ग

अभिवृद्धि और विकास में अंतर |Difference between growth and development

अभिवृद्धि (Growth)विकास ( Development)
अभिवृद्धि का
स्वरूप बाह्य होता है।
विकास आंतरिक और बाह्य दोनों होता है।
अभिवृद्धि कुछ
समय के बाद रुक जाती है।
विकास जीवन पर्यंत चलता
रहता है।
अभिवृद्धि का संबंध शारीरिक तथा
मानसिक
परिपक्वता से हैं।
जबकि विकास वातावरण से भी संबंधित होता है।
अभिवृद्धि का कोई लक्ष्य नहीं होता विकास का कोई ना कोई
लक्ष्य जरुर होता है।
अभिवृद्धि में कोई निश्चित दिशा नहीं होती जबकि विकास की एक निश्चित दिशा होती है।
अभिवृद्धि का प्रयोग संकुचित अर्थ में किया जाता है विकास का प्रयोग व्यापक
अर्थ में किया जाता है।
अभिवृद्धि पर
वातावरण के
कारकों के अनुसार
प्रभाव
पड़ता है वह
लाभदायक
हानिकारक हो
सकता है।
जबकि इसमें परिपक्वता के विकास का संबंध वृद्धि में ही निहित है।

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