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मोबाइल टावर कैसे लगवाए हिंदी में,मोबाइल टावर लगवाने के लिए कैसे आवेदन करें

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मोबाइल टावर कैसे लगवाए हिंदी में :: हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से पैसे कमाना चाहता हैं। और इन्ही पैसों के चक्कर मे कभी न कभी उसे नुकसान हो जाता हैं। क्योंकि आजकल कुछ शरारती तत्व हमारी इन्ही समस्यायों को जानकर हमारा फायदा उठाते हैं। और हम मोबाइल टावर लगवाने के चक्कर मे ठगी का शिकार हो जाते है।तो आज hindivaani आपको मोबाइल टावर कैसे लगवाए पूरी जानकारी हम आपको उपलब्ध करवाएंगे। जिसमे आपको मोबइल टावर लगवाने के नियम, मोबाइल टावर लगवाने के लिए आवश्यक दस्तावेज, मोबाइल टॉवर लगवाने से कितने पैसे मिलते हैं, आदि की जानकारी देंगे।

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आजकल हम लोग देखते हैं। कि बहुत सारे ऐसे मैसेज या कॉल आती हैं। जो कुछ पैसों का ड्राफ्ट लेकर हमारी जगह में मोबाइल टावर लगवाने के दावा करती हैं। परंतु आपको बता दे यह सब फर्जी लोग होते है। अब आपके मन मे एक प्रश्न होगा। क्या मोबाइल टावर लगवाने में पैसे लगते है? तो इसका जवाब हैं। बिल्कुल नही। मोबाइल टावर लगवाने वाली कंपनी कोई भी पैसे नही लेती हैं। जबकि यह जरूर हैं। कि आपको वह अछे पैसे जरूर देती हैं। आपकी जमीन में टावर लगवाने के लिए।

अब आपके इस प्रश्न का भी उत्तर दे देते है। कि अपनी जमीन में मोबाइल टावर कैसे लगवाये। इसके लिए कुछ कंपनियां हैं। जो साभि मोबाइल कंपनियों के टावर लगवाती हैं। उन वेबसाइट में जाकर आपको जरूर जानकारी भरनी पड़ती हैं। फिर कंपनी के द्वारा अपनी टीम भेजी जाती हैं। और वहां फ्रीक्वेंसी चेक की जाती हैं। अगर कंपनी को सब कुछ सही लगा। तो वह आपसे अग्रीमेंट करवा कर इस काम को जल्द ही आरम्भ कर देती हैं।

मोबाइल टावर लगवाने के लिए कैसे आवेदन करे ? ,मोबाइल टावर लगवाने वाली कंपनी

मोबाइल टावर लगवाने के लिए कुछ विशेष कंपनियां हैं। जो हमे मोबाइल टावर लगवाने की सुविधा मुहैया करवाती हैं। परंतु यह जरूरी हैं। कि हम एक सही कंपनी को चुने। क्योंकि बहुत सारी कंपनी फर्जी भी होती हैं। हम नीचे आपको कुछ कंपनी के नाम और उनकी वेबसाइट दे रहे हैं। जहां पर आप जाकर आसानी से मोबाइल टावर लगवाने के लिए आवेदन कर सकते है।

 1.www.gtlinfra.com 

2.www.bharti-infratel.com 

3.www.atctower.in

4.www.industowers.com

मोबाइल टावर लगवा कर कितना पैसा कमाया जा सकता हैं ?

मोबाइल टावर से आप घर बैठे आसानी से पैसे कमा सकते है। इसको लगवाने से आपको काफी सुविधाएं मिलेंगी। आपकी यदि जमीन की लोकेशन यदि सही जगह हैं। जहां पर यूजर की मांग भी अधिक है। तो आपको अच्छे पैसे मिलेगे इसके लिए। साधरण रूप से इसमे देखा जाए तो यदि आपकी जमीन गाव के किसी एरिया में है। तो आपको कम पैसे मिलेंगे। यदि आपकी जमीन शहर क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। तो आपको अधिक पैसे कंपनी के द्वारा दिये जायेंगे। इसमे आपको 10000 रुपये से लेकर 100000 रुपये तक कि राशि अदा की जा सकती हैं।

मोबाइल टावर लगवाने के लिए आवश्यक दस्तावेज, मोबाइल टावर लगवाने के लिए क्या क्या चाहिए,

मोबाइल टावर लगवाने के लिए आवश्यक नियम और दस्तावेज हम आपको आगे बताये दे रहे है।

1.यदि आप छत या प्लाट में टावर लगवना चाह रहे है। तो इसके लिए अलग अलग मानक निर्धारित किये गए है। जिसमे छत में टावर लगवाने के लिए आपको 500 SQ फ़ीट का एरिया चाहिए होगा।

2.यदि आप खाली प्लाट पर टावर लगवाना चाह रहे होंगे। तो आपको 2000 SQ फ़ीट का एरिया चाहिए होगा।

3.यदि आप खाली जमीन अर्थात कली खेत हैं। तो उसके लिए आपको 2500 Sq फ़ीट की जगह की आवेदन करने के लिए आवश्यकता होगी।

मोबाइल टावर लगवाने के नियम

मोबाइल टावर लगवाने के नियम निम्नलखित हैं।

1.स्ट्रक्चर सेफ्टी सर्टिफिकेट की आवश्यकता पड़ती हैं। जिससे कि आप कंपनी को यह दिखा सके कि यह एक मजबूत बिल्डिंग हैं।

2.टावर लगवने के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टीफिकेट बिल्डिंग ओनर की जरूरत पड़ती हैं।

3.नगर पालिका द्वारा नो ऑब्जेक्शन सर्टीफिकेट की भी हमे आवश्यकता पड़ती हैं।

मोबाइल टावर लगवाने के लाभ

मोबाइल टावर लगवाने के निम्नलखित लाभ है।

1.खाली पड़ी जमीन का सदुपयोग हो पायेगा।

2.बिना मेहनत के हमे अपने जमनी की कीमत प्रति माह मिलती रहेगी।

3.आप मे से किसी एक व्यक्ति को उस टावर पर जॉब मिल जाएगी।

4.आपका जीवन सम्रद्ध हो जाएगा। क्योंकि आपकी जमीन अछि जगह पर हैं। तो आपको अच्छे पैसे भी मिलेंगे।

मोबाइल टावर लगवाने के लिए फ़ोन नम्बर

नीचे हम आपको कुछ कंपनियों की लिंक मुहैया करवा रहे है। जहां पर आप जाकर उन कंपनियों का मोबाईल नम्बर आसानी से पा सकते है। और किसी भी प्रकार की साहयता प्राप्त कर सक

  1. ATC Tower company mobile numbers
  2. indus tower company mobile number
  3. bharti infratel company mobile number

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सतत मूल्यांकन और व्यापक मूल्यांकन। सतत और व्यापक मूल्यांकन में अंतर

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सतत मूल्यांकन और व्यापक मूल्यांकन। सतत और व्यापक मूल्यांकन में अंतर :: मूल्यांकन एक ऐसी प्रक्रिया हैं। जिसमे यह पता लगाया जाता है। की बालक के अनुभवों और विचारों में कितना बदलाव हुआ है। मूल्यांकन के प्रकार होता हैं। जिसमे सतत और व्यापक मूल्यांकन होता हैं। आज hindivaani आपको सतत और व्यापक मूल्यांकन का अर्थ, सतत मूल्यांकन के सोपान, व्यापक मूल्यांकन का अर्थ , सतत और व्यापक मूल्यांकन में अंतर आदि की जानकारी प्रदान करेगा।

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सतत मूल्यांकन का अर्थ

सतत मूल्यांकन एक ऐसा मूल्यांकन होता है।जिसमें शिक्षार्थियों को अध्ययन एवं अध्यापन करने के साथ-साथ, उनके अनुभव और व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों का लगातार मूल्यांकन किया जाता है।सतत मूल्यांकन में प्रत्येक इकाई के अध्ययन की समाप्ति के पश्चात ,विभिन्न उपकरणों के माध्यम से छात्रों का मूल्यांकन किया जाता है।इसे यह पता चलता है कि छात्रों को पढ़ाया गया पाठ कितना समझाया है, या कितना नहीं।

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सतत मूल्यांकन का महत्व

कक्षा की उन्नति का प्रमुख साधन वार्षिक परीक्षा व उसके परिणाम होते हैं।इस प्रथा में सभी भलीभांति परिचित हैं।संपूर्ण स्कूल संकल्पना एक कार्यक्रम में अंतर्निहित सतत मूल्यांकन इस समस्या का प्रमुख समाधान है।सतत मूल्यांकन के माध्यम से बालक की योग्यता तथा योग्यता के बारे में नियमित रूप से उपयोगी तत्व का संकलन संभव हो सकेगा।

एक प्राथमिक शिक्षक अपने ज्ञान कार्यकुशलता की सहायता से मूल्यांकन का प्रयोग विद्यार्थी की ज्ञान की कठिनाइयों और उसके कारणों का निदान करने के लिए कर सकता है।वह उचित उपचारात्मक साधन अपना कर उसका गतिरोध एवं क्षति को कम से कम कर सकता है।तथा इस तरह से उसे अधिकतम ज्ञान प्राप्त करने में सहायता कर सकता है।

लोग क्या पढ़ रहे है – ◆मूल्यांकन का अर्थ और परिभाषा

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सतत मूल्यांकन की विधियां

वर्तमान समय में देखा जाए तो वार्षिक परीक्षा का अर्धवार्षिक परीक्षा का समय अंतराल का भी अधिक होता है।जिससे कि बालकों में होने वाली कठिनाइयों को हम नहीं जान पाते हैं। अतः बालकों की प्रगति को निरंतर मूल्यांकन करने के लिए सतत मूल्यांकन अति आवश्यक विधि है।सतत मूल्यांकन के लिए अनेक प्रकार की विधियों का प्रयोग किया जा सकता है। उदाहरण –

  • सत्र परीक्षा
  • इकाईपरीक्षा
  • मासिक परीक्षाएं
  • सेमेस्टर पद्धति

सतत मूल्यांकन के सोपान

सतत मूल्यांकन के सोपान निम्नलिखित हैं।

  1. उद्देश्य की व्याख्या
  2. परिस्थिति का ज्ञान
  3. प्रवृत्ति का प्रयोग
  4. मूल्यांकन की प्रवृत्तियों का चयन
  5. निष्कर्ष निकालना
  6. भविष्यवाणी
  7. प्रदत्त का विश्लेषण
  8. प्राप्त साक्ष्यों का विवेचन

सतत मूल्यांकन के क्षेत्र

सतत मूल्यांकन के क्षेत्र निम्नलिखित हैं।

  1. छात्र की अभिरुचि
  2. छात्र की सृजनात्मकता
  3. ज्ञान
  4. परिवारिक रुचियां
  5. बोध
  6. वैयक्तिक रुचियां
  7. शारीरिक स्थिति तथा स्वास्थ्य
  8. अनुप्रयोग
  9. विद्यार्थी की शैक्षिक उपलब्धि
  10. विद्यार्थी की त्रुटियां

व्यापक मूल्यांकन का अर्थ

शिक्षा जीवन पर शिक्षा एक जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है।जो मानव जीवन के सभी बच्चों को प्रभावित करती हैं।ज्ञान के साथ-साथ हमारे जीवन में मूल्यांकन में किसी न किसी रूप में जीवन पर्यंत चलता रहता है।बालक के अधिगम को किसी ना किसी रूप से प्रभावित करने वाले स्थूल सूक्ष्म ,प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आदि अनेक प्रकार के पक्ष होते हैं।जिनका मूल्यांकन करना व्यापक मूल्यांकन कहलाता है।

व्यापक मूल्यांकन के विभिन्न पक्ष

व्यापक मूल्यांकन के विभिन्न निम्नलिखित हैं।

संज्ञानात्मक पक्ष – संज्ञानात्मक पक्ष के अंतर्गत बालक के अंदर निहित ज्ञान ,स्मरण ,पुनः स्मरण आदि चीजें सम्मिलित होती हैं।जिनका मूल्यांकन किया जाता है।

भावनात्मक पक्ष – इसकेे अंतर्गत बालक के भाव पक्ष, दया करुणा सत्य निष्ठा आदि का मूल्यांकन किया जाता है।

कौशलात्मक पक्ष – इसमें निहित कार्यकुशलता कार्य करने की क्षमता आदि का मूल्यांकन किया जाता है।

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गणतंत्र दिवस पर निबन्ध हिंदी में|Republic day essay in hindi

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गणतंत्र दिवस पर निबन्ध हिंदी में|Republic day essay in hindi :: भारत के खास राष्ट्रीय पर्वो ने से एक गणतंत्र दिवस हैं। इस दिन भारत देश मे संविधान को लागू किया गया था। इसी के उपलक्ष्य में 26 जनवरी मनाया जाता हैं। आज Hindivaani आपको गणतंत्र दिवस पर निबन्ध हिंदी में ,या कहे 26 जनवरी पर हिंदी में निबन्ध और गणतंत्र दिवस का महत्व,गणतंत्र दिवस क्यों मनाते है, गणतंत्र दिवस निबन्ध प्रस्तावना सहित आदि की जानकारी प्रदान करेगा।

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गणतंत्र दिवस जिसे हम 26 जनवरी के नाम से भी जानते है। यह दिन हम सभी के लिए एक गौरव का दिन होता हैं। क्योंकि इस दिन भारत देश में गणतंत्र और संविधान की स्थापना हुई थी। इस से भारत देश संप्रभु , धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बना था। और इसके पश्चात भारत देश मे किन्हीं बाहरी शक्तियों का शासन नही बचा था।

इस दिन सम्पूर्ण देश मे राष्ट्रीय अवकाश होता हैं। सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय, स्कूल , कालेज आदि में झंडा फहराया जाता हैं।इसके पश्चात राष्ट्रगान गाया जाता है।और साथ ही साथ विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं, शिक्षकों और छात्र, छात्राओं के भाषण, निबन्ध प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जाता हैं। जिस से की सभी लोगो को हमारे देश के वीर सपूतों की गाथा को ज्ञान हो। जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन देश के प्रति समर्पित कर दिया था।

26 जनवरी के दिन प्रभात फेरी, और विभिन्न प्रकार के देश भक्ति कार्यक्रम का भी आयोजन होता हैं। दिल्ली में राष्ट्रपति के समक्ष राजपथ में भारतीय सेना के द्वारा परेड आदि का आयोजन किया जाता हैं। और हर प्रदेश की झांकी का भी आयोजन होता हैं। जिसके माध्यम से सभी प्रदेश की संस्कृति को दिखाया जाता हैं।

उपयोगी लिंक – हमारे जीवन ने शिक्षक का महत्व

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प्रस्तावना

गणतंत्र दिवस हमारे राष्ट्रीय पर्वो में से एक हैं। जिसे हम सभी लोग वो चाहे किसी भी धर्म सम्प्रदाय का हो बड़े धूम धाम से मनाया जाता हैं। गणतंत्र दिवस अर्थात 26 जनवरी को मनाने का मुख्य कारण इस दिन भारत देश को गणतंत्र राष्ट्र और इस दिन संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता हैं। गणतंत्र दिवस को हम सभी लोग बड़े उत्सव की भांति मानते है। यह राष्ट्रीय पर्व हम सभी के लिए एकता और अखंडता का प्रतीक हैं।

गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता हैं ? 26 जनवरी क्यों मनाया जाता हैं ?

गणतंत्र दिवस को मनाने का मुख्य कारण इस दिन भारत का संविधान भारत देश मे लागू हुआ था।इस संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे थे। इस दिन भारत देश ने अपने को संप्रभु , लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया।इस वजह से भारत देश मे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की मनाने की शुरुवात हुई थी।

इस चीज की शुरुवात दिसम्बर 1930 ई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में हुई थी। जिसमे यह कहा गया कि भारत को यदि स्वायत्त राष्ट्र घोषित नही किया गया तो भारत देश अपने आप को स्वत्रंत राष्ट्र घोषित कर दिया जाएगा।इसके बाद जब अंग्रेजी शासन के द्वारा कोई भी जवाब नही दिया गया।

तो भारतीयो के द्वारा सक्रिय आंदोलन की शुरुवात की गई थी। इस वजह से भारत वर्ष में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता हैं।

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गणतंत्र दिवस 2020 के मुख्य अतिथि कौन हैं?

गणतंत्र दिवस 2020 के मुख्य अतिथि जेअर बोल्सोनारो हैं। ये जर्मनी देश के राष्ट्रपति हैं। यह ही गणतंत्र दिवस 2020 के मुख्य अतिथि होंगे। भारत देश के प्रधानमंत्री ब्रिक्स सम्मेलन में जेअर बोल्सोनारो को गणतंत्र दिवस के लिए आमंत्रित किये गए थे। जिस आमंत्रण को जेअर बोल्सोनारो ने स्वीकार कर लिया था।

गणतंत्र दिवस का महत्व, 26 जनवरी का महत्व

गणतंत्र दिवस हम सभी लोगो के लिए एकता और अखंडता का प्रतीक हैं। यह हम सभी को संविधान की महत्वा को बताता हैं। जिसकी वजह से हम सभी लोग स्वतन्त्रता और अपने अधिकारों के साथ आसानी से जी पा रहे है।

वास्तव में देखा जाए तो भारत देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो गया था ।परन्तु भारत देश को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद ही मिली। यह हम सभी के लिए हर्ष और उल्लास का राष्ट्रीय पर्व हैं। जिसे हम सभी लोग बड़े भव्य तरीके से मनाते है।

गणतंत्र दिवस कैसे मनाते है? 26 जनवरी कैसे मनाया जाता है ?

1.गणतंत्र दिवस अथवा 26 जनवरी को निम्नलखित तरीको से मनाया जाता हैं।

2.सर्वप्रथम गणतंत्र दिवस की शुरुवात झंडा रोहण से होती हैं। उसके बाद राष्ट्रगान गाया जाता हैं।

3.स्कूल , कॉलेज में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं। इन प्रतियोगिताओं का सम्बन्धित विषय भारत की स्वतंत्रता से सम्बंधित रखा जाता हैं। जिस से प्रत्येक लोग को भारत देश की आजादी और संविधान के बारे में पता चल पाए।

4.विभिन्न प्रकार की प्रभात फेरी , नुक्कड़ नाटक , स्कूल में भी नाटकों को आयोजन किया जाता हैं।

5.इस दिन सम्पूर्ण भारत वर्ष में राष्ट्रीय अवकाश होता हैं।

6.छात्र , छात्राओं, शिक्षकों के द्वारा भाषण आदि दिए जाते है। स्वतंत्रता से सम्बंधित जानकारियां साझा की जाती हैं।

उपसंहार

भारत देश में किसी भी प्रकार की समस्या आने पे हम सभी का यह दायित्व होना चाहिए । कि हम लोग साथ खड़े होंके उस विषय का निस्तारण कर सके। साथ ही साथ हमे भारत की धरोहर और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए। और हम सभी लोगो को मिल जुलकर और भारत देश की एकता और अखंडता की शपथ लेनी चाहिए।

गणतंत्र दिवस पर 10 लाइन, 26 जनवरी पर 10 लाइन

गणतंत्र दिवस पर 10 लाइन निम्नलखित हैं।

1.गणतंत्र दिवस हमारे देश के राष्ट्रीय पर्वो में से एक हैं। जिसे हम बड़े उल्लास और हर्ष के साथ मानते है।

2.गणतंत्र दिवस को हम 26 जनवरी को मनाया जाता हैं। जिसे हम रिपब्लिक डे भी कहते है।

3.26 जनवरी को सरकारी दफ्तरों , स्कूल ,कॉलेज में झंडा फहराया जाता हैं। जिसके बाद राष्ट्रगान गाया जाता हैं।

4.इस दिन स्वतंत्रता से सम्बंधित विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है।

5.गणतंत्र दिवस को मानने का मुख्य कारण इस दिन भारत देश का संविधान लागू हुआ था।

6.इस दिन नई दिल्ली के राजपथ में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन होता हैं। जिसमे हर प्रदेश के लोग प्रतिनिधित्व करते हैं। जो अपनी संस्कृतियों का प्रदर्शन करते है।

7.इस दिन किसी भी देश का प्रथम नागरिक या कोई और मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करता हैं।

8.यह पर्व हम सभी के लिए एकता और अखण्डता का प्रतीक हैं।

9.इस दिन छात्र ,छात्राओं के द्वारा भाषण के द्वारा वीर सपूतों की गाथाओं का वर्णन किया जाता हैं।

10.गणतंत्र दिवस के दिन भारत एक सम्प्रभु,धर्मनिरपेक्,और
लोकतांत्रिक राष्ट्र घोषित हुवा था।

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प्रमुख शिक्षण विधियां और प्रतिपादक

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प्रमुख शिक्षण विधियां और प्रतिपादक : जैसा कि आपको सभी लोगो को पता ही होगा। कि CTET/HTET/KVS/MPTET आदि में शिक्षण विधियां और प्रतिपादक आदि से एक प्रश्न जरूर बनता हैं। तो यह जरूरी हैंम की हम इस टॉपिक को न छोड़े। तो आज hindivaani आपको प्रमुख शिक्षण विधियां और प्रतिपादक के बारे में जानकारी देगा।

जिस से की आपको प्रश्नपत्र में शिक्षण विधियां और प्रतिपादक से मिलने वाले प्रश्न के उत्तर को आसानी से दे पाएंगे।

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प्रमुख शिक्षण विधियां और प्रतिपादक

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आगमन विधिअरस्तू
निगमन विधिअरस्तू
प्रश्नोत्तर विधि सुकरात
प्रोजेक्ट विधिकिर्कपट्रिक
खेल विधिकाल्डवेल कुक
डाल्टन विधिपारकर्ट्स
किंडरगार्टन विधिफ्राबेल
मांटेसरी विधिमारिया मांटेसरी
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गैरी विधिएडवर्ट
विनेटका विधिवाशगर्न
ड्रेकली विधिड्रेकली
संवाद विधिप्लेटो

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कल्पना का अर्थ और परिभाषा, कल्पना के प्रकार

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कल्पना का अर्थ और परिभाषा, कल्पना के प्रकार: चिंतन और तर्क के बाद आज hindivaani आपके लिए लेकर आया है।कल्पना टॉपिक। जिसमे आपको कल्पना से सम्बंधित हर एक जानकारी इसी ही आर्टिकल में पता चलेगी। इसके अंतर्गत आपको कल्पना का अर्थ और परिभाषा, कल्पना के प्रकार आदि के बारे में जानकारी मिलेगी।

कल्पना का अर्थ और परिभाषा, कल्पना के प्रकार

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कल्पना का अर्थ

जब हमारे सामने कोई उद्दीपक उपस्थित नहीं होता है। तो हम उसके प्रति जो विचार अपने मन में करते हैं उसे हम कल्पना कहते हैं।कल्पना में पुराने अनुभवों के नीव पर विचारों के नई इमारत खड़ी की जाती है। यह नई इमारत देश और काल से परे होती है।

कल्पना की परिभाषा

कल्पना की परिभाषा निम्नलिखित मनोवैज्ञानिकों के अनुसार है।

मैकडुगल के अनुसार कल्पना की परिभाषा

“हम कल्पना या कल्पना करने की उचित परिभाषा अप्रत्यक्ष बातों के संबंध में विचार करने के रूप में कर सकते हैं।”

डमविल के अनुसार कल्पना की परिभाषा

“मनोविज्ञान में कल्पना शब्द का प्रयोग सब प्रकार की प्रतिमाओं के निर्माण को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।”

रायबर्न के अनुसार कल्पना की परिभाषा

“कल्पना वह शक्ति है जिसके द्वारा हम अपने प्रतिमाओं का नए प्रकार से प्रयोग करते हैं ।यह हमको अपने पिछले अनुभव को किसी ऐसे वस्तु का निर्माण करने में सहायता देती है।जो पहले कभी नहीं थी।”

लोग क्या पढ़ रहे है – ◆चिंतन का अर्थ और परिभाषा

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कल्पना के प्रकार

कल्पना के प्रकार निम्नलिखित हैं।

◆मैकडुगल के अनुसार कल्पना के दो प्रकार होते हैं।

मैकडुगल के अनुसार कल्पना के प्रकार

पुनरुत्पाद कल्पना ।
उत्पाद कल्पना।

◆उत्पाद कल्पना दो प्रकार की होती है।
रचनात्मक
सृजनात्मक

ड्रेवर के अनुसार कल्पना दो प्रकार की होती है।

ड्रेवर के अनुसार कल्पना के प्रकार

पुनरुत्पाद कल्पना
उत्पाद कल्पना

●उत्पाद को दो प्रकार के भागों में बांटा गया है।

अदानात्मक
सृजनात्मक

●सृजनात्मक कल्पना को दो भागों में बांटा गया है।
कार्य साधक
सौंदर्यात्मक

●कार्य साधक कल्पना को दो भागों में बांटा गया।

विचारात्मक
क्रियात्मक

●सौंदर्यात्मक कल्पना को दो भागों में बांटा गया है

कलात्मक
मनतरंग

कल्पना की शिक्षा में उपयोगिता

कल्पना की शिक्षा में उपयोगिता निम्नलिखित हैं।

1.कल्पना बालक को उनके अनुभव की सीमा से पार कर सोचने की क्षमता प्रदान करता है।

2.कल्पना बालक को अपने लक्ष्य को केंद्रित कर उसके विषय में चिंतन मनन करके पाने की इच्छा जाहिर करता है।

3.कल्पना बालक को अपनी रचनात्मक शक्ति का विकास करने में योग देती है।

4.भाटिया के अनुसार ” कल्पना बालक को उसके कार्यों का परिणाम बताकर उसका पथ प्रदर्शन करती है”

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sarileru neekevvaru meaning in hindi|sarileru neekevvaru का हिंदी मतलब

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sarileru neekevvaru meaning in hindi|sarileru neekevvaru का हिंदी मतलब :साउथ इंडियन मूवी आप मे से किसे नही पसन्द होगी।साउथ इंडियन मूवी में महेश बाबू एक जाना पहचाना चेहरा हैं। उनकी फिल्म का लोगो मे बेसब्री से इन्तेजार रहता हैं। महेश बाबू की अब एक नई मूवी आ रही हैं। जिसका नाम sarileru neekevvaru हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि sarileru neekevvaru का हिंदी मतलब क्या है। तो आज hindivaani आपको sarileru neekevvaru का हिंदी मतलब बताएगा। जिस से आपको आसानी से sarileru neekevvaru meaning in hindi पता चल जाएगी।

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क्या होता हैं sarileru neekevvaru का हिंदी मतलब ?

वैसे तो sarileru neekevvaru का हिंदी अर्थ या कहे sarileru neekevvaru का हिंदी मतलब बहुत है। परन्तु सही में इसका अर्थ “कोई तुम्हारा मुकाबला नही कर सकता “। और तमिल में बात की जाए तो इसका मतलब तुम नही है। और तेलुगु में sarileru neekevvaru में इसका अर्थ बार – बार या तो अक्सर होता हैं।

sarileru neekevvaru meaning in english

sarileru neekevvaru को इंग्लिश में अर्थ समझना आसान होगा।sarileru neekevvaru meaning in english , so often हैं। जिसका ऊपर हमने आपको अर्थ बताया ही हैं। कि इसका “कोई तुम्हारा मुकाबला नही कर सकता” है।

sarileru neekevvaru movie के बारे में जानकारी –

sarileru neekevvaru मूवी में लीड रोल में महेश बाबू हैं। इस मूवी में वह indian army के major ajay krishna का रोल निभा रहे है।यह मूवी 11 जनवरी 2020 को रिलीज़ होगी।

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अपसारी और अभिसारी चिंतन में अंतर| Diffrence between divergent and convergent thinking

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अपसारी और अभिसारी चिंतन में अंतर| Diffrence between divergent and convergent thinking – चिंतन से सम्बंधित हमने आपको आर्टिकल उपलब्ध करा दिया गया। अब बारी आती हैं। अपसारी और अभिसारी चिंतन क्या है। तो आज hindivaani का आर्टिकल होगा। अपसारी और अभिसारी चिंतन में अंतर। या कहे अपसारी चिंतन किसे कहते है? या अभिसारी चिंतन किसे कहते है।

अपसारी और अभिसारी चिंतन में अंतर| Diffrence between divergent and convergent thinking

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अपसारी चिंतन (divergent thinking) –

ऐसा चिंतन जिसमें हम किसी भी विषय वस्तु के बारे में भिन्न-भिन्न प्रकार से सोचते हैं।उसे हम अपसारी चिंतन कहते हैं। एक सरल शब्दों में कहा जाए थे।अपसारी चिंतन एक ऐसा चिंतन होता है जिस मैं व्यक्ति एक ही समस्या के समाधान के लिए भिन्न विभिन्न विधियों के द्वारा विचार करता है।

उदाहरण – जैसे ईश्वर एक है। इस विषय पर चर्चा करने पर विभिन्न व्यक्तियों से हमें अलग-अलग प्रकार के विचार मिलेंगे।
और कहा जाए ईश्वर की प्राप्ति के साधन कौन कौन से है। तो हर व्यक्ति के अपने अलग अलग विचार होंगे। तो यह अपसारी चिंतन का उदाहरण होगा।

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अभिसारी चिंतन (Convergent thinking) –

यह एक ऐसा चिंतन होता हैं। जिसमे हम किसी भी विषयवस्तु के प्रति श्रेष्ठ विचार करते है। इसे ही अभिसारी चिंतन कहते है।

जैसे – ईश्वर को प्राप्ति के लिए वैसे तो बहुत से साधन हम परन्तु मनुष्य के अंदर एक विचार आता हैं। भक्ति ही श्रेष्ठ साधन हैं।

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तर्क का अर्थ और परिभाषा, तर्क के सोपान

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तर्क का अर्थ और परिभाषा, तर्क के सोपान: चिंतन और तर्क दो ऐसे टॉपिक हैं। जो काफी महत्वपूर्ण हैं। इस से पहले वाले आर्टिकल में हमने आपको चिंतन के बारे में समग्र जानकारी मुहैया कराई थीं। आज hindivaani आपको तर्क से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएगा।

तर्क का अर्थ और परिभाषा, तर्क के सोपान

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तर्क का अर्थ

तर्क कार्य कारण में संबंध स्थापित करके हमें किसी निष्कर्ष पर पहुंचने एक ही समस्या का समाधान करने में सहायता देता है।

तर्क की परिभाषाएं

तर्क की परिभाषाएं निम्नलिखित हैं।

मन के अनुसार तर्क की परिभाषा

“तर्क उस समस्या को हल करने के लिए अतीत के अनुभवों को सम्मिलित रूप प्रदान करता है।जिसको केवल पिछड़े समाधानो का प्रयोग करके हल नहीं किया जा सकता है।”

गेट्स व अन्य

“तर्क फलदायक चिंतन है जिससे किसी समस्या का समाधान करने के लिए पूर्व अनुभवों को नई विधियों से पुनर्संगठित या सम्मिलित किया जाता है।”

तर्क के प्रकार

तर्क दो प्रकार का होता है।

  • आगमन तर्क
  • निगमन तर्क

आगमन तर्क – आगमन तर्क एक ऐसा तर्क होता है।जिसमें व्यक्ति अपने अनुभवों या विचारों के द्वारा किसी सामान्य नियम या सिद्धांत का निरूपण करता है।

निगमन तर्क – इस तर्क में व्यक्ति दूसरे के अनुभवों विश्वास व सिद्धांतों का प्रयोग करके सत्य का परीक्षण करता है।

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तर्क के सोपान

तर्क के 5 सोपान निम्लिखित हैं।

समस्या की उपस्थिति – किसी भी प्रकार का तर्क करने के लिए यह आवश्यक हैं। की समस्या की उपस्थिति जरूरी हो।

समस्या की जानकारी – किसी भी प्रकार की समस्या होने पे उसके बारे में समग्र जानकारी इकठ्ठा की जाती हैं। फिर उसके तथ्यों को एकत्र किया जाता हैं।

समस्या समाधान के उपाय – व्यक्ति समस्या के समाधान के लिए फिर ऊपर ढूंढता हैं।

एक उपाय का चुनाव – कौन सा उपाय अच्छा है। और कौन सा उपाय खराब है। इसका चयन किया जाता हैं।

उपाय का प्रयोग – व्यक्ति अपने निर्णय के अनुसार समस्या का समाधान करने के लिए उपाय का प्रयोग करता हैं।

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बिना जिम के घर पर बॉडी कैसे बनाये,घर पर बॉडी कैसे बनाये

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बिना जिम के घर पर बॉडी कैसे बनाये,घर पर बॉडी कैसे बनाये– आजकल हर किसी व्यक्ति को एक अच्छी पर्सनालिटी की आवश्यकता होती हैं। क्योंकि ऐसा कौन सा व्यक्ति होगा जिसे अच्छा दिखना नही पसन्द। एक अच्छी बॉडी बनाने के लिए वैसे तो बहुत सारे उपाय हैं। जिनमे से एक जिम भी हैं। परंतु यह साभि लोग अफ़्फोर्ड नही कर पाते है। तो यह जरूरी हैं। कि इसका कोई दूसरा विकल्प ढूंढा जाए। तो दूसरा विकल्प निकलता हैं। बॉडी बनाने के घरेलू उपाय। तो आज hindivaani आपको यह बताएगा। कि बिना जिम के घर पर बॉडी कैसे बनाये।

बिना जिम के घर पर बॉडी कैसे बनाये,घर पर बॉडी कैसे बनाये

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बिना जिम के घर पर बॉडी बनाने के लिए डाइट

एक अच्छी बॉडी बनाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी हैं।डाइट प्लान। अगर हमारे डाइट प्लान में बदलाव नही हुआ तो कोई अंतर नही आएगा। इसके लिए हमे एक ऐसा डाइट प्लान चाहिए। जिसमें हमे जितनी कैलोरी की जरूरत हो । उस से अधिक हमारे शरीर को कैलोरी मिले। इस समस्या के समाधान करने के लिए हम आपको उदाहरण के तौर पर बिना जिम के घर पर बॉडी बनाने के लिए डाइट प्लान बता रहे है। जिस से आपको मदद मिलेगी।

  • सुबह 8 बजे – अंकुरित चने और मूंग।
  • सुबह 9 बजे – ओट्स / दलिया।
  • सुबह 11 बजे – दो अंडे का आमलेट।
  • दोपहर 1 बजे – एक कटोरी दाल/ सब्जी , एक कटोरी चावल , दो से तीन रोटी।
  • शाम चार बजे – बनाना शेक/ मूंगफली/ भुने हुए चने
  • शाम 6 बजे – 4 – 5 उबले अंडे ।
  • रात 9 बजे – एक कटोरी दाल/ सब्जी , एक कटोरी चावल , दो से तीन रोटी।

नोट – बनाना शेक बनाने में आप एक बनाना, आधा गिलास दूध, 4 -4 बादाम काजू, एक चम्मच पीनट बटर, और 5-6 खजूर का उपयोग करे।

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घर पर बॉडी बनाने के टिप्स,बिना जिम के बॉडी बनाने के टिप्स

घर पर बॉडी बनाने के टिप्स निम्नलिखित हैं।

1.यह आवश्यक हैं। की आपकी यदि कोई बुरी आदत हैं। तो आप जरूर छोड़ दे। उदाहरण के लिए जैसे धूम्रपान करने।

2.नियमित अपनी डाइट प्लान का जरूर ध्यान रखे। प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थो का सेवन करे।

3.घर पर आप एक्सरसाइज जरूर करे।जिस से आप जो कुछ भी खाए । उस से एक्सरसाइज़ के बाद आपकी बॉडी उसे अवशोषित कर पाए।

4.सुबह आप दौड़ने भी जा सकते है। जिस से की आपकी पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहेगी। और आप आसानी से खाने को पचा पाएंगे।

5.प्रोटीन के लिए आप पनीर , भुने हुए पीनट, आदि का प्रयोग करे।

6.कुछ यूट्यूब चैनल का सहारा भी लेना आवश्यक हैं। जिस से की आपको हर प्रकार की जानकारी मिल सके।

जल्दी बॉडी बनाने का तरीका

खाने के साथ साथ व्यायाम भी एक अच्छी बॉडी बनाने के लिए जरूर हैं। तो आइए देखते हैं कि जल्दी बॉडी बनाने का क्या तरीका हैं।

1.नियमित व्यायाम करें। और हमे बॉडी के हर पार्ट की एक्सरसाइज करें। जिस से की आपके बॉडी का हर अंग वृद्धि कर सके।

2.इन सब चीजों के लिए यह जरूरी हैं। कि आप घर पर पुश-अप , पूल-अप्स, स्कॉट्स, बेंच प्रेस, डम्बल आदि से सम्बंधित बाइसेप्स की एक्सरसाइज कर सकते हैं।

3.नियमित घर पर आप 45 मिनट जरूर ही अपनी एक्सरसाइज में समय दे।

4.प्रोटीन युक्त अधिक खाद्य पदार्थ का उपयोग करे।

5.आप हफ्ते में यह जरूर बाट ले कि इस दिन में इस पार्ट की एक्सरसाइज करनी है। इस से आप अछे से सारे बॉडी पार्ट पर ध्यान दे पाएंगे।

घर पर बॉडी बनाने की एक्सरसाइज/ व्यायाम

घर पर बॉडी बनाने के वैसे तो बहुत सारे व्यायाम हैं। परंतु हम आपको कुछ मेन एक्सरसाइज बता रहे हैंम जिससे आपको साहयता मिलेगी।

  1. पुश अप
  2. एबडॉमिनल क्रंचेज
  3. स्काट
  4. ट्राइसेप डिप्स
  5. पॉम
  6. वाल सिट्स

आपको हम अगले आर्टिकल में इन एक्सरसाइज के बारे में विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध करा देंगे।

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चिंतन का अर्थ और परिभाषा, चिंतन के सोपान

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चिंतन का अर्थ और परिभाषा, चिंतन के सोपान :आज का hindivaani का टॉपिक हैं। चिंतन का अर्थ और परिभाषा, चिंतन के सोपान। इसमे आपको यह पता चलेगा। कि चिंतन किसे कहते है। साथ ही साथ सभी जानकारियां चिंतन से सम्बंधित आपको यहां उपलब्ध होगी।

चिंतन का अर्थ और परिभाषा, चिंतन के सोपान

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चिंतन का अर्थ (meaning of thinking)

मनुष्य के सामने कभी ना कभी किसी प्रकार की समस्या जरूर आती है। समस्या के समाधान के लिए वह किसी ने किसी प्रकार का उपाय जरूर सोचता है।उसकी इस प्रकार सोचते और विचार करने की क्रिया को चिंतन कहते हैं।

चिंतन की परिभाषाएं (definition of thinking)

चिंतन की परिभाषा विभिन्न मनोवैज्ञानिकों के अनुसार निम्नलिखित हैं।

रॉस के अनुसार

” चिंतन मानसिक क्रिया का ज्ञानात्मक पहलू है।या मन की बातों से संबंधित मानसिक क्रिया है।”

वैलेंटाइन के अनुसार

“चिंतन शब्द का प्रयोग उस क्रिया के लिए किया जाता है। जिसमें श्रृंखलाबद्ध विचार किसी लक्ष्य या उद्देश्य की ओर अविराम गति से प्रवाहित होते हैं”

रायबर्न के अनुसार चिंतन की परिभाषा

“चिंतन इच्छा संबंधी क्रिया है।जो किसी असंतोष के कारण आरंभ होती है।और प्रयास के आधार पर चलती हुई स्थिति पर पहुंच जाती है जो इच्छा को सन्तुष्ट करती है।”

चिंतन की विशेषताएं (characteristics of thinking)

चिंतन की विशेषताएं निम्नलिखित है।

  1. चिंतन मानव का एक विशिष्ट गुण है ।
  2. चिंतन एक मानसिक प्रक्रिया है ।
  3. चिंतन किसी वर्तमान या भावी आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए एक प्रकार का व्यवहार है।
  4. चिंतन के दौरान किसी भी समस्या का समाधान खोजने का प्रयत्न करते हैं।
  5. चिंतन किसी भी व्यक्ति की सहायता करने के लिए हमें समाधान प्रस्तुत करती है।

चिंतन के प्रकार(kinds of thinking)

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चिंतन के चार प्रकार निम्नलिखित हैं।

  1. प्रत्यक्षात्मक चिंतन(perceptual thinking)
  2. प्रत्ययात्मक चिंतन (conceptual thinking)
  3. कल्पनात्मक चिंतन(imagininative thinking)
  4. तार्किक चिंतन(logical thinking)

चिंतन के सोपान(steps of thinking)

चिंतन के सोपान निम्लिखित हैं।

  1. समस्या का आकलन(Appreciation of problem)
  2. सम्बन्धित तथ्यों का संकलन(collection of data)
  3. निष्कर्ष पर पहुचना(driving at conclusion)
  4. निष्कर्ष का परीक्षण(testing conclusion)

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