अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक|Factors effecting to learning

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अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक: आज का hindivaani का टॉपिक है। अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक। हम इस विषय मे आज विस्तृत रूप से चर्चा करेंगे।

अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक|Factors effecting to learning

अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक|Factors effecting to learning
अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक|Factors effecting to learning

अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक(Factors effecting to learning)

अधिगम के विभिन्न प्रयोगों द्वारा यह पता चला है।कि अधिगम को प्रभावित करने के लिए विभिन्न प्रकार के कारक होते हैं। अतः अग्रलिखित अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक हैं।

बालक की योग्यता एवं क्षमता(Ability and capicity of child)

बालक की योग्यता और क्षमता से आशय उसकी बुद्धि एवं परिपक्वता से हैं।बुद्धि का विकास समय के साथ तेज गति से बढ़ता रहता है।और बालक की परिपक्वता से आशय उसके संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास से होता है।अतः बालक में सीखने की योग्यता एवं शारीरिक परिपक्वता का प्रभाव सीखने की अवस्था को निश्चित करता है।

निश्चित उद्देश्य(Definite aim)

बालको को किसी प्रकार से ज्ञान देने से पहले या आवश्यक है। कि उसका उद्देश्य हमें निश्चित कर लेना चाहिए। और बालकों को उस उद्देश्य से अवगत करा देना चाहिए। ताकि वह उस ज्ञान को सीखने के लिए अपने आपको तैयार कर सके। और उनकी नवीन ज्ञान के प्रति एक उत्साह बना रहे।जिससे कि वह आसानी से और अच्छे से उस ज्ञान को सीख सकें।

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प्रेरकों का प्रयोग (use of motives)

बालको को किसी प्रकार का ज्ञान कराने से पहले उसमें प्रेरक का होना भी अति आवश्यक है।यह प्रेरक छोटे बालकों के लिए पुरस्कार एवं दंड हो सकते हैं।और एक बड़े बालको के लिए प्रशंसा एवं निंदा हो सकती हैं।जिससे बालक नवीन ज्ञान को अतिशीघ्र सीख सकते हैं।

विषय का स्वरूप एवं विधि(Nature and method of subject)

सिखाई जाने वाली विषय वस्तु बालकों के लिए सार्थक, उपयोगी और तत्काल लाभ देने वाली होनी चाहिए।साथ ही साथ शिक्षक को सीखने की विधि, खेल विधि ,क्रियाविधि आदि का प्रयोग करके प्राथमिक कक्षाओं में बालकों को अधिक प्रभावशाली तरीके से ज्ञान प्रदान करना चाहिए। और उच्च कक्षाओं में संपूर्ण विधि, सामूहिक विधी, सहयोगी विधियों से संबंधित आदि का प्रयोग करना चाहिए।

सहायक साधनों का प्रयोग ( Use of materials aids)

सीखने में ज्ञानेंद्रियों मानसिक शक्तियों का सही प्रयोग तभी सफल हो सकता है।जब उसके संसाधन पर्याप्त हो। इसलिए प्रत्येक विषय की शिक्षण के लिए सही सहायक सामग्री का प्रयोग अध्यापक को करना चाहिए।

अभ्यास (Exercise)

किसी भी प्रकार का सीखना हो । अभ्यास के द्वारा उसे स्थाई एवं सरल बनाया जा सकता है।अभ्यास के द्वारा कठिन कार्य को भी सरलता से देखा जा सकता है।

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