अधिगम के वक्र अर्थ और परिभाषा

अधिगम के वक्र अर्थ और परिभाषा :: सीखने की प्रक्रिया में हम हमेशा देखते हैं। कि कभी तेजी और कभी मन्द गति होती हैं। इसे ही हम अधिगम वक्र के नाम से जानते है। आज hindivaani आपको सीखने के वक्र या अधिगम के वक्र की सभी जानकारी देगा। जिसमे आपको सीखने के वक्र का अर्थ, सीखने के वक्र की परिभाषा, अधिगम के वक्र की परिभाषा, सीखने के वक्र के प्रकार, सीखने के वक्र की विशेषताये आदि की बारे में जानकारी प्रदान करेगा।

अधिगम के वक्र अर्थ और परिभाषा

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अधिगम वक्र का अर्थ(Meaning of curve)

हम अपने जीवन में कई प्रकार के नए कार्य को सीखते हैं।जैसे गाड़ी चलाना ,पुस्तक पढ़ना, किसी भी विषय वस्तु को याद करना आदि ।परंतु हमारी इन सब कुछ सीखने में गति शुरुआत में तेज या अंत में धीमें होती है।यह सीखने की गति स्थिर कभी नहीं रहती है।यदि हम अपने सीखने की गति को एक ग्राफ के रूप में प्रदर्शित करें। तो यह एक वक्र रेखा बन जाएगी। इसे ही हम सीखने का वक्र या अधिगम वक्र कहते हैं।

अधिगम वक्र की परिभाषाएं या सीखने की वक्र की परिभाषाएं (Definition of learning curve)

अधिगम वक्र या सीखने के वक्र की परिभाषा निम्नलिखित हैं।

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स्किनर के अनुसार अधिगम वक्र की परिभाषा

“अधिगम का वक्र किसी दी हुई क्रिया में उन्नति या अवनति का वार्गीकृत कागज पर ब्यौरा हैं।”

एलेग्जेंडर के अनुसार सीखने के वक्र की परिभाषा

” जब आंकड़ों को वार्गीकृत कागज पर अंकित किया जाता है तो वह वक्र बन जाता है।”

गेट्स के अनुसार अधिगम के वक्र की परिभाषा

“अधिगम वक्र सीखने की क्रिया से होने वाली गति और प्रगति को व्यक्त करता है।”

रैमर्स और सहयोगियों के अनुसार सीखने के वक्र की परिभाषा

” सीखने का वक्र किसी दी हुई क्रिया की आंशिक रूप से सीखने की पद्धति है।”

सीखने के वक्र के प्रकार या अधिगम के वक्र के प्रकार(Types of learning curve)

सीखने के वक्र के प्रकार या अधिगम के वक्र के प्रकार निम्नलिखित हैं।

  1. सरल रेखीय वक्र
  2. उन्नतोदर वक्र
  3. नतोदर वक्र
  4. मिश्रीत वक्र

सरल रेखीय वक्र – ऐसा वक्र जिसमे सीखने की दर एक समान होती हैं। सरल रेखीय वक्र कहलाती हैं।

सरल रेखीय वक्र
सरल रेखीय वक्र

उन्नतोदर वक्र – ऐसा वक्र जिसमे पहले सीखने की गति तीव्र और उसके पश्चात सीखने की गति धीमी हो जाती हैं। उन्नतोदर वक्र कहते है। इसे अवतल वक्र भी कहा जाता हैं।

उन्नतोदर वक्र
उन्नतोदर वक्र

नतोदर वक्र – ऐसा वक्र जिसमे पहले सीखने की गति धीमी रहती हैं। बाद में तेज हो जाती हैं। ऐसे वक्र को नतोदर वक्र कहते है। इसे उत्तल वक्र के नाम से भी जाना जाता हैं।

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नतोदर वक्र
नतोदर वक्र

मिश्रीत वक्र – जिस वक्र में प्रारंभ में सीखने की गति धीमी बाद में तेज , कुछ समय तक बनी रहती हैं। तथा फिर तेज उसके बाद धीमी हो जाती हैं। मिश्रीत वक्र कहलाती हैं।

मिश्रीत वक्र
मिश्रीत वक्र

अधिगम वक्र की विशेषताये या सीखने के वक्र की विशेषताएं ( characteristics of learning curves)

अधिगम वक्र की विशेषताये निम्नलिखित हैं।

सीखने में उन्नति – अधिगम वक्र के द्वारा सीखने में उन्नति का ज्ञान होता हैं। अधिगम वक्र को तीन भागों में बांटा गया हैं – प्रारम्भिक , मध्य और अंतिम ।

कार्य – कारण का सम्बंध ज्ञात होना – अधिगम वक्र के द्वारा यह पता लगाया जा सकता हैं। कि सीखने की क्रिया और उससे प्रेरित करने वाले साधन और कारकों में क्या सम्बन्ध हैं ? और यह पता चलता हैं। कि यह सम्बन्ध अच्छा है। या खराब।

अधिगम वक्र की अनियमितता(Irregular learning curve )- अधिगम वक्र के द्वारा अधिगम की अनियमित उन्नति प्रकट होती है।प्रकट होने वाली अस्थिरता का कारण पाठ्यक्रम की कठिनाई प्रदूषित वातावरण अनुप्रयुक्त शिक्षण विधि का दोष वक्र में प्रकट हो जाता है।

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अधिगम वक्र के उतार और चढ़ाव के प्रमुख कारण –

अधिगम वक्र के उतार और चढ़ाव या सीखने के वक्र के उतार और चढ़ाव के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

  1. उत्तेजना ( Excitement )
  2. सन्तुलन ( Adaptation)
  3. थकान ( fatigue)
  4. अभ्यास ( exercise)
  5. प्रोत्साहन ( stimulation )

अधिगम वक्र या सीखने के वक्र से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

1.सीखने के वक्र में तीन प्रमुखः तत्व हैं – प्रारम्भिक भाग, अधिगम की मन्द गति, अधिगम की तीव्र गति।

2.अधिगम वक्र की खोज किसने की – ब्रियान, हार्टर ने।

3.वक्र के कितने प्रकार होते है – चार

4.नकारात्मक वक्र की आकृति होती हैं – उत्तल

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